खोज प्रणाली अनुकूलन

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खोज इंजन अनुकूलन (एसईओ) एक वेब खोज इंजन के अवैतनिक परिणामों में किसी वेबसाइट या वेब पेज की ऑनलाइन दृश्यता को प्रभावित करने की प्रक्रिया है - जिसे अक्सर "प्राकृतिक", "कार्बनिक" या "अर्जित" परिणामों के रूप में संदर्भित किया जाता है। सामान्य तौर पर, खोज परिणामों के पृष्ठ पर पहले (या उच्चतर स्थान पर), और अधिक बार कोई वेबसाइट खोज परिणामों की सूची में दिखाई देती है, अधिक आगंतुक इसे खोज इंजन के उपयोगकर्ताओं से प्राप्त करेंगे; फिर इन आगंतुकों को ग्राहकों में परिवर्तित किया जा सकता है इसके लिए वेबमास्टर दिशानिर्देश पढ़ा जा सकता है

SEO विभिन्न प्रकार की खोज को लक्षित कर सकता है, जिसमें छवि खोज, वीडियो खोज, अकादमिक खोज, समाचार खोज और उद्योग-विशिष्ट ऊर्ध्वाधर खोज इंजन शामिल हैं। एसईओ स्थानीय खोज इंजन अनुकूलन से अलग है जिसमें बाद वाले को एक व्यवसाय की ऑनलाइन उपस्थिति के अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है ताकि उपयोगकर्ता द्वारा अपने उत्पादों या सेवाओं के लिए एक स्थानीय खोज में प्रवेश करने पर इसके वेब पेज खोज इंजन द्वारा प्रदर्शित हों।

इसके बजाय पूर्व राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय खोजों पर अधिक केंद्रित है। एक इंटरनेट मार्केटिंग रणनीति के रूप में, एसईओ मानता है कि खोज इंजन कैसे काम करते हैं, कंप्यूटर प्रोग्राम किए गए एल्गोरिदम जो खोज इंजन व्यवहार को निर्देशित करते हैं, लोग क्या खोजते हैं, वास्तविक खोज शब्द या कीवर्ड खोज इंजन में टाइप किए गए हैं, और कौन से खोज इंजन उनके लक्षित दर्शकों द्वारा पसंद किए जाते हैं। किसी वेबसाइट को ऑप्टिमाइज़ करना उसकी सामग्री को संपादित करना, सामग्री जोड़ना, HTML करना और संबद्ध कोडिंग दोनों को विशिष्ट कीवर्ड के लिए इसकी प्रासंगिकता बढ़ाता है और खोज इंजनों की अनुक्रमण गतिविधियों की बाधाओं को दूर करने के लिए हो सकता है। बैकलिंक्स, या इनबाउंड लिंक की संख्या बढ़ाने के लिए एक साइट का प्रचार करना, एक और एसईओ रणनीति है।

मई 2015 तक, मोबाइल खोज ने डेस्कटॉप खोज को पार कर लिया था। 2015 में, यह बताया गया कि Google मोबाइल खोज को भविष्य के उत्पादों में एक प्रमुख विशेषता के रूप में विकसित और बढ़ावा दे रहा है। प्रतिक्रिया में, कई ब्रांड अपनी इंटरनेट मार्केटिंग रणनीतियों के लिए एक अलग दृष्टिकोण अपनाने लगे हैं।

इतिहास[संपादित करें]

1990 के आस पास खोज प्रणाली अनुकूलन जैसे अनुकूलन की आवश्यकता पड़ी। तब इस प्रकार के खोज प्रणाली की शुरुआत हो रही थी। इसे जालस्थल के पृष्ठ के पते को भेजने के बाद वह किसी खोज प्रणाली में दिखता था। लेकिन उसके खोज प्रणाली अनुकूलन के कारण वह अधिक ऊपर दिखता था।

इस खोज प्रणाली अनुकूलन के लिए जालस्थल के कई मालिक अपने अपने जालस्थल को ऊपर दिखाने की कोशिश में अलग अलग तरीका अपनाते थे। यह तरीका मुख्यतः दो तरह के होते थे। एक सफ़ेद टोपी और दूसरे को काली टोपी के नाम से जाना जाता था। इसमें सफेत टोपी कानूनी रूप से सही अनुकूलन होता था। जबकि काली टोपी अनुकूलन कुछ समय के लिए अच्छी तरह से ऊपर पहुँचा देता था। लेकिन उस कंपनी को इस बारे में पता लगने पर वह तरीका फिर काम नहीं करता था। इसे कुछ लोग एक व्यापार के रूप में लेने लगे और इसके लिए कंपनी भी खोल लिए।[1]

1997 तक, खोज इंजन डिजाइनरों ने यह मान लिया किया कि वेबमास्टर्स अपने खोज इंजन में अच्छी श्रेणी करने के प्रयास कर रहे थे, और यह कि कुछ खोज प्रणाली विशेषज्ञ भी अत्यधिक या अप्रासंगिक खोजशब्दों वाले पृष्ठों को भरकर खोज परिणामों में अपनी [2]रैंकिंग में हेरफेर कर रहे थे। प्रारंभिक खोज इंजन, ने अपने कलन विधि को वेबमास्टर्स को श्रेणी में हेर बनाने से रोकने के प्रयास में समायोजित किया

1998[संपादित करें]

1998 में दो छात्रो ने बेकरब नामक एक खोज प्रणाली बनाई जो पृष्ठ के पायदान के अनुरूप कार्य करती थी। [1] बाद में 1998 में ही वे गूगल नामक कंपनी बनाई जो खोज प्रणाली जैसी सेवा देती है। शुरू में यह केवल कुछ ही जालस्थल के पते को रखती थी। लेकिन जब यह लोगों तक पहुंची तो बहुत से लोग इसमें अपने जालस्थल को आगे करने हेतु कई प्रकार के तरीके बनाएँ। इसमें अनेक स्थानों पर कड़ी जोड़ना या किसी अनुप्रयोग के द्वारा स्वतः ही कड़ी बनाना आदि था। पहले पहले यह क्रिया कार्य करने लगी लेकिन बाद में इसमें बदलाव के बाद यह क्रिया करने पर जो स्थान रहता था। वह भी और नीचे चले जाता था।ए।[3]

प्रक्रिया[संपादित करें]

कड़ी भेजना[संपादित करें]

सर्वप्रथम किसी भी नई जालस्थल को और उससे जुड़े पृष्ठों, जिसे आप इस खोज परिणाम में दिखाना चाहते हैं। उन्हें भेजते हैं। इस प्रक्रिया में कुछ घण्टों से लेकर कुछ दिनों का समय लग जाता है। कई नए पते में यह समय एक सप्ताह का लगता है। जिसके बाद यह प्रक्रिया धीरे धीरे तेज होने लगती है। यदि आपका अनुकूलन सही तरीके से हुआ है, तो आपके द्वारा कोई पृष्ठ बनाते साथ ही खोज प्रणाली का कोई बॉट आकार उसे देख कर अपने जानकारी में सहेज लेगा। इसके बाद कोई भी उस समय उस पाठ्य को खोज कर जानकारी प्राप्त कर सकता है।

अनावश्यक पृष्ठों का बचाव[संपादित करें]

कई ऐसे पृष्ठ होते हैं, जिसमें खाता बनाने, या कोई अन्य जानकारी होती है, जिसे आप खोज में नहीं दिखाना चाहते हैं। कई बार कोई तात्कालिक रूप से बने पृष्ठ भी खोज परिणाम में दिखने लगते हैं। जिससे आपके जालस्थल को कोई भी खोज प्रणाली एक स्पैम समझेगा। इससे परिणाम का स्थान नीचे हो जाएगा। इस कारण कुछ समय के लिए दिखने वाले पृष्ठों को खोज प्रणाली द्वारा परखने आदि से बचाना चाहिए।

सही अनुकूलन[संपादित करें]

मूल रूप से सही अनुकूलन केवल उसे ही कहा जाता है, जब आप जालस्थल को केवल प्रयोक्ता के दृष्टिकोण से बनाएँ। जिसमें किसी भी प्रकार का कोई विज्ञापन या कोई बाहरी कड़ियाँ न हो। यह किसी के द्वारा पढ़ने के लिए उपयुक्त हो।

ऑन पेज SEO[संपादित करें]

ऑन पेज SEO में वह सभी चीजें शामिल हैं जो आपकी वेबसाइट पर प्रभाव डालती हैं. जैसे की सभी टेक्निकल पहलु जो आपकी वेबसाइट को सर्च इंजन की रैंकिंग पर प्रभाव (Influence) डालती हैं. जिसमे शामिल है, आपकी वेबसाइट की संरचना (Structure), साईट की लोडिंग स्पीड और वेबसाइट पर पड़ी हुई सामग्री (Content) जो रैंकिंग में अहम भूमिका निभाते हैं| [4] [5]

ऑफ़ पेज SEO[संपादित करें]

SEO का अगला पहलु है ऑफ़ पेज SEO, जो SEO की दुनिया में थोडा मुस्किल कहा जाता है. ऑफ़ पेज SEO के बारे में सीधे शब्दों में कहें तो ये आपकी वेबसाइट के लिंक है जो दूसरी हाई अथॉरिटी वेबसाइट पर रिफरेन्स की तरह पड़ी हैं. जितनी Quality वाली वेबसाइट पर आपके लिंक होंगे उतनी ही अच्छी आपकी वेबसाइट की सर्च इंजन पर रैंकिंग होगी.

वहीँ जो अगला ऑफ़ पेज SEO का फैक्टर है, वो है Niche या फिर कम्पटीशन जो दूसरी वेबसाइट पर पड़े कंटेंट से है. तो इसका मतलब है जितना कम कम्पटीशन वाला आपका niche होगा उतना ही अच्छा अवसर होगा अच्छी रैंक पाने का। [6]

SEO कैसे करे[संपादित करें]

आज के समय में SEO करना थोड़ा मुश्किल हो गया है इसके लिए आपको ऑन पेज SEO, ऑफ पेज SEO और technical SEO के बारे में विस्तार में पढ़ना चाहिए। [7]


Doston SEO ke prakar ke bare mai aapko alg- lag post mai detail mai janakari dunga lekin abhi mai aapko inke bare mai thoda overview de deta hun.

On page -SEO[संपादित करें]

Doston jb hmm apne blog ya website mai kuch aise words ka istemal krte hain jinhe log search engine mai search kr rhe hain to es process ko hm on page-SEO khte hain. Doston On page-SEO mai hme apne blog ya website ke title,meta description,permalink or image ke alt tag in sabhi mai kuch necessary change krne hote hain sath hi apne blog ya website ke content mai bhi un words ka istemal krna hota hai jo log search kr rhe hain or iske alwa apne content ko high quality ka bhi rkhna bahut jaruri hota hai sath hi sath apne bog ya website ki loading speed ka bhi khas Dhyan rkhna hota hai.

Off page -SEO[संपादित करें]

Doston jb hm apne blog ya website ke link ko outside yani search engine submission,Directory submission or iske sath- sath social media sites pr share krte hain or hme wahan se ek referral link mil jata hai to ese hmm off page -SEO khte hain. Iske sath hi doston off page seo mai backlink or guest posting bhi bahut imp part hota hai.


pura article pdne ke liye click kare - http://deepakbhandari.in/seo-kya-hai-blog-k-liye-kyo-jaruri-hai/


सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

Search Engine Optimization की पूरी जानकारी

गूगल वेबमास्टर दिशानिर्देश