आत्मज्ञान

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ

आत्मज्ञान मन के भीतर की जागरूपता है। भारतीय दर्शन में इसका प्रतीक शिव, विष्णु अथवा शक्ति हैं। इसका वर्णन बहुत वेद और उपनिषद में मिलता है।

वैदिक परम्परा के अनुसार इस परम्परा का गूढ रहस्य चेतना अथवा आत्मज्ञान विज्ञान है। आत्मज्ञान या आत्मज्ञानी किसे कहते है आत्मज्ञान एक शब्द में उत्तर है कि वह जीव जहा कहीं भी रहता हों उसके द्वारा समाज या ब्राह्मण में सबसे पहले जिस काम का जन्म हुआ हो या किसी भी चीज ने जन्म लिया हो उस जीव को आत्मज्ञानी कहते है वह जीव समाज या ब्राह्मण के किसी भी क्षेत्र या कोई भी जीव हो सकता है जरूरी नहीं सिर्फ ब्रह्मा,विष्णु,महेश या कन्हिया जी या अदर समाज के लोग ही आत्मज्ञानी हो सकते है यहां हर वह जीव, प्राणी आत्मज्ञानी है जिसके द्वारा समाज और ब्रह्मांड में सबसे पहले जिस किसी भी चीज का जन्म हुआ हो उस चीज का वही व्यक्ति जन्म दाता है कोई भी जीव हो सकता है किसी भी चीज का जन्म हुआ चाहें वह कुछ भी हो कोई जैसे उदाहरण सबसे पहले चित्र का निर्माण हुआ तो इसका जन्म दाता वही है जिसने सबसे पहले चित्र बनाया है इसके बाद तो लोगों ने edit किया यानि। बदला है कॉपी किया यानि रट्टा लगाया है