ऐल्वारेज़ की परिकल्पना

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ऐल्वारेज़ की परिकल्पना यह कहती है कि डैनासोरों और तमाम अन्य पुरातन जीवों का सामूहिक नाश ६.५ करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी से एक बहुत विशाल क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉएड) के टकराने की वजह से हुआ था जिसे क्रिटैशियस-पैलियोजीन विलुप्ति घटना कहते हैं। सबूत यह दर्शाते हैं की क्षुद्रग्रह मेक्सिको के चिकशुलूब में स्थित युकातान प्रायद्वीप में गिरा था। इस परिकल्पना का नाम वैज्ञानिक पिता पुत्र लुईस वाल्टर एल्वारेज़ और वाल्टर एल्वारेज़ के नाम पर पड़ा है जिन्होंने पहली बार १९८० में एक सामूहिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बाद इसकी घोषणा की थी। मार्च २०१० में शीर्ष वैज्ञानिकों के एक अंतर्राष्ट्रीय दल ने इस परिकल्पना जिसमें कहा गया था कि चिकशुलूब में क्षुद्रग्रह के प्रहार से तमाम जीव जन्तु विलुप्त हो गए को समर्थन दिया। ४१ वैज्ञानिकों के एक समूह ने २० वर्षों के वैज्ञानिक साहित्य का विस्तार से अध्धयन करने के बाद विनाश के अन्य परिकल्पनाओं जैसे ज्वालामुखी फटना को खारिज़ कर दिया। उन्होने पाया कि 10–15 कि॰मी॰ (6–9 मील) जितना बडा एक खगोलीय चट्टान चिकशुलूब में धरती से टकराई थी। चट्टान का आकार मंगल ग्रह के चंद्रमा दिमोस के आकार (त्रिज्या 6.2 किमी) का रहा होगा। टक्कर से 100 teratonnes of TNT (420 Zजूल) जितनी ऊर्जा निकली होगी जो हिरोशिमा नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम की शक्ति से १ अरब गुना ज्यादा है।[1]

इतिहास[संपादित करें]

सन १९८० में नोबल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी लुईस वाल्टर अल्वारेज़, उनके भू-विज्ञानी पुत्र वाल्टर अल्वारेज़, और रसायन विज्ञानी फ्रैंक असारो और हेलेन मिशेल ने अपने एक अध्ययन में दुनिया भर की परतदार शिलाओं पर जाँच करी और पाया कि उनमें के-पीजी सीमा वाली परत में अत्याधिक इरिडियम नामक धातु का संकेंद्रण (कॉन्सनट्रेशन​) था। यह धातु पृथ्वी की ऊपरी सतहों में कम ही मिलती है। पाया गया कि कई शिलाओं की के-पीजी सीमा में औसत से ३० गुना से लेकर १२० गुना इरिडियम का जमावड़ा उपस्थित था। इस जमावड़े का पृथ्वी पर स्वयं ही पैदा होने का कोई कारण ज्ञात​ नहीं है क्यूंकि इरीडियम लोहे की तरफ आकर्षित होने वाला तत्व है इसलिए इसकी अधिकाँश मात्रा धरती के निर्मांण के समय ही कोर में मौजूद लोहे से आकर्षित हो के केन्द्र में चली गई। लेकिन इस से मिलता-जुलता इरिडीयम संकेंद्रण कई क्षुद्रग्रहों (ऐस्टरायडों) में मिलता है। वैज्ञानिकों ने पूर्ण विश्व की के-पीजी सीमा में बसे हुए इरिडियम की मात्रा का अनुमान लगाते हुए हिसाब लगाया कि उसे पृथ्वी पर लाने के लिये प्रहार करने वाला क्षुद्रग्रह कम-से-कम १० किमी का रहा होगा और उसके प्रहार ने १० नील (१०० ट्रिलियन) टन टीएनटी के ज़ोर का विस्फोट किया होगा। तुलना के लिये यह मानव द्वारा किये गये सबसे शक्तिशाली हाईड्रोजन बम के धमाके से २० लाख गुना अधिक है।[2]

अल्वारेज़ के धूमकेतु की टक्कर वाले इस सिद्धांत के सबूत इस बात से भी सही प्रतीत होते हैं कि कॉन्ड्राइट, उल्का पिंड और क्षुद्रग्रहों में मिलने वाले इरिडियम की भारी मात्रा जो कि लगभग ~455 अंश प्रति अरब है [3] धरती की उपरी परतों में मिलने वाले ~0.3 अंश प्रति अरब से कहीं ज्यादा है।[2] के-पीजी सीमा वाली परत में पाए जाने वाले क्रोमियम के समस्थानिक असंगतियाँ कार्बनमय कॉन्ड्राइटों से बने क्षुद्रग्रहों और उल्कापिंडों के समान हैं। Shocked quartz के कण, tektite शीशे की गोलियाँ जो कि टक्कर को इंगित करते हैं भी के-पीजी सीमा में भारी मात्रा में पाए जाते हैं, खासकर कैरेबियन द्वीपों के आसपास। यह सारे मिट्टी की एक परत में समाहित और गुथे हुए हैं जिसे अल्वारेज़ और साथियों ने दुनिया भर में इस भीषण टक्कर से फैला मलबा माना है।[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. doi:10.1126/science.1177265
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  2. अल्वारेज़, एलडब्ल्यु, अल्वारेज़, डब्ल्यु, असारो, एफ, और मिशेल, एच वी (1980). "Extraterrestrial cause for the Cretaceous–Tertiary extinction" [क्रेटैशियस-टर्शियरी के विलुप्ति का खगोलिय कारण]. साइंस. 208 (4448): 1095–1108. PMID 17783054. डीओआइ:10.1126/science.208.4448.1095. बिबकोड:1980Sci...208.1095A.
  3. डब्ल्यु. एफ. मैकडोनॉघ, एस. एस. सन (1995). "The composition of the Earth". केमिकल जियोलॉजी. 120 (3–4): 223–253. डीओआइ:10.1016/0009-2541(94)00140-4. नामालूम प्राचल |= की उपेक्षा की गयी (मदद)