इंटर-सर्विसेस इंटेलिजेंस

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{{Infobox Government agency |agency_name = आई एस आई निदेशालय
Directorate for Inter-Services Intelligence |logo = State emblem of Pakistan.svg |logo_width = 150px |logo_caption = चिन्ह |seal = |seal_width = |seal_caption = |picture = |picture_width = |picture_caption = |formed =1948 में, जनरल रॉबर्ट काउथोम के द्वारा |preceding1 = |preceding2 = |dissolved = |superseding = |jurisdiction =पाकिस्तान सरकार |headquarters = इस्लामाबाद, Pakistan |latd= |latm= |lats= |latNS= |longd= |longm= |longs= |longEW= |region_code = pak |employees = 10,000 (अनुमानित)[1] |budget = |minister1_name = |minister1_pfo = |minister2_name = |minister2_pfo = |chief1_name = [[faiz hameed] |chief1_position =डायरेक्टर जनरल |chief2_name = |chief2_position = |agency_type = |parent_agency = |keydocument1= |website = |footnotes = |map = |map_width = |map_caption = }} इंटर सर्विस इंटेलीजेंस (आईएसआई) पाकिस्तान की सबसे बड़ी इंटेलीजेंस (गुप्तचर) सेवा है। 1950 में पूरे पाकिस्तान की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा का जिम्मा आईएसआई को सौंप दिया गया। इसमें सेना के तीनों अंगों के अधिकारी मिलकर आईएसआई के लिए काम करते हैं। पूर्व में इसका मुख्यालय रावलपिंडी में था और इसे "इंटेलीजेंस ब्यूरों" के नाम से जाना जाता था। वर्तमान में आईएसआई का मुख्यालय इस्लामाबाद में है और लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शूजा पाशा इसके निदेशक हैं। वर्तमान में इसके स्टाफ में लगभग 25 हजार लोग हैं।

इतिहास[संपादित करें]

1947 में पाकिस्तान में दो मुख्य गुप्तचर एजेंसियां थी, इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) और मिलिट्री इंटेलीजेंस (एमआई), पर 1947 में हुए भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलीजेंस (एमआई) सेना के तीन अंगों नेवी, आर्मी और एयरफोर्स के बीच सूचनाओं और व्यवस्थाओं के आदान-प्रदान में एकदम विफल रही। इस असफलता से एक नई एजेंसी की जरूरत महसूस हुई। नतीजतन 1948 में आईएसआई का गठन किया गया। आईएसआई की नींव ऑस्ट्रेलियाई मूल के ब्रिटिश आर्मी ऑफिसर मेजर जनरल आर. कैथोम ने रखी थी जो उस समय पाकिस्तानी आर्मी स्टाफ के मुख्य थे।

आईएसआई के उद्देश्य[संपादित करें]

  • पाकिस्तान की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा का जिम्मा।
  • अन्य देशों में हो रहे सेना व राजनीतिक बदलावों व विकास पर नजर रखना, जिसका सीधा प्रभाव पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ता हो।
  • दूसरे देशों की गुप्त जानकारियां इकट्ठा कर देश की सुरक्षा व्यवस्था में उचित बदलाव करना।
  • गुप्तचर विभाग और सेना के तीनों अंगों के बीच सामंजस्य स्थापित करना।
  • राजनीतिक गतिविधियों, मीडिया की खबरों व समाज की अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों पर नजर रखना।
  • विदेशी कूटनीतिज्ञों व विदेश में कार्यरत पाकिस्तानी कूटनीतिज्ञों पर नजर रखना।

आईएसआई का संरचना[संपादित करें]

आईएसआई के डायरेक्टर जनरल को तीन डिप्टी डायरेक्टर जनरल देश में घट रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते रहते हैं जो राजनीति, बाह्य और सामान्य क्षेत्रों के प्रति जवाबदेह होते हैं।

आईएसआई के प्रमुख विभाग व उनके कार्य[संपादित करें]

  • ज्वाइंट इंटेलीजेंस एक्स (जेआईएक्स)- आईएसआई के सभी विभागों के बीच कॉर्डिनेशन करना।
  • ज्वाइंट इंटेलीजेंस ब्यूरो (जेआईबी)- राजनीतिक जानकारी जुटाने के लिए जिम्मेदार।
  • ज्वाइंट काउंटर इंटेलीजेंस ब्यूरो (जेसीआईबी)‍ पाकिस्तान के विदेशी कूटनीतिज्ञो पर नजर रखना और मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया, चीन, अफ्गानिस्तान और इस्लामिक देशों में चल रहे गुप्तचर कार्यों पर ध्यान देना।
  • ज्वाइंट इंटेलीजेंस नॉर्थ (जेआईएन)- जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के लिए जिम्मेदार।
  • ज्वाइंट सिंगल इंटेलीजेंस ब्यूरो (जेएसआईबी)- भारत-पाक सीमा पर गुप्त जानकारियां जुटाना।
  • ज्वाइंट इंटेलीजेंस टेक्निकल (जेआईटी)- आईएसआई की तकनीकी खामियां दूर करना।
  • इसके अलावा युद्ध संबंधी विस्फोटक व रासायनिक विभाग भी अलग से हैं।

प्रमुख निदेशक[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  • Gregory, The ISI and the War on Terrorism 2007, पृ॰ 1021.