आस्तिक दर्शन

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आस्तिक दर्शन (षड्दर्शन) भारतीय दर्शन परम्परा में उन दर्शनों को कहा जाता है जो वेदों को प्रमाण मानते थे।

भारत में भी कुछ ऐसे व्यक्तियों ने जन्म लिया जो वैदिक परम्परा के बन्धन को नहीं मानते थे वे नास्तिक कहलाये तथा दूसरे जो वेद को प्रमाण मानकर उसी के आधार पर अपने विचार आगे बढ़ाते थे वे आस्तिक कहे गये।

आस्तिक दर्शन के छः मुख्य विभाग हैं -

छः मुख्य विभाग होने के कारण इसे षड्दर्शन भी कहा जाता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]