अंतिम घंटी

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१९६८ में स्वेर्दलोव्स्क शहर के एक विद्यालय में अंतिम घंटी समारोह

अंतिम घंटी (Last Bell), जिसे रूसी भाषा में पोसलेदन्यी ज़्वोनोक​ (Последний звонок) कहते हैं, रूस और भूतपूर्व सोवियत संघ से उत्पन्न होने वाले अन्य देशों के विद्यालयों में एक ख़ुशी मानाने का समारोह होता है जो आध्यात्मिक वर्ष के अंत में पढ़ाई ख़त्म होने पर लेकिन इम्तिहानों के शुरू होने से पहले आयोजित किया जाता है। आमतौर पर यह हर साल २५ मई को मनाया जाता है। जो विद्यार्थी विद्यालय से उत्तीर्ण होकर उसे छोड़ने वाले होते हैं वे अपनी स्कूल की वर्दियों में या फिर औपचारिक अच्छे वस्त्रों में बनठन कर समारोह में हिस्सा लेते हैं। १९९० के दशक से लड़कियों के लिए सोवियत-शैली की स्कूली वर्दियाँ पहनकर आना प्रथा बन गयी है और वे अक्सर सफ़ेद तहबन्द (एप्रन) पहने और बालों में सफ़ेद फ़ीते (रिबन) बांधे आती हैं।

इस समारोह में इन विद्यार्थियों के लिए पहली कक्षा के किसी बच्चे द्वारा यादगार के लिए एक अंतिम बार स्कूल की घंटी बजाई जाती है। अक्सर यह विद्यालय की सबसे छोटी बच्ची होती है जिसे विद्यालय से उत्तीर्ण होने वाला सबसे बड़ा लड़का अपनी गोद में उठाकर घंटी तक ले जाता है।[1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Children's World: Growing Up in Russia, 1890-1991 Archived 21 जुलाई 2011 at the वेबैक मशीन., Catriona Kelly, pp. 515, Yale University Press, 2007, ISBN 978-0-300-11226-9, ... In the course of time, the occasion, known as 'The Last Bell', become associated with numerous other rituals ... particularly concentrated on one group of pupils, in this case those who had just completed their ten-year stint of education and were about to sit their examinations. An important part of the ceremony was the ringing of the bell itself, which in some schools was done by the smallest female pupil, who was carried to the bell in the arms, or on the shoulder, of the tallest school-leaver ...