मेहमान ख़ाना

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मेहमान ख़ाना या बैठक उत्तर भारत, पाकिस्तानबांग्लादेश के पारम्परिक घरों में वह कमरा होता है जहाँ अतिथियों को बैठाकर उनका सत्कार किया जाता है। इसे संस्कृत में अतिथि कक्ष कहा जाता था। पाकिस्तान व अफ़ग़ानिस्तान के पश्तून इलाक़ों में इसे हुजरा भी कहते हैं। इन कमरों में बैठने के लिए अक्सर मूढ़े और तख़्त / तख़्तपोश रखे होते हैं और व्यवस्था आधुनिक भारतीय शहरों के घरों के 'ड्राइंग रूम' से भिन्न होती है।

पश्तून संस्कृति में[संपादित करें]

पश्तून क्षेत्रों में लोग समाज में अपने स्थान को अपने घरों के हुजरों के ठाठ-बाठ से जतलाते हैं। आमतौर पर हुजरों में केवल पुरुष अतिथियों का ही सत्कार किया जाता है और महिला अतिथि घर के अंदरूनी भाग में प्रवेश करके घर की महिलाओं के पास बैठती हैं। कुछ क्षेत्रों में पूरा क़बीला या गाँव ही एक बड़ा हुजरा चलता है जहाँ बाहर से आने वाले महमानों को ठहराया जाता है और हुक्का-चाय दी जाती है।[1]

ईरान में[संपादित करें]

ईरान में 'मेहमान ख़ाना' घर में महमानों की बैठक की बजाय यात्रियों के किराए पर रहने के होटल को कहते हैं। तेहरान के लहजे की फ़ारसी में इसे 'महमून ख़ूनेह​' कहते हैं।[2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. South Asian folklore: an encyclopedia : Afghanistan, Bangladesh, India, Nepal, Pakistan, Sri Lanka, Peter J. Claus, Sarah Diamond, Margaret Ann Mills, Taylor & Francis, 2003, ISBN 978-0-415-93919-5, ... In Pashto-speaking areas the term hujra [Arabic: room, cell] refers to a separate room(s) or house maintained for male guests ... The hujra may be maintained by a village collectively or by apowerful member of a village (a khan or malik); the prestige of the person(s) who maintains the hujra is directly proportional to the number of guests ...
  2. Travels in the Middle East: being impressions by the way in Turkish Arabia, Syria, and Persia, Trenchard Craven William Fowle, E.P. Dutton & Company, 1916, ... she gave me to understand that she knew of a mehman-khana (hotel) ...