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कान की बाली

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कान की बाली 
piece of jewelry worn on an ear
जिसका उपवर्ग हैear ornament (10158)
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Original publication

कान की बाली (या कुंडल या झुमका) यह कानों में पहना जानेवाला एक गहना है जो आमतैर पर कर्णपाली (इयरलोब) में या अन्य बाहरी हिस्से में छेद करके पहन जाता हैं।[1] कान की बाली दोनों लिंगों द्वारा पहनी जाती हैं और अलग-अलग समय में विभिन्न सभ्यताओं द्वारा इसका उपयोग किए गए हैं।

धातु, प्लास्टिक, कांच, रत्न, मोती, लकड़ी, हड्डी, और अन्य सामग्रियों सहित किसी भी सामग्री से और आकार की कान की बालीयां बनाई जाती हैं। अंततः बाली का आकार यह उसका भार उठाने की शारीरिक क्षमता द्वारा सीमित होता है ताकी कान को कोई हानी न हो।

एजियन द्वीप, सांडोरिनी, ग्रीस के भित्तिचित्र

बाली के लिए कान में भेद करना ये शरीर के रूपांतरण के सबसे पुराने ज्ञात रूपों में से एक है, जिसमें दुनिया भर की संस्कृतियों से कलात्मक और लिखित संदर्भ मिलते हैं जो प्रारंभिक इतिहास के काल से हैं। सोने के झुमके और अन्य गहने मेसोपोटामिया के शुरुआती राजवंशीय काल के सुमेर के उर में शाही कब्रिस्तान में २६०० ईसा पूर्व के कालखंड में पाए गए थे।[2][3][4] स्वर्ण, रजत और कांस्य बालियां मिनोआई सभ्यता (२०००-१६०० ईसा पूर्व) में प्रचलित थीं और इसके उदाहरण सांडोरिनी, ग्रीस के एजियन द्वीप के भित्तिचित्रों पर देखे जा सकते हैं।

  1. Davis, Jeanie. "Piercing? Stick to Earlobe". WebMD. WebMD. 5 जनवरी 2014 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 5 January 2014.
  2. "संग्रहीत प्रति". www.metmuseum.org. 9 मई 2020 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2020-03-06.
  3. "Jewelry from The Royal Tombs of Ur". sumerianshakespeare.com. मूल से से 17 अप्रैल 2020 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2020-03-06.
  4. "Queen Puabi's Headdress from the Royal Cemetery at Ur - Penn Museum". www.penn.museum. मूल से से 19 अप्रैल 2020 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2020-03-06.