एपिस्टासिस

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इन्हें भी देखें: Quantitative Trait Locus

एपिस्टासिस या प्रबलता वह घटना है जिसमें एक जीन के प्रभावों को एक या कई अन्य जीनों के द्वारा संशोधित किया जाता है, जिन्हें कभी-कभी संशोधक जीन (modifier genes) भी कहा जाता है। जिस जीन का लक्षणप्रारूप अभिव्यक्त होता है उसे एपिस्टाटिक कहा जाता है, जबकि जिस जीन का लक्षणप्रारूप परिवर्तित हो जाता है या अभिव्यक्त नहीं होता, उसे हाइपोस्टाटिक कहा जाता है। एपिस्टाटिस प्रभाविता (dominance) के विपरीत है, जो समान जीन लोकस में एलिलों के बीच एक अंतर्क्रिया है। एपिस्टासिस का अध्ययन अक्सर मात्रात्मक गुणधर्म लोकी (Quantitative Trait Loci (QTL)) और बहुजनिक आनुवंशिकी के सम्बन्ध में किया जाता है।

सामान्य रूप में, एक एलील की फिटनेस का बढ़ना एक जटिल तरीके से कई अन्य एलिलों पर निर्भर करता है; परन्तु, क्योंकि जिस तरीके से जनसंख्या आनुवंशिकी विज्ञान का विकास हुआ, विकासवादी वैज्ञानिक एपिस्टासिस को नियमों में एक अपवाद मानते हैं। 20 वीं सदी की शुरुआत में विकसित प्राकृतिक वरण के प्रारंभिक मॉडल के अनुसार, प्रत्येक जीन, अन्य जीनों की औसत पृष्ठभूमि के विपरीत फिटनेस में अपना लाक्षणिक योगदान देता है। कुछ शुरूआती महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में जनसंख्या अनुवांशिकी को आज भी इसी तरीके से पढ़ाया जाता है।

एपिस्टासिस और आनुवंशिक अंतर्क्रिया इसी घटना के अलग अलग पहलू हैं। शब्द एपिस्टासिस का उपयोग बड़े पैमाने पर जनसंख्या अनुवांशिकी में किया जाता है और यह विशेष रूप से इस घटना के सांख्यिकीय गुणधर्मों से सम्बंधित है। यह निश्चित रूप से जीन उत्पादों के बीच जैवरासायनिक अंतर्क्रिया पर लागू नहीं होता. हालांकि, सामान्य रूप में एपिस्टासिस का उपयोग विभिन्न आनुवंशिक लोकी के प्रभावों की 'स्वतन्त्रता' से प्रस्थान को निरुपित करने के लिए किया जाता है। जीव विज्ञान की भिन्न शाखाओं के बीच 'स्वतन्त्रता' के भिन्न व्याख्यानों के कारण अक्सर भ्रम उत्पन्न होता है। एपिस्टासिस की परिभाषाओं और इन परिभाषाओं के इतिहास के बारे में चर्चा के लिए, देखें[1].

फिटनेस पर एपिस्टाटिक प्रभाव डालने वाले जीन जो बहुत नजदीकी से एक दूसरे से जुड़े हैं, के उदाहरण सुपरजीन (supergenes) और मानव प्रमुख उतक अनुरूप जटिल जीनों (human major histocompatibility complex genes) में देखने को मिलते हैं। यह प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से जीनोमिक स्तर पर उत्पन्न होता है, जहां एक जीन दूसरे जीन के प्रोटीन रोकथाम ट्रांसक्रिप्शन (अनुलिपि) के लिए कोड कर सकता है। वैकल्पिक रूप से, यह प्रभाव लक्षण प्रारूप स्तर पर भी उत्पन्न हो सकता है। उदाहरण के लिए, रंगहीनता (albinism) का कारक जीन एक व्यक्ति के बालों के रंग को नियंत्रित करने वाले जीन के प्रभाव को छुपा देगा. एक अन्य उदाहरण में, एक विडो की चोटी को कोड करने वाले जीन के प्रभाव को, गंजेपन के कारक जीन के द्वारा छुपा दिया जायेगा. फिटनेस (जहां प्रभावित गुणधर्म फिटनेस है) एपिस्टासिस लिंकेज असंतुलन का एक कारण है।

आनुवंशिक अंतर्क्रिया का अध्ययन जीन के कार्य, उत्परिवर्तनों की प्रकृति, कार्यात्मक अतिरेक और प्रोटीन अंतर्क्रिया को प्रकट कर सकता है। क्योंकि प्रोटीन जटिल अधिकांश जैविक कार्यों के लिए उत्तरदायी हैं, आनुवंशिक अंतर्क्रिया एक शक्तिशाली उपकरण है।

फिटनेस या गुणधर्म के मान के आधार पर वर्गीकरण[संपादित करें]

उत्परिवर्तनों की संख्या और फिटनेस के बीच भिन्न संबंधों को दर्शाने वाला चित्र.ब्लू लाइन में सहकारी एपिस्टासिस - प्रत्येक उत्परिवर्तन अन-अनुपातिक रूप से जीव की फिटनेस पर एक बड़ा प्रभाव डालता है। विरोधी एपिस्टासिस रेड लाइन है। देखें सेक्स का विकास

दो लोकस की एपिस्टाटिक अंतर्क्रिया सहकारी (प्रभावित को बढ़ने वाली या synergistic) या विपरीत प्रभावी (गतिविधि को कम करने वाली या antagonistic) हो सकती है।[2][3] AB, Ab, aB या ab वाले जीनप्रारूप (दो लोकी पर) वाले एक अगुणित जीव में हम निम्नलिखित गुणधर्मों के मान पर विचार कर सकते हैं जहां उच्च मान लाक्षणिक गुणों की अधिक अभिव्यक्ति को स्पष्ट करते हैं (सटीक मान उदाहरण के लिए दिए गए हैं):

AB Ab aB ab
एपिस्टासिस नहीं (लोकी पर उपस्थित एडिटिव)  2 1 1 0
सहकारी एपिस्टासिस 3 1 1 0
विरोधी एपिस्टासिस 1 1 1 0

इसलिए, हम इसे इस प्रकार से वर्गीकृत कर सकते हैं:

गुणधर्म मान एपिस्टासिस का प्रकार
AB = Ab + aBab   एपिस्टासिस नहीं, एडिटिव अनुवांशिकी
AB > Ab + aBab   सहकारी एपिस्टासिस
AB < Ab + aBab   विरोधी एपिस्टासिस

इस बात को समझना कि अधिकांश आनुवंशिक अंतर्क्रियाएं सहकारी हैं या विरोधी, ऐसी समस्याओं के समाधान में मदद करेगा जैसे सेक्स का विकास.

एपिस्टासिस और सेक्स[संपादित करें]

नकारात्मक एपिस्टासिस और सेक्स को एक दूसरे से सम्बंधित माना जाता है। प्रयोगात्मक रूप से, इस विचार का परीक्षण अलैंगिक और लैंगिक जनसंख्या के डिजिटल सिमुलेशन का उपयोग करने में किया गया है। समय के साथ, लैंगिक जनसंख्या नकारात्मक एपिस्टासिस की ओर जा रही है, या ऐसा कहा जा सकता है कि दो अंतर्क्रिया एलिलों के द्वारा फिटनेस कम हो रही है। ऐसा माना जाता है कि नकारात्मक एपिस्टासिस के कारण लोगों में अंतर्क्रिया हटाने वाले उत्परिवर्तन होते हैं, जो प्रभावी रूप से जनसंख्या में से हट जाते हैं। इससे जनसंख्या में ये एलील नहीं रहते हैं, परिणामस्वरूप समग्र जनसंख्या अधिक फिट हो जाती है। इस परिकल्पना को एलेक्से कोंद्राशोव के द्वारा दिया गया था और इसे कभी कभी नियतात्मक उत्परिवर्तन परिकल्पना (deterministic mutation hypothesis) कहा जाता है।[4] और इसका परीक्षण कृत्रिम जीन नेटवर्क का उपयोग करके भी किया गया है।[2]

हालांकि, इस परिकल्पना के प्रमाण हमेशा सीधे सामने नहीं आये हैं और कोंद्राशोव के द्वारा प्रस्तावित मॉडल की आलोचना की गयी है क्योंकि इसमें उत्परिवर्तन के मानकों को वास्तविक दुनिया के प्रेक्षणों से अलग माना गया है। उदाहरण के लिए, देखें मेक कार्थी और बर्गमेन[5] इसके अलावा, जिन परीक्षणों में कृत्रिम जीन नेटवर्क का उपयोग किया गया, नकारात्मक एपिस्टासिस को केवल अधिक सघन रूप से जुड़े हुए नेटवर्क में पाया गया[2], जबकि अनुभवजन्य साक्ष्य इंगित करते हैं कि प्राकृतिक जीन नेटवर्क इतने सघन रूप से नहीं जुड़े हैं[6] और सिद्धांत बताते हैं कि मजबूती के लिए चयन कम जटिल नेटवर्क और कम सघन रूप से जुड़े जीनों के पक्ष में होगा[6].

कार्यात्मक या यंत्रवत वर्गीकरण[संपादित करें]

  • आनुवंशिक दमन (Genetic suppression) -दोहरे उत्परिवर्ती का लक्षण प्रारूप इकहरे उत्परिवर्ती से कम गंभीर होता है। इस शब्द को एक ऐसे मामले पर भी लागू किया जा सकता है जिसमें दोहरे उत्परिवर्ती का लक्षण प्रारूप उन इकहरे उत्परिवर्तियों के बीच मध्यवर्ती होता है, जिसमें अधिक गंभीर इकहरे उत्परिवर्ती लक्षण प्रारूप का दमन किसी अन्य उत्परिवर्तन या अनुवांशिक स्थिति के द्वारा कर दिय जाता है। उदाहरण के लिए, एक द्विगुणित जीव में, एक अधोरूपी उतरिवर्ती लक्षण प्रारूप का दमन उस जीन की एक प्रतिलिपि के द्वारा किया जा सकता है जो इसी मार्ग पर विपरीत रूप से काम करता है। इस मामले में, दूसरे जीन को अधोरुपी उत्परिवार्तक के "प्रभावी संदमक" के रूप में वर्णित किया जाता है; "प्रभावी" क्योंकि यह प्रभाव तब देखा जाता है जब एक संदमक जीन की एक जंगली प्रकार की प्रतिलिपि उपलब्ध है। अधिकांश जीनों के लिए, विषमयुग्मजी संदमक उत्परिवर्तन का लक्षण प्रारूप अपने आप में जंगली प्रकार का होगा (क्योंकि अधिकांश जीन अगुणित-अपर्याप्त नहीं होते), ताकि दोहरा उत्परिवार्तक लक्षण प्रारूप (संदमक), इकहरे उत्परिवर्तियों के बीच मध्यवर्ती होता है।
  • आनुवंशिक वृद्धि (Genetic enhancement) - दोहरे उत्परिवर्तक में इकहरे उत्परिवर्तक के एडिटिव प्रभाव के द्वारा परिकल्पित लक्षण प्रारूप की तुलना में अधिक गंभीर लक्षण प्रारूप होते हैं।
  • कृत्रिम मारकता (Synthetic lethality या unlinked non-complementation) - दो उत्परिवर्तन एक दूसरे के पूरक होने में असफल हो जाते हैं और इसलिए एक ही लोकस पर नहीं रहते.
  • अंतराजनिक पूरक, एलिलिक पूरक या अंतराएलिलिक पूरक - दो उत्परिवर्तन एक ही लोकस पर होते हैं और दो एलील पूरक विषम एलिलिक द्विगुणित अवस्था में होते हैं। अंतराजनिक पूरक के कारणों में शामिल हैं:
    • समरूपी प्रभाव जैसे ट्रांसवेक्शन, जहां, उदाहरण के लिए, एक एलील का एन्हेंसर दूसरे एलील के प्रोमोटर से ट्रांसक्रिप्शन को सक्रीय करने के लिए ट्रांस में कार्य करता है।
    • एक कार्यात्मक आरएनए बनाने के लिए दो उत्परिवर्ती आरएनए अणुओं की ट्रांस स्प्लाइसिंग.
    • प्रोटीन स्तर पर, एक और सम्भावना में प्रोटीन शामिल है जो सामान्य रूप से डाईमर के रूप में कार्य करता है। एक विषम एलिलिक द्विगुणित में, दो विभिन्न असामान्य प्रोटीन एक कार्यात्मक डाईमर बना सकते हैं अगर प्रत्येक दूसरे में कार्य की कमी के लिए क्षतिपूर्ति करता हो.

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • सह-अनुकूलन
  • एपिस्टासिस और कार्यात्मक जीनोमिक्स
  • उत्परिवर्तन
  • मात्रात्मक गुणधर्म लोकस

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Cordell, Heather J. (2002). "Epistasis: what it means, what it doesn't mean, and statistical methods to detect it in humans". Human Molecular Genetics. 11 (20): 2463–8. डीओआइ:10.1093/hmg/11.20.2463.
  2. Azevedo R, Lohaus R, Srinivasan S, Dang K, Burch C (2006). "Sexual reproduction selects for robustness and negative epistasis in artificial gene networks". Nature. 440 (7080): 87–90. PMID 16511495. डीओआइ:10.1038/nature04488.
  3. Bonhoeffer S, Chappey C, Parkin NT, Whitcomb JM, Petropoulos CJ (2004). "Evidence for positive epistasis in HIV-1". Science. 306 (5701): 1547–50. PMID 15567861. डीओआइ:10.1126/science.1101786.
  4. A. S. Kondrashov (1988). "Deleterious mutations and the evolution of sexual reproduction". Nature. 336 (6198): 435–440. PMID 3057385. डीओआइ:10.1038/336435a0.
  5. MacCarthy T, Bergman A. (2007). "Coevolution of robustness, epistasis, and recombination favors asexual reproduction". Proc Natl Acad Sci U S A. 104 (31): 12801–6. PMC 1931480. PMID 17646644. डीओआइ:10.1073/pnas.0705455104. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  6. Leclerc R. (2008). "Survival of the sparsest: robust gene networks are parsimonious". Mol Syst Biol. 4 (213). नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद); |title= में बाहरी कड़ी (मदद)

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

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