ग्रंथ

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'ग्रंथ का अर्थ पुस्तक होता है। यह मुख्य रूप से धार्मिक और ऐतिहासिक पुस्तकों के लिए प्रयोग किया जाता है। भारत का सर्वप्राचीन धर्मग्रंथ वेद है, जिसके संकलंकर्ता महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास को माना जाता है। वेद बसुधैव्य कुटुंबकम का उपदेश देता है। भारतीय परंपरा वेदों को नित्य और आप और देवीय मानती है । वेद चार हैं - ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद। इन चार वेदों को संहिता कहा जाता है।

ऋग्वेद

ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहा जाता है। इसमें 10 मंडल 1028 (बालखिल्य पाठ के 11 सूत्र सहित) एवं 10,462 ऋचाएं है । इस वेद के ऋचाओं के पढ़ने वाले ऋषि को होत्र कहते हैं ।

विश्वामित्र द्वारा रचित के ऋग्वेद के तीसरे मंडल में सूर्य देवता सावित्री को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है। इसके 9 में मंडल में देवता सोम का उल्लेख है।

इसकी आंखें में हस्तलिखित ऋचाओं को खिल कहा जाता है।

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वैष्णव धर्म ग्रंथ[संपादित करें]

धार्मिक पुस्तकों को धर्म ग्रंथ कहते हैं।

मूल[संपादित करें]

अन्य अर्थ[संपादित करें]

संबंधित शब्द[संपादित करें]

हिंदी में[संपादित करें]

  • वैष्णव

अन्य भारतीय भाषाओं में निकटतम शब्द[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]