अदक छन्नी

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HEPA छन्नी की अंदरूनी बनावट

अधिदक्ष कण छन्नी, वायु को साफ़ करने की एक छन्नी है जिससे बहुत छोटे कण(०.३ माइक्रॉन) भी छानकर निकाले जा सकते हैं। इसका आविष्कार १९५० के दशक में अमेरिका के परमाणु उर्जा संस्थान में शोध के बाद हुआ। इसे शोध का उद्देश्य परमाणु-संयंत्रों में छोटे कणों के हवा में चले जाने और इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक विकिरण फैलाने से रोकना था। इसका आरंभिक नाम हीपा (High Eficciency Particulate Air, HEPA) था, जो अब High Eficciency Particulate Arrest है।

आजकल इसका उपयोग परमाणु संयंत्रों, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक कारखानों, हवाई जहाजों, औपरेशन थियेटरों जैसी जगहों पर होता है जहाँ अधिक शुद्ध हवा की जरूरत होती है। माइक्रोइलेक्टॉनिक कारखानों में बड़े कणों के चले जाने से उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादों के सही चलने का भरोसा बहुत कम हो जाता है। कुछ घरों और कारों में भी इसका इस्तेमाल होता है। दावा किया जाता है कि यह अत्यधिक छोटे कण, यहाँ तक कि जीवाणुओं को भी निकाल देता है जिससे रोगों के फैलने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

इसके अंदर में फाइबर काँच की कई परतें होती हैं, जिससे टकराकर कण फंस जाते हैं। कण अगर १ माइक्रॉन से कम दूरी पर होते हैं तो भी खिंचे चले आते हैं।

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