व्याध तारा

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व्याध एक द्वितारा है जिसके "व्याध ए" और "व्याध बी" तारे इस तस्वीर में देखे जा सकते हैं (व्याध बी नीचे बाएँ पर स्थित बिंदु है)

व्याध तारा पृथ्वी से रात के सभी तारों में सब से ज़्यादा चमकीला नज़र आता है। इसका सापेक्ष कान्तिमान -१.४६ मैग्निट्यूड है जो दुसरे सब से रोशन तारे अगस्ति से दुगना है। दरअसल जो व्याध तारा बिना दूरबीन के आँख से एक तारा लगता है वह वास्तव में एक द्वितारा है, जिसमें से एक तो मुख्य अनुक्रम तारा है जिसकी श्रेणी A1V है जिसे "व्याध ए" कहा जा सकता है और दूसरा DA2 की श्रेणी का सफ़ेद बौना तारा है जिसे "व्याध बी" बुलाया जा सकता है। यह तारे महाश्वान तारामंडल में स्थित हैं।

व्याध पृथ्वी से लगभग ८.६ प्रकाश-वर्ष की दूरी पर है। व्याध ए सूरज से दुगना द्रव्यमान रखता है जबकि व्याध बी का द्रव्यमान लगभग सूरज के बराबर है।[1]

नाम का विवरण और अन्य भाषाएँ[संपादित करें]

व्याध तारे का पूरा नाम संस्कृत में "मृगव्याध" हुआ करता था जिसका मतलब है "हिरन का शिकारी"। इस नाम के साथ यह तारा रूद्र (शिवजी) का प्रतीक है।[2] इसे संस्कृत में "लुब्धक" भी कहा जाता है, जिसका अर्थ भी "शिकारी" है। व्याध को अंग्रेज़ी में "सीरियस" (Sirius) या "डॉग स्टार" (Dog star) कहा जाता है। "व्याध ए" को "सीरियस ए" (Sirius A) और "व्याध बी" को "सीरियस बी" (Sirius B) कहा जाता है। "महाश्वान तारामंडल" को अंग्रेज़ी में "कैनिस मेजर" (Canis major) और मराठी में "बृहल्लुब्धक" कहा जाता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Liebert, J.; Young, P. A.; Arnett, D.; Holberg, J. B.; Williams, K. A. (2005). "The Age and Progenitor Mass of Sirius B". The Astrophysical Journal 630 (1): L69–L72. arXiv:astro-ph/0507523. Bibcode 2005ApJ...630L..69L. doi:10.1086/462419. 
  2. "Shri Shri Shiva Mahadeva". http://www.religiousworlds.com/mandalam/shiva.htm.