आदिम-हिन्द-यूरोपीय लोग

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पितृवंश समूह आर१ए का विस्तार आदिम-हिन्द-यूरोपीय लोगों के फैलाव के साथ सम्बंधित माना जाता है

आदिम-हिन्द-यूरोपीय यूरेशिया में बसने वाले उन प्राचीन लोगों को कहा जाता है जो आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा बोलते थे। इनके बारे में जानकारी भाषावैज्ञानिक तकनीकों से और कुछ हद तक पुरातत्व-विज्ञान (आर्कियोलोजी) से आई है। आधुनिक युग में अनुवांशिकी (जेनेटिक्स) के ज़रिये भी इनकी जातीयता के बारे में जानकारी मिल रही है। बहुत से इतिहासकारों का मानना है कि यह लोग ४००० ईसापूर्व के काल में पोंटिक-कैस्पियाई स्तेपी क्षेत्र में बसा करते थे और २,००० ईसापूर्व तक अनातोलिया, पश्चिमी यूरोप, मध्य एशिया और दक्षिणी साइबेरिया तक विस्तृत हो चुके थे।[1] आनुवंशिकी नज़रिए से बहुत से विद्वान अब इन्हें पितृवंश समूह आर१ए का वंशज मानते हैं।[2][3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Encyclopedia of Indo-European culture, J. P. Mallory, Taylor & Francis, 1997, ISBN 978-1-884964-98-5
  2. A Grammar of Modern Indo-European, Second Edition: Language and Culture, Writing System and Phonology, Morphology, Syntax, Texts and Dictionary, Carlos Quiles, Fernando López-Menchero, Indo-European Association, 2009, ISBN 978-1-4486-8206-5, ... The spread of Y-chromosome DNAhaplogroup R1a1 has been associated with the spread of the Indo-European languages too. The mutations that characterize haplogroup R1a occurred ~10000 years bp ...
  3. Grandpa Was A Deity: How A Tribal Assertion Created Modern Culture, William Lawrence Lipton, iUniverse, 2011, ISBN 978-1-4620-5303-2, ... If you pick Indo-European language culture, or any culture in which Hg-R1a is represented in the genetics of the earliest members of a culturally identifiable group, you will discover a similar structure and pantheon ...