फिट्सूत्र

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फिट्सूत्रों संख्या में 87 हैं और चार पादों (अध्यायों) में विभक्त हैं - अन्तोदात्त, आद्युदात्त, द्वितीयोदात्त, पर्यायोदात्त। 'फिट्' का शब्दशः अर्थ है - 'प्रातिपदिक'। इन सूत्रों में शब्दों के स्वर संचार पर विचार है। प्रतिपदिकों के लिए नैसर्गिक क्रम से उपयोजित 'उदात्त', 'अनुदात्त', एवं 'स्वरित' स्वरों की जानकारी प्रदान करने के लिए इन सूत्रों की रचना की गयी है। पाणिनीय व्याकरण सम्प्रदाय में फिट् का अपना महत्व है।

विद्वानों के अनुसार फिट् सूत्रों के प्रवक्ता आचार्य शन्तनु हैं। शन्तनु–प्रणीत होने से ही ये सूत्र 'शान्तनव' नाम से प्रख्यात हैं। शन्तनु आचार्य द्वारा प्रणीत इन सूत्रों को पाणिनीय सम्प्रदाय भी अपने शास्त्र का उपादेय अंग मानता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]