आस्तिक

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

भारतीय दर्शन में आस्तिक दो अर्थों में प्रयुक्त हुआ है-

  • (1) जो ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास करते हैं, तथा आत्मा और परलोक को स्वीकार करते। इस परिभाषा के अनुसार केवल चार्वाक दर्शन जिसे लोकायत दर्शन भी कहते हैं, भारत में नास्तिक दर्शन कहलाता है
  • (2) जो लोग वेद को परम प्रमाण मानते हैं। इस परिभाषा के अनुसार बौद्ध, जैन और लोकायत नास्तिक मतों कहलाते हैं ।


आस्तिक शब्द, अस्ति से बना हुआ है जिसका अर्थ है - '(विद्यमान) है'। जो आस्तिक नहीं हैं उन्हें नास्तिक कहा जाता है।

'पहले से लेकर वर्तमान में किसी सद्ग्रंथों निर्णायक मतों न होने से वे नास्तिकता को अपनाने लगे।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]