इन्हीं हथियारों से
| इन्हीं हथियारों से | |
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[[चित्र:|]] इन्हीं हथियारों से | |
| लेखक | अमरकान्त |
| देश | भारत |
| भाषा | हिन्दी |
| विषय | साहित्य |
इन्हीं हथियारों से हिन्दी के विख्यात साहित्यकार अमरकान्त द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 2007 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और 2009 में ब्यास सम्मान से सम्मानित किया गया।[1]राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा सन् 2003 में प्रकाशित 536 पृष्ठों का यह उपन्यास,अमरकांत द्वारा लिखे गए अब तक के उपन्यासों में सबसे बड़ा है। सूखा पत्ता` के बाद अमरकांत के जिस उपन्यास की चर्चा सबसे ज्यादा हुई वह 'इन्हीं हथियारों से` है।
अमरकांत का यह उपन्यास ' इन्हीं हथियारों से' सन्1942 के भारत छोड़ो आंदोलन पर केन्द्रित है। इस उपन्यास में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद का चित्रण किया गया है ।सन् 1942 ई. में 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान कुछ दिनों के लिए बलिया में ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया था। गाँवों में पंचायत सरकारें कायम हुई थी। परन्तु, यह ऐतिहासिक उपन्यास नहीं है, बल्कि उस आन्दोलन से जुड़े व्यक्तियों के निजी अनुभवों, ऐतिहासिक घटनाओं तथा 42 से लेकर स्वतंत्रता- प्राप्ति तक के समय की एक यथार्थवादी परिकल्पना है। वस्तुत: बलिया के बहाने, एक कल्पित कथा द्वारा इस ऐतिहासिक जमाने का स्मरण किया गया है, जब देश की जनता ने स्वाधीनता के लिए विदेशी हुकूमत के विरूद्ध बगावत का झंडा उठाते हुए जबरदस्त संघर्ष किया। इस उपन्यास के सभी पात्र आम है जो अपनी वास्तविक सामाजिक जिंदगी जीते हुए परिस्थितिवश देश की आजादी में अपना सहयोग देते है।
अमरकांत का यह उपन्यास 'साक्षात्कार` नामक पत्रिका में 'आँधी` शीर्षक से धारावाहिक के रूप में छप चुकी है। अमरकांत गांधी जी के विचारधारा से काफी प्रभावित थे इसलिए उन्होंने इस उपन्यास में गांधी जी के विचारों को जगह जगह कोर्ट किया है[2]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "अकादमी पुरस्कार". साहित्य अकादमी. मूल से से 15 सितंबर 2016 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 11 सितंबर 2016.
- ↑ Hindi Language and Literature (2020-06-14), अमरकांत के उपन्यास"इन्हीं हथियारों से" पर 2011 का व्याख्यान ।, अभिगमन तिथि: 2025-09-29
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