अकंपित गौतम

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अकंपित गौतम भगवान महावीर के ८ वें गणधर थे।[1] वे गौतम गोत्रिय ब्राह्मण थे। इन्होंने अपने 300 शिष्यों के साथ 48 वर्ष की अवस्था मे भगवान महावीर से दीक्षा ग्रहण की थी, तथा भगवान महावीर के ८ वें शिष्य कहलाये।[2]

अकंपित गौतम की शंका[संपादित करें]

प्रत्येक गणधर को अपने ज्ञान में कोई ना कोई शंका थी, जिसका समाधान भगवान महावीर ने किया था, अकंपित गौतम के मन में शंका थी कि, क्या नरक का अस्तित्व होता है या नहीं ?

सन्दर्भ[संपादित करें]