चरनदास

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चरनदास[संपादित करें]

चरनदास एक योगध्यान साधक का नाम है, जिनका जन्म सन १७३० ई. के लगभग हुआ था, इन्होने एक सम्प्रदाय की स्थापना की थी, जिसे "चरनदासी" सम्प्रदाय कहा जाता है, इस सम्प्रदाय का आधार कबीरदासी सम्प्रदाय के समान है, इन्होने धर्मोपदेश अनेक हिन्दी कविता ग्रन्थों में दिये है और रचना की है। चरनदास भार्गव ब्राह्मण तथा अलवर राजस्थान के रहने वाले थे, बाद में यह दिल्ली मे रहने लगे, इनकी दो शिष्यायें थी जो सहजोबाई और दयाबाई के नाम से जानी जाती थी। इन दोनो ने पद्य में योग सम्बन्धी ग्रन्थ लिखे है, चरनदास का जन्म समय नागरी प्रचारिणी सभा के अनुसार संवत १७६० और देह त्याग का समय संवत १८३८ बताया जाता है, इनके द्वारा रचित जो ग्रन्थ मिले है वे इस प्रकार से हैं:-

  • अष्टांगयोग.
  • नरसाकेत.
  • सन्देह सागर
  • भक्ति सागर
  • हरिप्रकाश टीका
  • अमरलोक खण्डधाम
  • भक्तिपदारथ
  • शब्द
  • दानलीला
  • मनविरक्तकरन गुटका
  • राममाला
  • ज्ञानस्वरोदय.