बलूची

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बलूची पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत एवं इरान के सिस्तान-बलोचिस्तान प्रांत में बलूची समुदाय के लोगों द्वारा बोले जाने वाली भारत-यूरोपी भाषा समूह की एक भाषा है. बलूची पाकिस्तान की नौ आधिकारिक भाषाओँ में से एक है. बलोचिस्तान के ब्राहुई समुदाय के कई मोग बलूची का एक द्वितीय भाषा का रूप में प्रयोग करते हैं. विश्व भर में लगभग ७०-८० लाख लोग बलूची का एक मात्र भाषा के रूप में प्रयोग करते हैं. बलूची की कुर्दिश व पश्तो जैसी अन्य ईरानी भाषाओँ के साथ कई समान्यताएं हैं. सिंधी भाषा पर भी बलूची का काफी गहरा प्रभाव हैं.

१९वीं सदी के पूर्व बलूची एक अलिखित भाषा थी जिस की कोई लिपि या साहित्य नहीं थे. बलोचिस्तान में प्रचलित लिखित भाषा फारसी हुआ करती थी. अँगरेज़ भाषा विशेषज्ञों व राजनीतिक इतिहासकारों ने बलूची के लिए रोमन लिपि का इस्तेमाल शुरू किया परन्तु पाकिस्तान के बन्ने के पश्चात बलोच बुद्धिजीविओं ने बलूची के लिए उर्दू-अरबी लिपि का प्रयोग शुरू किया. बलोची में काव्य लेख का पहला संग्रह, श्री मीर गुल खान नासिर द्वारा लिखित 'गुल्बंग' सन १९५१ में प्रकाशित हुआ. हलाकि काफी समय बाद ही पाकिस्तान में सय्यद जाहुर्शाह हशोमी ने बलोची के लिए उर्दू-अरबी लिपि के इस्तेमाल से सम्बंधित एक विस्तृत मार्गदर्शिका का लेखन किया. सय्यद हशोमी को आज 'बलोची के पितृ' के नाम से संबोधित किया जाता है. उनकी मार्गदर्शिका का आज पूर्वी और पश्चिमी बलोचिस्तान में व्यापक रूप से प्रयोग होता है. अफघानिस्तान में बलोची को पश्तो पे आधारित अरबी लिपि के एक रूप में लिखा जाता है.

वैयक्तिक औज़ार
नामस्थान

संस्करण
क्रियाएं
परिभ्रमण
योगदान
सहायता
उपकरण
मुद्रण/निर्यात