कंपिला

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Kampil
कम्पिल
city
CountryFlag of India.svg भारत
राज्यUttar Pradesh
ज़िलाFarrukhabad
ऊँचाई145 मी (476 फीट)
जनसंख्या (2001)
 • कुल8,475
Languages
 • Officialहिन्दी
समय मण्डलIST (यूटीसी+5:30)

कम्पिल उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले का एक नगर है। यह फर्रुखाबाद से ४५ किमी दूरी पर स्थित है। इसकी गणना भारत के प्रचीनतम नगरों में है। इसका प्राचीन नाम 'काम्पिल्य' था।

कम्पिल उत्तर प्रदेश के बदायूँ और फर्रुखाबाद के बीच गंगा तट पर स्थित एक प्राचीन कालीन ऐतिहासिक नगर है। वर्तमान समय में यह कम्पिल के नाम से जाना जाता है। यह उत्तर पूर्व रेलवे लाइन पर कायमगंज रेलवे स्टेशन से लगभग २० किलोमीटर दूर है। कम्पिल फर्रुखाबाद जिले में फतेहगढ़ से उत्तर-पश्चिम दिशा में ४५ किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसका उल्लेख रामायण, महाभारत में भी मिलता है। महाभारत में इसका उल्लेख द्रौपदी के स्वयंवर के समय किया गया है कि राजा द्रुपद ने द्रौपदी स्वयंवर यहाँ आयोजित किया था। कम्पिल पांचाल देश की राजधानी थी। यहाँ कपिल मुनि का आश्रम है जिसके अनुरुप यह नामकरण प्रसिद्ध हुआ। यह स्थान हिन्दू व जैन दोनों ही के लिए पवित्र है। कम्पिल जैन धर्म का प्रसिद्ध पवित्र तीर्थ स्थल है। जैन धर्मग्रन्थों के अनुसार प्रथम तीर्थकर श्री ॠषभदेव ने इस नगर को बसाया तथा अपना पहला उपदेश दिया। इसे तेरहवें तीर्थंकर विमलनाथ जी का जन्मस्थल भी बताया गया है। तेरहवें तीर्थकर बिमलदेव ने अपना सम्पूर्ण जीवन यहीं पर व्यतीत किया।

कम्पिल पर अनेक प्रसिद्ध राजाओं ने शासन किया। महाभारत की द्रोपदी के पिता राजा द्रुपद ने यहाँ पर शासन किया। काम्पिल्य नरेश धर्मरुचि बहुत ही पवित्रात्मा माना गया है। रामायण में इसे इन्द्रपुरी अमरावती की भाँति भव्य और सुन्दर कहा गया है। कुछ विद्वानों की मान्यता है कि प्रसिद्ध ज्योतिषी वाराहमिहिर इसी नगर में जन्मे थे। द्रोपदी का स्वयंवर यहीं हुआ था। कम्पिल में अनेक वैभवशाली मंदिर हैं। वर्तमान कम्पिल में दो प्रसिद्ध जैन मन्दिर है।[1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • कम्पिल
  • कटिया (कटिया उत्तर प्रदेश राज्य, भारत के फर्रुखाबाद जिले में कायमगंज ब्लॉक का एक गाँव है। यह कानपुर मंडल के अंतर्गत आता है। यह जिला मुख्यालय के फतेहगढ़ से पश्चिम की ओर 45 KM दूर स्थित है। कैमगंज से 3 कि.मी. राज्य की राजधानी लखनऊ से 216 कि.मी. )

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. पद्मभूषण ईश्वरी प्रसाद, प्राचीन भारतीय संस्कृति कला राजनीति धर्म दर्शन, द्वितीय संस्करण- १९८६ ई०, मीनू पब्लिकेशन्स इलाहाबाद, पृष्ठ-५५९