काशीपुर, उत्तराखण्ड

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काशीपुर
—  नगर  —
View of काशीपुर, भारत
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तराखण्ड
महापौर उषा चौधरी (निर्दलीय)
जनसंख्या
घनत्व
1,21,623 (२०११ तक )
२२,२७५.२ प्रति वर्ग मीटर
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
५.४ वर्ग किमी कि.मी²
२१८ मीटर
आधिकारिक जालस्थल: kashipur.in

निर्देशांक: 29°13′N 78°57′E / 29.22°N 78.95°E / 29.22; 78.95

काशीपुर (जिसे पुरातन काल से गोविषाण या उज्जयनी नगरी भी कहा जाता रहा है) भारत के उत्तराखण्ड राज्य के उधम सिंह नगर जनपद का एक महत्वपूर्ण पौराणिक एवं औद्योगिक शहर है। उधम सिंह नगर जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित काशीपुर जनसंख्या के मामले में कुमाऊँ का तीसरा और उत्तराखण्ड का छठा सबसे बड़ा नगर है। भारत की २०११ की जनगणना के अनुसार काशीपुर नगर की जनसंख्या १,२१,६२३, जबकि काशीपुर तहसील की जनसंख्या २,८३,१३६ है।

इस जगह का नाम काशीपुर, चन्द राजा देवी चन्द के एक पदाधिकारी काशीनाथ अधिकारी के नाम पर पड़ा। जिन्होंने इसे १६-१७ वीं शताब्दी में बसाया था। १८ शताब्दी तक कुमाऊँ राज्य में रहा, जिसके बाद यह नन्द राम द्वारा स्थापित काशीपुर राज्य की राजधानी बन गया। १८०१ में यह नगर ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आया, जिसके बाद इसने १८१४ के आंग्ल-गोरखा युद्ध में कुमाऊँ पर अंग्रेजों के कब्जे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

काशीपुर को बाद में कुमाऊँ मण्डल के तराई जिले का मुख्यालय बना दिया गया। १८७२ में काशीपुर नगरपालिका की स्थापना हुई, और २०११ में इसे उच्चीकृत कर नगर निगम का दर्जा दिया गया। यह नगर अपने चैती मेले के लिए प्रसिद्ध है। काशीपुर चन्द राजाओं का निवास स्थल रहा है। कुमाऊँ के प्रसिद्ध कवि गुमानी की जन्मस्थली भी काशीपुर ही है।

नामकरण[संपादित करें]

पूर्व काल में इस नगर का नाम उज्जैनी तथा यहां से बहने वाली ढेला नदी का नाम सुवर्णभद्रा था। हर्ष काल में इसे गोविषाण कहा जाने लगा। बाद में काशीनाथ अधिकारी ने तराई क्षेत्र के अधिकारी का महल रुद्रपुर से यहां स्थानांतरित किया, जिसके बाद उनके नाम पर इसे काशीपुर कहा जाने लगा। गोविषाण शब्द, दो शब्दो गो (गाय) और विषाण (सींग) से बना है। इसका अर्थ गाय का सींग है। प्राचीन समय में गोविषाण को तत्कालीन समय की राजधानी व समृद्ध नगर कहा गया है।[1]

इतिहास[संपादित करें]

काशीपुर को हर्ष के समय (६०६-६४१ ईसवी) में गोविषाण नाम से जाना जाता था। लगभग इसी समय में यहाँ चीनी यात्री ह्वेनसांग भी आया था।[2]:174 उस समय के कई खंडहर अभी भी शहर के पास विद्यमान हैं।[3] माना जाता है कि काशीपुर कपड़े और धातु के बर्तनों का ऐतिहासिक व्यापार केंद्र था।

गोविषाण[संपादित करें]

प्राचीन नगर गोविषाण के अवशेष

ह्वेनसांग के अनुसार मादीपुर से ६६ मील की दूरी पर गोविषाण नामक स्थान था जिसकी ऊँची भूमि पर ढाई मील का एक गोलाकार स्थान था। यहां उद्यान, सरोवर एवं मछली कुंड थे। इनके बीच ही दो मठ थे, जिनमें सौ बौद्ध धर्मानुयायी रहते थे। यहाँ ३० से अधिक हिन्दू धर्म के मंदिर थे। नगर के बाहर एक बड़े मठ में २०० फुट ऊँचा अशोक का स्तूप था।[4] इसके अलावा दो छोटे-छोटे स्तूप थे, जिनमें भगवान बुद्ध के नख एवं बाल रखे गए थे। इन मठों में भगवान बुद्ध ने लोगों को धर्म उपदेश दिए थे।

कान्ति प्रसाद नौटियाल ने अपनी पुस्तक, "आर्केलॉजी ऑफ़ कुमाऊँ" में गोविषाण का वर्णन करते हुए लिखा है कि "कुमाऊँ क्षेत्र में ढिकुली, जोशीमठ तथा बाराहाट के साथ-साथ गोविषाण भी कुनिन्दा राज्य के प्रमुख नगरों में से एक रहा होगा।"[5]:२३ कुछ वर्षों बाद इस क्षेत्र पर कुषाणों द्वारा आक्रमण का भी उल्लेख है; कुषाण कुनिन्दा राज्य में प्रवेश कर गोविषाण तक घुस आये थे, परन्तु उन्होंने कभी इस क्षेत्र को कब्ज़े में नहीं लिया।[5]:२३ कुनिन्दा काल में गोविषाण एक बार यादव राजवंश (yaudheyas) के अंतर्गत भी रहा।[5]:३७ इसके बाद राजा हर्ष ने गोविषाण को अपना सामन्ती राज्य बना लिया।[5]:४२ प्रतिहार राजवंश से सम्बंधित इसी समय की एक "विष्णु त्रिविक्रम की मूर्ती" भी काशीपुर में खुदाई में प्राप्त हुई है, जो अभी नयी दिल्ली के एक संग्रहालय में स्थित है। आठवीं शताब्दी आते आते यह नगर कत्यूरी राजवंश के अधीन आ गया, जिनकी राजधानी कार्तिकेयपुरा में थी।[5]:४६

काशीपुर में खुदाई में मिली विष्णु त्रिविक्रम की मूर्ती

१८६८ में भारत के तत्कालीन पुरातत्व सर्वेक्षक सर अलेक्जेंडर कनिंघम ने इन वस्तुओं की खोज हेतु इस स्थान का दौरा किया किन्तु इन मठों में उन्हें ये वस्तुएँ, खासकर भगवान बुद्ध के नख एवं बाल नहीं मिले। कनिंघम ने यहां की सर्वाधिक ऊंचाई वाले टीले पर स्थित भीमगोड़ा स्थल पर एक पुरातात्विक निर्माण की खोज भी की। कनिंघम ने अपनी रिपोर्ट में गोविषाण को किसी प्राचीन राज्य की राजधानी बताया था, जिसकी सीमाओं का विस्तार वर्तमान उधमसिंहनगर, रामपुर तथा पीलीभीत जनपदों तक था।[6]:३३०-३३१ जहां तत्कालीन मुख्य पुरातत्व सर्वेक्षक डॉ. वाई.डी. शर्मा के नेतृत्व में सीमित खुदाई का कार्य इस टीले के अंदर के भवनों की आकृति जानने के उद्देश्य से आरम्भ किया गया। १९६६ में सीमित खुदाई करके यह कहा गया कि पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के कारण इसका संरक्षण आवश्यक है।

इसमें ५९६ ईसवीं की किलेनुमा दीवारें मिली थीं। इन पर आकर्षक रूप से उकेरी गई ईंटों से बनी दीवारों की शिल्पकला के नमूने मिले। इसके अलावा ताँबे के सिक्के और बर्तन समेत ताँबे पर नक्काशी करने वाली कखानी भी यहाँ मिली। इसके साथ ही चॉकलेटी रंग का दो छिद्रों वाला सुरक्षा ताबीज यहाँ मिला। इसके अलावा भूरे-लाल रंग लिए मिट्टी के बने हुए दीये और अलग-अलग आकृति के अगरबत्ती रखने के खाँचे और तीरों की नोंक, लोहे की छड़ें और चाकू भी इसकी खुदाई से प्राप्त हुआ।[4]

१९६९ में एक बार पुनः यहाँ खुदाई हुई जिसमें १४० फुट लंबे एवं ८२ फुट चौड़े और साढ़े उन्नीस फुट ऊँचे विशाल चैत्य के अवशेष मिले। एक प्रदक्षिणा पथ भी मिला, जिसका काफी भाग मंदिर की मुख्य दीवार के निर्माण से मेल खाता था। मिट्टी से बने पतले पहिए के आकार के बर्तन को एक क्रम से पाया गया। इस बार एक विशेष बात यह थी कि कि जो चीजें यहाँ मिलीं, वह अन्य स्थानों की खुदाई में कहीं नहीं मिली। गोविषाण की खुदाई में शुंग और कुषाण काल (२०० - १३० ई०पू०) तक (राजपुर काल) के मनके, मृदभांड, सिक्के मिले हैं। इसके अलावा अनाज रखने के बर्तन एवं गेहूँ के दाने भी प्राप्त हुए हैं। जो इसी काल के समझे जाते हैं। इस साल की पूरी खुदाई में कत्यूर काल से पहले२९०० ईसा पूर्व तक जानकारी मिली।[4]

चन्द शासन[संपादित करें]

तेरहवीं शताब्दी में कुमाऊँ के शासक गरुड़ ज्ञान चन्द (१३७४-१४१९) ने भाभर तथा तराई क्षेत्रों पर अधिकार दिल्ली के सुल्तान से प्राप्त किया। हालांकि बाद के राजाओं ने इन क्षेत्रों पर कभी ध्यान नहीं दिया, जिस कारण यहां छोटे छोटे सरदारों ने राज्य स्थापित कर दिए। कीर्ति चन्द (१४८८-१५०३) पहले ऐसे राजा हुए, जिन्होंने तराई क्षेत्रों की ओर परस्पर ध्यान दिया। रुद्र चन्द (१५६८-१५९७) के शासनकाल में काठ तथा गोला के नवाब ने तराई क्षेत्रों पर कब्ज़ा करने की कोशिश की, परन्तु रुद्र चन्द ने उनके आक्रमण को निष्फल कर दिया। इसके बाद तराई क्षेत्रों को परगना का दर्जा देकर यहां एक अधिकारी की नियुक्ति की गई, और उसके निवास के लिए रुद्र चन्द ने रुद्रपुर नगर की स्थापना करी।

रुद्र चन्द के बाद बाज बहादुर चन्द (१६३८-१६७८) ने भी तराई क्षेत्रों के प्रशासन की ओर विशेष ध्यान दिया। बाज़ बहादुर चन्द ने रुद्रपुर के पश्चिम में बाजपुर नगर की स्थापना कर तराई के मुख्यालय वहां स्थानांतरित करने का एक विफल प्रयास करा। देवी चन्द (१७२०-१७२६) के शासनकाल में तराई के लाट काशीनाथ अधिकारी ने अपने निवास के लिए काशीपुर में महल का निर्माण करवाया, तथा तराई का मुख्यालय रुद्रपुर से यहां स्थानांतरित कर दिया।

वर्तमान काशीपुर नगर की स्थापना काशीनाथ अधिकारी ने की थी, जो चम्पावत के राजा देवी चन्द के अंतर्गत तराई क्षेत्र के लाट (अधिकारी) थे। लेकिन शहर की स्थापना की सही तारीख विवादित है, और कई इतिहासकारों ने इस मामले पर भिन्न-भिन्न विचार व्यक्त किए हैं। बिशप हेबेर ने अपनी पुस्तक, "ट्रेवल्स इन इंडिया" में लिखा है कि काशीपुर की स्थापना ५००० साल पहले (लगभग ३१७६ ईसा पूर्व) काशी नामक देवता ने की थी।[7] सर अलेक्जेंडर कनिंघम ने अपनी पुस्तक, "द अन्सिएंट जियोग्राफी ऑफ़ इंडिया" में हेबेर के विचारों को अमान्य करते हुए लिखा "बिशप को अपने मुखबिर से धोखेबाज़ी मिली, क्योंकि यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि यह नगर आधुनिक है। इसे कुमाऊँ में चंपावत के राजा देवी-चन्द्र के अनुयायी काशीनाथ द्वारा १७१८ ई में बनाया गया है"।[8]:357–358 बद्री दत्त पाण्डेय ने अपनी पुस्तक "कुमाऊँ का इतिहास" में, कनिंघम के विचारों का विरोध करते हुए दावा किया है कि शहर १६३९ में ही स्थापित हो चुका था।[9]

काशीपुर राज्य[संपादित करें]

१८१४ आंग्ल-गोरखा युद्ध के समय काशीपुर में पड़ाव डाले सैनिक।

काशीपुर में अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध तक चन्द राजवंश का शासन रहा। १७७७ में काशीपुर के अधिकारी, नंद राम ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया और काशीपुर राज्य की स्थापना की। काशीपुर को १८०१ में शिव् लाल ने अंग्रेजों को सौंप दिया था, जिसके बाद यह ब्रिटिश भारत में एक राजस्व विभाजन बन गया।[9]:445 इसी समय में काशीपुर राज्य के राजकवि गुमानी पन्त ने इस नगर की विशेषताओं पर एक कविता भी लिखी थी, जिसमें उन्होंने नगर में बहती ढेला नदी, और मोटेश्वर महादेव मन्दिर का वर्णन किया है।[10]

ब्रिटिश शासन[संपादित करें]

१८०१ में काशीपुर ब्रिटिश राज के अंतर्गत आया था। १८१४ में आंग्ल गोरखा युद्ध छिड़ने पर ब्रिटिश सेना ने काशीपुर में पड़ाव डाला था। ११ फरवरी १८१५ को कर्नल गार्डनर के नेतृत्व में सैनिक काशीपुर से कटारमल के लिए रवाना हुए। इस टुकड़ी ने निकोलस के नेतृत्व में २५ अप्रैल २०१५ को अल्मोड़ा पर आक्रमण किया, और आसानी से कब्ज़ा कर लिया। २७ अप्रैल को अल्मोड़ा के गोरखा अधिकारी, बाम शाह ने हथियार डाल दिए, और कुमाऊँ पर ब्रिटिश राज स्थापित हो गया।[11]:१४८-१५५

१० जुलाई १८३७ को काशीपुर को मुरादाबाद जनपद में शामिल किया गया और फिर १९४४ में बाजपुर, काशीपुर तथा जसपुर नगरों को काशीपुर नामक एक परगना में पुनर्गठित किया गया।[12] काशीपुर को बाद में संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध के तराई जनपद का मुख्यालय बनाया गया।[12] १८९१ में नैनीताल तहसील को कुमाऊँ जनपद से स्थानांतरित कर तराई के साथ मिला दिया गया, और फिर इसके मुख्यालय को काशीपुर से नैनीताल में लाया गया था। १८९१ में ही कुमाऊँ और तराई जनपदों का नाम उनके मुख्यालयों के नाम पर क्रमशः अल्मोड़ा तथा नैनीताल रख दिया गया, काशीपुर नैनीताल जनपद में एक तहसील तथा परगना भर रह गया।

२० सदी के प्रारम्भ में ही काशीपुर नगर रेल नेटवर्क से जुड़ गया था। ११ जनवरी १९०८ को लालकुआँ - रामनगर/मुरादाबाद रेलवे लाइन का उद्घाटन हुआ।[13]:१३ यह रेलवे लाइन बरेली-काठगोदाम लाइन पर स्थित लालकुआँ से शुरू होती थी, और गुलारभोज, बाजपुर तथा सरकारा से होते हुए काशीपुर पहुँचती थी। काशीपुर से यह उत्तर की ओर रामनगर, तथा दक्षिण की ओर मुरादाबाद तक जाती थी।[13]:१३ रेल निर्माण के बाद नगर के विकास में तेजी आयी, और काशीपुर तथा रामनगर प्रमुख व्यापारिक केंद्र बनकर उभरे।[13]:२७ १९४७ में स्वतंत्रता के बाद काशीपुर और नैनीताल जनपद के अन्य हिस्से संयुक्त प्रांत में ही मिले रहे, जिसका नाम बाद में उत्तर प्रदेश राज्य हो गया था।

१९९४ तक उत्तराखण्ड क्षेत्र के लिए पृथक राज्य की मांग पूरे क्षेत्र में स्थानीय आबादी और राजनीतिक दलों, दोनों के बीच लगभग सर्वसम्मति से स्वीकार हो चुकी थी।[14] ३० सितंबर १९९५ को नैनीताल जनपद के तराई क्षेत्र की चार तहसीलों (किच्छा, काशीपुर, सितारगंज तथा खटीमा) को मिलाकर उधम सिंह नगर जनपद का गठन किया गया परन्तु इसका मुख्यालय काशीपुर की बजाय रुद्रपुर में बनाया गया।[15] ९ नवंबर २००० को भारत की संसद ने उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, २००० को पारित किया, और काशीपुर नवनिर्मित उत्तराखण्ड राज्य का भाग बन गया, जो भारत गणराज्य का २७वां राज्य था।[16]

भूगोल[संपादित करें]

नई दिल्ली के १८० किमी उत्तर-पूर्व में स्थित काशीपुर उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र के दक्षिण पश्चिमी भाग में रामगंगा तथा कोसी नदियों के अपवाह क्षेत्र के मध्य तराई में स्थित है। नगर के उत्तर में रामनगर का भाभर क्षेत्र पड़ता है, जो इसे शिवालिक पहाड़ियों से अलग करता है, तथा दक्षिण में गांगेय मैदान हैं। ढेला नदी, जो रामगंगा की सहायक नदी है, काशीपुर से होकर बहती है।[17][18] काशीपुर नगर काशीपुर तहसील का मुख्यालय भी है, जिसके पूर्व में बाजपुर तहसील, पश्चिम में जसपुर तहसील, उत्तर में नैनीताल जनपद की रामनगर तहसील, तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश राज्य का मुरादाबाद जिला है।

काशीपुर नगर का क्षेत्रफल ८.५४६ वर्ग किलोमीटर है।[19] ५ मार्च १८७२ को जब नगर पालिका परिषद काशीपुर की स्थापना हुई थी, तब इसका क्षेत्रफल १.५० वर्ग किलोमीटर था।[20] १९६६ में नगरपालिका की सीमा में विस्तार होने के उपरान्त नगर का क्षेत्रफल २.२५ वर्ग किमी हो गया था, और इसके बाद १३ मार्च १९७६ को नगरपालिका काशीपुर सीमा का विस्तार कर इसका क्षेत्रफल ५.४५६ वर्ग किमी निर्धारित किया गया।[20]

काशीपुर नगर के ऊपर बादलों का एक दृश्य

भौगोलिक रूप से काशीपुर कुमाऊँ के तराई क्षेत्र में स्थित है, जो पश्चिम में जसपुर तक तथा पूर्व में रुद्रपुर, किच्छा होते हुए खटीमा तक फैला है।[21] तराई क्षेत्रों की मिट्टियों में चिकनी मिट्टी, छोटे से लेकर मध्यम कणों वाली रेतीली मिट्टी, और कभी-कभार बजरी भी शामिल होती है।[21] हालांकि स्वरूप में रेत पर चिकनी मिट्टी की प्रभुत्व रहता है। ये मिट्टियाँ यहां बहती नदियां अपने साथ भूमि के अंदर से निकालकर लाती हैं, और इस कारण इस क्षेत्र की मिटटी दलदली तथा उपजाऊ है।[21]

ब्रिटिश काल से पहले तराई क्षेत्रों को मानव निवास के लिए अनुपयुक्त माना जाता था क्योंकि निरंतर बरसात यहां कई छिद्रों, तालाबों और दलदलों को जन्म देती थी, जो मच्छरों के लिए उपयुक्त प्रजनन स्थल बनते हुए मलेरिया का कारण बनते थे।[22] भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार, यह शहर भूकंपीय क्षेत्र ४ के अंतर्गत आता है।[23][24]:27

काशीपुर की जलवायु नगर के दक्षिण में स्थित गांगेय मैदानों की तरह ही आर्द्र अर्ध-कटिबन्धीय है, तथा गर्मियों (जून) में औसत अधिकतम तापमान ३१.६ डिग्री सेल्सियस (८८.९ डिग्री फारेनहाइट) के आसपास होता है; जबकि सर्दियों (जनवरी) में यह लगभग १४.५ डिग्री सेल्सियस (५८.१ डिग्री फारेनहाइट) तक गिर जाता है।[25] ५ मिमी वर्षा के साथ सबसे शुष्क माह नवंबर है। ३७४ मिमी के औसत के साथ, जुलाई में सबसे अधिक वर्षा होती है। सबसे शुष्क और सबसे नम महीनों के बीच वर्षा का अंतर ३६९ मिमी रहता है। वर्ष भर में औसत तापमान १७.१ डिग्री सेल्सियस तक की भिन्नता प्रदर्शित करता है। मुख्य रूप से नगर में तीन ऋतुएं होती हैं; मार्च से जून तक ग्रीष्म ऋतु, जुलाई से नवंबर तक मानसून; और दिसंबर से फरवरी तक शीत ऋतु।[24]

काशीपुर का वातावरण की विशेषता अपेक्षाकृत पूरे वर्ष में निरंतर उच्च तापमान और समान रूप से वितरित वर्षा है। गर्मियों में, काशीपुर काफी हद तक महासागर के पानी पर उपोष्णकटिबंधीय एंटीसाइक्लोनिक कोशिकाओं जनित नम समुद्री वायु प्रवाह के प्रभाव में रहता है। इस समय तापमान बहुत अधिक रहता है और यह गर्म, दमनकारी रातों का कारण बन जाता है।[24] ग्रीष्म ऋतु आमतौर पर सर्दियों की तुलना में कुछ हद तक नम होती है, जिसमें अधिकांश वर्षा संवहनी तूफान गतिविधि के कारण होती है; हालांकि उष्णकटिबंधीय चक्रवात भी इन क्षेत्रों में गर्म मौसम की वर्षा भी बढ़ाते हैं।[24] सबसे ठंडा महीना आमतौर पर हल्का होता है, हालांकि ठंड असामान्य नहीं होती है, और सर्दियों की वर्षा मुख्य रूप से ध्रुवीय में आने वाले चक्रवातों के कारण होती है।[24] कोपेन जलवायु वर्गीकरण के अनुसार इसका कोड "cwa" है।[26]

काशीपुर के लिए मौसम जानकारी
महीना जनवरी फ़रवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितम्बर अक्तूबर नवम्बर दिसम्बर वर्ष
औसत अधिकतम °C (°F) 20.8
(69.4)
23.9
(75)
29.5
(85.1)
35.7
(96.3)
39
(102)
37.6
(99.7)
32.7
(90.9)
31.8
(89.2)
32.1
(89.8)
31
(88)
26.8
(80.2)
22.3
(72.1)
30.27
(86.48)
दैनिक माध्य °C (°F) 14.5
(58.1)
16.9
(62.4)
22
(72)
27.5
(81.5)
31.4
(88.5)
31.6
(88.9)
28.8
(83.8)
28.2
(82.8)
27.9
(82.2)
24.7
(76.5)
19.4
(66.9)
15.4
(59.7)
24.03
(75.25)
औसत न्यूनतम °C (°F) 8.2
(46.8)
9.9
(49.8)
14.6
(58.3)
19.4
(66.9)
23.8
(74.8)
25.7
(78.3)
25
(77)
24.6
(76.3)
23.7
(74.7)
18.4
(65.1)
12
(54)
8.6
(47.5)
17.83
(64.09)
वर्षापात mm (inches) 43
(1.69)
28
(1.1)
23
(0.91)
6
(0.24)
16
(0.63)
108
(4.25)
374
(14.72)
368
(14.49)
212
(8.35)
89
(3.5)
5
(0.2)
9
(0.35)
1,281
(50.43)
स्रोत: Climate-Data.org[25]

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

काशीपुर में जनसंख्या[27]
वर्ष जन.
1871 13,113
1881 14,667 11.9%
1891 14,717 0.3%
1901 12,023 −18.3%
1911 12,773 6.2%
1921 10,576 −17.2%
1931 11,276 6.6%
1941 13,223 17.3%
1951 16,597 25.5%
1961 24,258 46.2%
1971 33,457 37.9%
1981 51,773 54.7%
1991 69,870 35.0%
2001 92,967 33.1%
2011 1,21,623 30.8%

२०११ की जनगणना के अनुसार काशीपुर नगर की कुल जनसंख्या १,२१,६२३ है, जिसमें से पुरुषों की संख्या ६३,६२५ तथा महिलाओं की संख्या ५७,९८५ है।[28] २००१ के बाद से इसमें २८,६५६ या ३०% की वृद्धि हुई है।[29][30][31] उत्तराखण्ड राज्य में ४९० लोग प्रति वर्ग मील के मुकाबले काशीपुर में जनसंख्या घनत्व ५७,६९३ लोग प्रति वर्ग मील है। १८८१ में काशीपुर की जनसंख्या लगभग १४,००० थी,[32]:82 जो १९८१ तक ५०,००० को पार कर चुकी थी। इस जनसंख्या वृद्धि की मूल वजह पहाड़ी क्षेत्रों से लोगों का लगातार निचले क्षेत्रों की और प्रवास मन जाता है.

० से ६ साल तक की उम्र के बच्चों की संख्या १४,८३५ है, जो नगर की कुल जनसंख्या का १२.२०% है।[27]:369 काशीपुर में लिंगानुपात ९१२ महिआएं प्रति १००० पुरुष है।[27]:369 इसके अतिरिक्त नगर की साक्षरता दर ८२.४५% है, जो की राज्य की साक्षरता दर (७८.८२%) से अधिक है।[27]:369 पुरुषों में साक्षरता दर ८६.८८% जबकि महिलाओं में साक्षरता दर ७७.६३% है।[27]:369 नगर में कुल ६,०९६ झुग्गियां हैं, जिनमें ३३,५५० लोग रहते हैं, और ये नगर की कुल जनसंख्या का २७.५९% हैं।[33]

काशीपुर के धार्मिक आंकड़े (२०११)[33]
धर्म
हिन्दू धर्म
  
62.37%
इस्लाम
  
35.06%
सिख धर्म
  
1.87%
अन्य
  
1.00%

हिन्दू धर्म तथा इस्लाम नगर के मुख्य धर्म हैं। नगर की कुल जनसंख्या में से ६२.३७ प्रतिशत लोग हिन्दू धर्म का जबकि ३५.०६ प्रतिशत लोग इस्लाम का अनुसरण करते हैं। इसके अत्रिरक्त नगर में अल्पसंख्या में सिख, ईसाई तथा जैन भी रहते हैं। काशीपुर में १.८७ प्रतिशत लोग सिख धर्म का, ०.३४ प्रतिशत लोग ईसाई धर्म का, ०.११ प्रतिशत लोग जैन धर्म का तथा ०.०१ प्रतिशत लोग बौद्ध धर्म का अनुसरण करते हैं। इसके अतिरिक्त नगर की कुल जनसंख्या में से ०.२५ प्रतिशत लोग या तो आस्तिक हैं, या किसी भी धर्म से ताल्लुक नहीं रखते। हिन्दी तथा कुमाऊँनी नगर में बोली जाने वाली मुख्य भाषायें हैं।

काशीपुर तहसील की जनसंख्या २,८३,१३६ है।[34] काशीपुर के अलावा तहसील में ७३ गांव तथा २ अन्य नगर हैं।[35]

प्रशासन तथा राजनीति[संपादित करें]

नगर का प्रशासन काशीपुर नगर निगम के अधीन है।[36] यह काशीपुर नगर पालिका परिषद के उन्नयन द्वारा २०१३ में बनाई गई थी, जिसका गठन १८७२ में हुआ था।[37] काशीपुर नगर निगम को २० वार्डों में विभाजित किया गया है,[38] हालांकि नगर निगम २० नए वार्ड बनाने की कार्यवाही में जुटा है, जिससे वार्डों की कुल संख्या ४० हो जाएगी।[39] महापौर की सीट अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित महिला के लिए आरक्षित है।[40] २०१३ में हुए काशीपुर नगर निगम के चुनाव में निर्दलीय राजनीतिज्ञ उषा चौधरी को महापौर चुना गया। चौधरी ने कांग्रेस की रूक्साना अंसारी को ७४१८ वोटों से हराया।[41]

नगर पालिका परिषद काशीपुर की स्थापना ५ मार्च १८७२ को संयुक्त प्रान्त के शासनादेश संख्या ३३४-ए द्वारा हुई थी। तब यह चतुर्थ श्रेणी की नगरपालिका थी, तथा इसका क्षेत्रफल १.५० वर्ग किलोमीटर था। इसके बाद स्वतंत्र भारत मे २३ मई १९५७ को इसे चतुर्थ से तृतीय श्रेणी, तथा १ दिसंबर १९६६ को तृतीय से द्वितीय श्रेणी की नगरपालिका का दर्जा दिया गया। १३ मार्च १९७६ को नगरपालिका काशीपुर सीमा का विस्तार कर इसका क्षेत्रफल ५.४५६ वर्ग किमी निर्धारित किया गया। अगले ही साल ६ जनवरी १९७७ को नगरपालिका काशीपुर को प्रथम श्रेणी की नगर पालिका का स्तर प्रदान कर दिया गया।[42]

भारत की लोकसभा में इस नगर का प्रतिनिधित्व नैनीताल-उधमसिंह नगर निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए प्रतिनिधि द्वारा किया जाता है। भाजपा से भगत सिंह कोश्यारी नैनीताल-उधमसिंह नगर से वर्तमान सांसद हैं।[43] उन्होंने २०१४ के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के के.सी. सिंह बाबा के विरुद्ध २.८४ लाख मतों से विजय प्राप्त की, जो इस सीट से मौजूदा सांसद भी थे।[43] कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली नैनीताल-उधम सिंह नगर सीट पर कांग्रेस ने १९५१ से आठ बार जीत दर्ज की है।[44] इसके अतिरिक्त भाजपा ने दो बार, और अन्य राजनीतिक दलों ने तीन बार इस सीट पर जीत हासिल की है।[44] उत्तराखण्ड विधानसभा के लिए नगर से एक विधायक काशीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुना जाता है। भाजपा के हरभजन सिंह चीमा काशीपुर से वर्तमान विधायक हैं।[45] २००१ में राज्य गठन के बाद लगातार ४ बार वह इस क्षेत्र से विधायक रहे हैं।[46][47][48]

अर्थव्यवस्था[संपादित करें]

कृषि काशीपुर में मुख्य आर्थिक गतिविधि है।

कृषि काशीपुर नगर के आसपास के क्षेत्रों में मुख्य आर्थिक गतिविधि है। उपजाऊ भूमि तथा पानी की उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र एक तीव्र फसली क्षेत्र है। चावल और गेहूं के अतिरिक्त गन्ना, आम, अमरूद, जामुन, काफल और लीची यहां के प्रमुख उत्पाद हैं।

ऐतिहासिक रूप से, इस क्षेत्र की अर्थव्यस्था कृषि तथा बहुत छोटे पैमाने पर लघु औद्योगिक गतिविधियों पर आधारित रही है। आजादी से पहले काशीपुर नगर में जापान से मखमल, चीन से रेशम व इंग्लैंड के मैनचेस्टर से सूती कपड़े आते थे, जिनका तिब्बत व पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापार होता था।[49] इस पेशे से जुड़े करीब दो सौ लोग यहां फेरियां लगाते थे। यातायात सुविधाऐं उप्लब्ध न होने के कारण खच्चरों के माध्यम से माल भेजा जाता था, जो गंतव्य तक कई दिनों बाद पहुंचता था। व्यापारी जब लौटते थे तो साथ में पर्वतीय घी व सुहागा लेकर आते थे। बाद में प्रशासनिक प्रोत्साहन और समर्थन के साथ काशीपुर शहर के आसपास तेजी से औद्योगिक विकास हुआ। इम्पीरियल गज़ेटियर के अनुसार काशीपुर नगर एक समय में कपड़े और धातु के बर्तनों का महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र था।

२०११ की जनगणना के अनुसार काशीपुर की कुल आबादी में से ३६,८२४ लोग काम या व्यापार गतिविधि में लगे हुए थे।[30] इनमें से ३२,४०९ पुरुष थे, जबकि ४,४१५ महिलाएं थीं। कुल ३६,८२४ कार्यरत आबादी में, ८९.२४% मुख्य कार्य में लगे थे, जबकि १०.७६% मामूली कार्य में लगे थे।[30] इस क्षेत्र में उधम सिंह नगर जिले के लगभग ५० प्रतिशत मध्यम और बड़े उद्योग हैं। काशीपुर नगर के २०११ मास्टर प्लान के अनुसार, शहर में लगभग ६०३ औद्योगिक इकाइयां काम कर रही थीं। इनमें १६३ कॉटेज इंडस्ट्रीज, ४१५ लघु उद्योग और २५ मध्यम (या बड़े) उद्योग शामिल हैं। सस्ते और प्रचुर मात्रा में कच्चे माल उपलब्ध होने के कारण, कई पेपर और चीनी मिल भी उपस्थित हैं। २०१४ के एक सर्वे के अनुसार नगर में कुल १२ कागज़ मिलें हैं, जिनमें १,०२२ लोग काम करते हैं।[50]

काशीपुर नगर के एस्कॉर्ट्स फार्म क्षेत्र में उत्तराखण्ड सरकार स्टेट इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (सिडकुल) के अंतर्गत छोटी और मझोली औद्योगिक इकाइयों के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए एक इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल एस्टेट का निर्माण कर रही है। सिडकुल ने पहले भी २००८ में एस्कॉट्र्स फार्म्स पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का अपने प्रस्ताव सरकार के सामने रखा था, पर तब सरकार ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।[51] ३११ एकड़ में फैले इस एस्टेट में लगभग २०० एकड़ क्षेत्र को बिक्री के लिए रखा गया है, जहां भविष्य में उद्योग स्थापित होने हैं।[52]

आवागमन[संपादित करें]

काशीपुर उत्तराखण्ड में एक प्रमुख परिवहन केंद्र है। राष्ट्रीय राजमार्ग ७३४ (पहले राष्ट्रीय राजमार्ग ७४) काशीपुर को जसपुर और नगीना होते हुए नजीबाबाद से जोड़ता है[53] जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग ३०९ (पहले राष्ट्रीय राजमार्ग १२१) काशीपुर को पूर्व में रुद्रपुर से और उत्तर में रामनगर तथा श्रीनगर से जोड़ता है। सबसे निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर विमानक्षेत्र है, जो काशीपुर के ७२ किलोमीटर पूर्व में स्थित है। पंतनगर से दिल्ली और देहरादून के लिए उड़ान सेवाएं उपलब्ध हैं।[54] निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नई दिल्ली में स्थित इंदिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र है, जो कि २१४ किलोमीटर दूर है।

काशीपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन रेल नेटवर्क द्वारा रामनगर, काठगोदाम, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, चंडीगढ़, आगरा, जैसलमेर, हरिद्वार और दिल्ली से जुड़ा है। काशीपुर रेलवे स्टेशन भारतीय रेल के उत्तर पूर्वी रेलवे क्षेत्र के इज्जतनगर मण्डल के प्रशासनिक नियंत्रण में है। शहर के लिए कई नए रेल लिंक प्रस्तावित हैं, जिनमें काशीपुर-नजीबाबाद रेलवे लाइन[55][56][57] तथा रामनगर-चौखुटिया रेल लिंक[58] प्रमुख हैं। बसें काशीपुर में आवागमन का प्रमुख साधन हैं। काशीपुर बस स्टेशन से यूटीसी, यूपीएसआरटीसी, के.एम.ओ.यू और जी.एम.ओ.यू द्वारा विभिन्न मार्गों पर बस सेवाएं संचालित की जाती हैं। इसके अतिरिक्त ऑटो रिक्शा और इलेक्ट्रिक रिक्शा, जिन्हें मिनी मेट्रो भी कहा जाता है, भी शहर के भीतर यात्रा करने के प्रमुख साधन हैं।

शिक्षा[संपादित करें]

भारतीय प्रबंधन संस्थान, काशीपुर परिसर

काशीपुर में कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से सम्बद्ध चार महाविद्यालय स्थित है: राधेहरि राजकीय स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय, चंद्रावती तिवारी कन्या स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय, श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी और काशीपुर कॉलेज ऑफ एजुकेशन।[59][60] इनके अतिरिक्त काशीपुर में भारतीय प्रबंधन संस्थान का एक परिसर भी स्थित है।[61] राधेहरि राजकीय स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय नगर का सबसे पुराना शिक्षण संस्थान है। भारतीय प्रबंधन संस्थान, काशीपुर की नींव २९ अप्रैल २०११ को तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री, कपिल सिब्बल ने रखी थी।[62][63]

२०११ तक काशीपुर में कुल ८८ सरकारी शिक्षण संस्थान थे, जिनमें ४८ प्राथमिक विद्यालय, ३० माध्यमिक विद्यालय, ९ वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और १ डिग्री कॉलेज शामिल थे।[27]:375 काशीपुर के प्रमुख स्कूलों और कॉलेजों में राजपूताना कॉलेज, शेमफोर्ड फ्यूचरिस्टिक स्कूल, आर्मी पब्लिक स्कूल, गुरुकुल स्कूल, कृष्णा पब्लिक कॉलेजिएट, ज्ञानर्थी मीडिया कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल, गुरु नानक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, केन्द्रीय विद्यालय, लिटिल विद्वान स्कूल, मारिया असुम्प्टा कॉन्वेंट स्कूल, समर स्टडी हॉल, सेंट मैरी स्कूल, टेम्पलटन कॉलेज, टुलरम राजाराम सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, विजन वैली स्कूल, उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज और रूट्स पब्लिक स्कूल इत्यादि प्रमुख हैं।

प्रमुख आकर्षण[संपादित करें]

उज्जैन किले की दीवारों के अवशेष
मोटेश्वर महादेव मंदिर
सूर्योदय के समय द्रोण सागर झील का दृश्य

उज्जैन किला[संपादित करें]

काशीपुर के पुराने किले को उज्जैन कहा जाता है। उज्जैन किले की दीवारें 60 फुट ऊँची है और इसमें इस्तेमाल हुई ईंटें 15x10x2.5 इंच की हैं। इस किले में उज्जैनी देवी की मूर्ति स्थापित है। यहाँ चैत माह में चैती का मेला लगता है।

मोटेश्वर महादेव मंदिर[संपादित करें]

इसके पास मोटेश्वर महादेव का मंदिर है। इसे शिव के बारह उप-ज्यार्तिलिंगों में से एक माना जाता है।[64] लोकमान्यतानुसार इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में भीम ने गुरु द्रोणाचार्य व अपने परिवार के पूजा-अर्चना के लिए कराई थी।[65] तभी से ऐतिहासिक मंदिर में पूजा-अर्चना व जलाभिषेक होता आ रहा है। इसके पास में ही जागेश्वर महादेव को मंदिर भी है जो 20 फुट ऊँचा है।

द्रोण सागर झील[संपादित करें]

इसके पास द्रोण सागर है। ऐसी मान्यता है कि इस सागर को पाण्डवों ने अपने गुरू द्रोणाचार्य को गुरूदक्षिणा के रूप में देने के लिये बनाया था। यह 600 वर्ग फुट का है। इसके किनारे कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं। द्रोणसागर को अब भारतीय पुरात्तव विभाग का संरक्षण प्राप्त है।[66]

माँ बालासुन्दरी मंदिर[संपादित करें]

काशीपुर का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है बाल सुन्दरी का, जिसे चैती देवी के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ नवरात्रियों में मेला लगता है। इस मंदिर का शिल्प मस्जिद के समान है जिससे यह पता लगता है कि इसे संभवतः मुगल साम्राज्य के समय में बनाया गया होगा।

गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब[संपादित करें]

तुमरिया बाँध[संपादित करें]

तुमरिया बाँध काशीपुर नगर के उत्तर में स्थित है। १९६१ में बना यह बाँध १० किलोमीटर लम्बा है।[67]

गिरी सरोवर[संपादित करें]

गिरी सरोवर बहुत ही खूबसूरत झील है। यह जगह पिकनिक स्थल के रूप में भी जानी जाती है। गिरी सरोवर काशीपुर-रामनगर मार्ग पर स्थित है। जो कि नगर से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

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