आत्मविश्वास

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आत्मविश्वास (Self-confidence) वस्तुतः एक मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्ति है। आत्मविश्वास से ही विचारों की स्वाधीनता प्राप्त होती है और इसके कारण ही महान कार्यों के सम्पादन में सरलता और सफलता मिलती है। इसी के द्वारा आत्मरक्षा होती है। जो व्यक्ति आत्मविश्वास से ओत-प्रोत है, उसे अपने भविष्य के प्रति किसी प्रकार की चिन्ता नहीं रहती। उसे कोई चिन्ता नहीं सताती। दूसरे व्यक्ति जिन सन्देहों और शंकाओं से दबे रहते हैं, वह उनसे सदैव मुक्त रहता है।

यदि आप कोई महान कार्य करना चाहते हैं तो सबसे पहले मन में स्वाधीनता के विचार भरिए। जिस मनुष्य का मन सन्देह, चिन्ता और भय से भरा हो, वह महान कार्य तो क्या, कोई सामान्य कार्य भी नहीं कर सकता। सन्देह और संशय आपके मन को कभी भी एकाग्र न होने देंगे। मन की एकाग्रता कार्य-सम्पादन के लिए आवश्यक शर्त है।

आत्मविश्वास वह अद्भुत शक्ति है जिसके बल पर एक अकेला मनुष्य हजारों विपत्तियों एवं शत्रुओं का सामना कर लेता है। निर्धन व्यक्तियों की सबसे बड़ी पूंजी और सबसे बड़ा मित्र आत्मविश्वास ही है। इस संसार में जितने भी महान कार्य हुए हैं या हो रहे हैं, उन सबका मूल कारण आत्मविश्वास ही है। संसार में जितने भी सफल व्यक्ति हुए हैं, यदि हम उनका जीवन इतिहास पढ़ें तो पाएंगे कि इन सभी में एक समानता थी और वह समानता थी- आत्मविश्वास की।

जब किसी व्यक्ति को यह अनुभव होने लगता है कि वह उन्नति कर रहा है, ऊंचा उठ रहा है, तब उसमें स्वतः आत्मविश्वास से पूर्ण बातें करने की शक्ति आ जाती है। उसे शंका पर विजय प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति के मुखमण्डल पर विजय का प्रकाश जगमगा रहा हो, सारा संसार उसका आदर करता है और उसकी विजय विश्वास में परिणत हो जाती है। आपने भी अनेक बार अनुभव किया होगा कि जो व्यक्ति आप पर अपनी शक्ति का प्रभाव डालते हैं, आप उनका विश्वास करने लगते हैं। इस सबका कारण उनका आत्मविश्वास है। जिस व्यक्ति में आत्मविश्वास होता है, वह स्वतः दिव्य दिखाई पड़ने लगता है, जिसके कारण हम उसकी ओर खिंच जाते हैं और उसकी शक्ति पर विश्वास करने लगते हैं।

चेहरा-आत्म-दर्पण[संपादित करें]

आज तक ऐसा कोई भी व्यक्ति देखने में नहीं आया जो अपने आपको हीन, तुच्छ और बेकार समझते हुए, कोई महान कार्य कर पाया हो। आप अपने आपको जितना अधिक योग्य समझेंगे, उतना ही अधिक महत्त्वपूर्ण कार्य कर पाएंगे। वैसे ही आचार-विचार और भाव आपके चेहरे पर दिखाई देने लगेंगे।

यदि आप अपने को साधारण और मामूली व्यक्ति समझेंगे तो आपके कहने से पूर्व ही आपका चेहरा यह भाव स्पष्ट कर देगा। यह असम्भव है कि आप अपने को तुच्छ और निर्धन भी समझें और आपके चेहरे पर निर्धनता की झलक भी दिखाई न दे। एक बात का हमेशा ख्याल रखें कि जो गुण आपमें में विद्यमान हैं, आपके के चेहरे पर उनकी झलक स्पष्ट दिखाई देती है। इन गुणों का प्रभाव दूसरों पर बिना कहे पड़ता है। आपको किसी को यह बात बताने की आवश्यकता नहीं है कि आप हीन दीन, अयोग्य और निर्बल हैं। यह कार्य तो आपका मुखमंडल भलीभांति कर देता है। जिस प्रकार दर्पण आपको आपकी तस्वीर दिखाता है, उसी प्रकार आपका चेहरा आपके दिल का दर्पण है, वो आपकी अवस्था और आपके विचारों को जाहिर करता है। आपके आत्मबल की निर्बलता या अयोग्यता आपके चेहरे पर दिखती है।

आप जिन गुणों को प्राप्त करना चाहते हैं उनको अपने मन में संजोइए तो वे गुण स्वतः आपके हो जायेंगे। आपका मुखमण्डल उन गुणों के प्रकाश में जगमगाने लगेगा। यदि आप अपने चेहरे, आचरण अथवा व्यवहार में उच्चता लाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपने विचारों में उच्चता लानी होगी। तभी आपको सफलता प्राप्त होगी, अन्यथा नहीं। आपके किसी भी कार्य की नींव का मजबूत पत्थर आपका आत्मविश्वास है। इस विचार में ही अद्भुत शक्ति छिपी है कि आप प्रत्येक कार्य कर सकते हैं।आप अद्वितीय हैँ, आपके जैसा इस संसार मेँ दूसरा कोई नहीँ।

अपने बच्चों का आत्मविश्वास कम न करें[संपादित करें]

प्रत्येक माता पिता को चाहिए कि बच्चों के आत्मविश्वास को कभी कम न करें। उन्हें इस प्रकार के वाक्य नहीं कहने चाहिए कि ‘तुम कुछ नहीं जानते’ या ‘तुममें इस बात की कमी है’। ऐसा करना एक भारी अपराध है। माता-पिता तो क्या, अध्यापक भी इसका महत्त्व नहीं समझते कि बच्चों को ऐसी बातें कहने से उनके दिल पर कैसा गलत और विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे उनमें हीन भावनाओं का जन्म होता है। बालक अपने आपको तुच्छ समझने लगते हैं। संसार में आज जो गरीबी और निराशा दिखाई पड़ती है, उसका मुख्य कारण ये हीन भावनाएं ही हैं।

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