गणपाठ

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गणपाठ पाणिनि के व्याकरण के चार भागों में से एक है। इसमें २६१ शब्दों का संग्रह है। पाणिन्नीय व्याकरण के तीन अन्य भाग हैं- अष्टाध्यायी, शिवसूत्र तथा धातुपाठ

'गण' का अर्थ है - समूह। जब बहुत से शब्दों को एक ही कार्य करना हो तो उनमें से प्रथम या प्रमुख शब्द को लेकर उसमें 'आदि' जोड़कर काम चला लिया जाता है। जैसे भ्वादि गण (= भू आदि गण)। ऐसा करने से लाघव होता है अन्यथा वर्णन बहुत बड़ा हो जायेगा। कौन से शब्द 'गण' हैं, इसके लिये गणपाठ दिया गया है।

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