कृष्णिका विकिरण

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जैसे-जैसे ताप कम होता जाता है, कृष्णिका विकिरण वक्र का शिखर कम तीव्रता एवं अधिक तरंगदैर्घ्य की तरफ चलता जाता है।

यदि कोई वस्तु अपने पर्यावरण के साथ ऊष्मागतिक साम्य में हो तो उस वस्तु के अन्दर या उसके आसपास से निकलने वाले विद्युतचुम्बकीय विकिरण को कृष्णिका विकिरण (Black-body radiation) कहते हैं। किसी नियत एवं एकसमान ताप वाली कृष्णिका द्वारा उत्सर्जित विद्युतचुम्बकीय विकिरण 'कृष्णिका विकिरण' कहलाता है।इस सिद्धांत को प्लांक ने दिया था|कृष्णिका विकिरण का एक विशिष्ट स्पेक्ट्रम तथा तीव्रता होती है जो केवल उस वस्तु के तापमान पर निर्भर होता है।[1]

प्लांक का नियम[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Loudon 2000, Chapter 1.

इन्हें भी देखें[संपादित करें]