कुंदनकारी

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कुन्दन के आभूषण बनाने की कला को कुन्दनकारी कहते हैं। यह मुख्यतः मुगल काल में, उनके शासकों के संरक्षण में सर्वप्रथम राजस्थान में विकसित हुई। जयपुर नगर कुन्दन के आभूषणों के लिए प्रसिद्ध है।

'कुन्दन' शब्द का अर्थ है- अत्यन्त परिशुद्ध सोना। इसमें अत्यन्त परिष्कृत पिघला हुआ सोना उपयोग में लाया जाता है। कुन्दन को 'बीकानेरी आभूषण' या 'जयपुरी आभूषण' भी कहते हैं। इसके पिछले भाग में विविध रंगों और डिजाइनों की इनेमल किया जाता है जबकि सामने के भाग पर कुन्दन लगे होते हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

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