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असंग

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असंग महायान बौद्ध विद्वान और योगाचार परंपरा के स्थापक थे।[1][2][3] महायान सूत्रालंकार जैसा प्रौढ़ ग्रंथ लिखकर इन्होंने महायान संप्रदाय की नींव डाली और यह पुराने हीनयान संप्रदाय से किस प्रकार उच्च कोटि का है, इसपर जोर दिया।

इनका जन्म गंधार के पुरुषपुर नगर में दूसरी शताब्दी के आसपास हुआ था।

आचार्य असंग धार्मिक प्रवर्तक होते हुए बौद्ध न्याय के भी आदि गुरु माने जाते हैं। इन्होंने न्याय के अध्यापन की एक मौलिक परंपरा चलाई जिसमें प्रसिद्ध बौद्ध नैयायिक दिङ्नाग की दीक्षा हुई। प्रसिद्ध है कि आचार्य असंग के भाई वसुबन्धु पहले सर्वास्तिवाद के पोषक थे, किन्तु बाद में असंग के प्रभाव में आकर वे योगाचार विज्ञानवादी हो गए। दोनों भाइयों ने मिलकर इसके पक्ष को बड़ा प्रबल बनाया।

बाहरी कड़ियाँ

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  1. साँचा:Britannica. "Asaṅga, (flourished 5th century AD, b. Puruṣapura, India), influential Buddhist philosopher who established the Yogācāra (“Practice of Yogā”) school of idealism."
  2. Engle, Artemus (translator), Asanga, The Bodhisattva Path to Unsurpassed Enlightenment: A Complete Translation of the Bodhisattvabhumi, Shambhala Publications, 2016, Translator's introduction.
  3. Rahula, Walpola; Boin-Webb, Sara (translators); Asanga, Abhidharmasamuccaya: The Compendium of the Higher Teaching, Jain Publishing Company, 2015, p. xiii.