स्वामी हरिदास

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स्वामी हरिदास
अकबर की उपस्थिति में तानसेन को संगीत सिखाते हुए स्वामी हरिदास
अकबर की उपस्थिति में तानसेन को संगीत सिखाते हुए स्वामी हरिदास
जन्म १४८०/ १५१२
राजपुर, वृंदावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश
मृत्यु १५७५/१६०७
निधिवन, वृंदावन
गुरु/शिक्षक भाई मरदाना
दर्शन निम्संबार्प्रक दाय
खिताब/सम्मान नवरत्न

स्वामी हरिदास (१४९०-१५७५ अनुमानित) भक्त कवि, शास्त्रीय संगीतकार तथा कृष्णोपासक सखी संप्रदाय के प्रवर्तक थे, जिसे 'हरिदासी संप्रदाय' भी कहते हैं। इन्हें ललिता सखी का अवतार माना जाता है। इनकी छाप रसिक है। इनके जन्म स्थान और गुरु के विषय में कई मत प्रचलित हैं। इनका जन्म समय कुछ ज्ञात नहीं है। हरिदास स्वामी वैष्णव भक्त थे तथा उच्च कोटि के संगीतज्ञ भी थे। प्रसिध्द गायक तानसेन इनके शिष्य थे। सम्राट अकबर इनके दर्शन करने वृंदावन गए थे। 'केलिमाल' में इनके सौ से अधिक पद संग्रहित हैं। इनकी वाणी सरस और भावुक है। ये प्रेमी भक्त थे।

ये महात्मा वृंदावन में निंबार्क मतांतर्गत टट्टी संप्रदाय, जिसे सखी संप्रदाय भी कहते है, के संस्थापक थे और अकबर के समय में एक सिद्ध भक्त और संगीत-कला-कोविद माने जाते थे। कविताकाल सन् 1543 से 1560 ई. ठहरता है। प्रसिद्ध गायनाचार्य तानसेन इनका गुरूवत् सम्मान करते थे। यह प्रसिद्ध है कि अकबर बादशाह साधु के वेश में तानसेन के साथ इनका गाना सुनने के लिए गया था। कहते हैं कि तानसेन इनके सामने गाने लगे और उन्होंने जानबूझकर गाने में कुछ भूल कर दी. इसपर स्वामी हरिदास ने उसी गाना को शुद्ध करके गाया. इस युक्ति से अकबर को इनका गाना सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो गया. पीछे अकबर ने बहुत कुछ पूजा चढ़ानी चाही पर इन्होंने स्वीकार नहीं की।

कृतियाँ[संपादित करें]

अकबर की उपस्थिति में तानसेन को संगीत सिखाते हुए स्वामी हरिदास

1. स्वामी हरिदास जी के पद

2. हरिदास जी की बानी

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]