बया

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;"|बया
फ़िलिपिनस उपजाति का नर
फ़िलिपिनस उपजाति का नर
फ़िलिपिनस उपजाति की मादा
फ़िलिपिनस उपजाति की मादा
संरक्षण स्थिति
;" | वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: जन्तु
संघ: रज्जुकी
वर्ग: पक्षी
गण: पॅसरिफ़ॉर्मीस
कुल: प्लोसीडी
प्रजाति: प्लोसिअस
जाति: पी. फ़िलिपिनस
द्विपद नाम
प्लोसिअस फ़िलिपिनस
(लिनेअस,१७६६)
आवास क्षेत्र
आवास क्षेत्र
उपजाति

प्लोसिअस फ़िलिपिनस
प्लोसिअस बरमॅनिकस
प्लोसिअस ट्रॅवनकोरऍनसिस

बया एक छोटी बुनकर चिड़िया है जो अपना घोंसला घास के तिनके, लकड़ी या पत्तियों की पतली तीलियों से बुन कर बनाती है। यह लगभग पूरे दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में पाई जाती है। इनके झुण्ड प्रायः खुले मैदानों में, खेतों में तथा झाड़ियों में पाये जाते हैं। यह अपने आवास क्षेत्र में प्रायः सभी जगह मिलती है और वर्षाकाल में या भोजन की उपलब्धी को लेकर कभी-कभी छोटे प्रवास भी कर सकती है।
आबादी में कुछ भिन्नताओं के लिहाज़ से इसकी तीन उपजातियाँ मनोनीत हुई हैं— प्लोसिअस फ़िलिपिनस, जो लगभग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाती है, प्लोसिअस बरमॅनिकस, जो भारत के पूर्वी और उत्तर पूर्वी इलाकों में पाई जाती है तथा प्लोसिअस ट्रॅवनकोरऍनसिस, जो दक्षिण-पश्चिमी भारत में पाई जाती है और जिसकी पीठ थोड़ी ज़्यादा गहरे रंग की होती है।[2]

अभिलक्षण[संपादित करें]

यह एक छोटी चिड़िया है जो लगभग १५ से.मी. तक की होती है। जब प्रजनन काल न चल रहा हो, तो इसके नर और मादा समान दिखते हैं और मादा गौरैया की तरह दिखते हैं। गौरैया की तुलना में इनकी चोंच मोटी होती है और पूँछ थोड़ी छोटी होती है जो अंत में गोलाकार न होकर चौकोर होती है। इनके पीठ के पर गाढ़े भूरे-लाल होते हैं जिसमें स्लेटी रंग की धारियाँ होती हैं। पेट की तरफ़ इसके पर सफ़ेदी लिए हुए भूरे-लाल होते हैं। प्रजनन काल में नर का सिर और गर्दन गाढ़े पीले रंग के हो जाते हैं। नर की चोंच भी गाढ़े भूरे अथवा काले रंग की हो जाती है और पीठ पीली धारियाँ पड़ी गाढ़े भूरे रंग की हो जाती है और छाती पीली तथा उसके नीचे क्रीम का रंग हो जाता है।[3][4]

व्यवहार और पर्यावरण[संपादित करें]

बया के घोंसले
बया का झुण्ड

बया पक्षी-समूह में रहना पसन्द करती है और काफ़ी शोरगुल करती है। यह अपने घोंसले पानी के निकट बनाती है या फिर उन टहनियों में बनाती है जो पानी के ऊपर हों। अमूमन कांटेदार या ताड़ के वृक्षों में यह अपना घोंसला बनाना पसन्द करती है क्योंकि इसकी वजह से इसके बच्चों को परभक्षियों से सुरक्षा प्रदान होती है। यह अपने घोंसले बस्ती के रूप में बनाती हैं और प्रजनन काल में एक ही वृक्ष में या आस-पास के वृक्षों में कई घोंसले एक साथ देखने को मिलते हैं। इस व्यवहार का संबन्ध संख्या में सुरक्षा से है।

बया बीजों की तलाश में पक्षी-समूह में निकलती है और पौधों तथा ज़मीन से बीज चुगती है। पक्षी-समूह विभिन्न संरचनाओं में उड़ते हुए जटिल पैंतरे करते हैं। वह धान तथा अन्य अन्न के खेतों में जाकर चुगती हैं और कभी-कभी पकती हुई फ़सल को नुकसान भी पहुँचाती हैं, जिसकी वजह से यह किसान की दुश्मन बन जाती हैं।[5]

यह पानी के पास के सरकंडों में अपना डेरा जमाती है। यह खाने और घोंसला बनाने की सामग्री के लिए घास तथा फ़सलों, जैसे धान, पर निर्भर करती है। फ़सलों के बीज यह रोपण के समय और परिपक्व होने के समय, दोनों ही परिस्थितियों में चट कर जाती है और किसानों का क्रोध मोल लेती है।[6] इसके आहार में कुछ कीट, जैसे तितली भी होते हैं[7] और इनको छोटे मेढक[8] तथा सीप, घोंघा इत्यादि भी (खासकर अपने बच्चों को खिलाने के लिए) ले जाते देखा गया है।[9] इसके मौसमी प्रवास भोजन की उपलब्धता पर निर्भर करते हैं। इसका कलरव छोटी-छोटी "चीं-चीं" की ध्वनि होता है। जब प्रजनन काल न हो तो यह मंद आवाज़ में ध्वनि करते हैं।[10]

बया पक्षियों का कलरव

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. BirdLife International (2012). "Ploceus philippinus". IUCN Red List of Threatened Species. Version 2012.1. International Union for Conservation of Nature. http://www.iucnredlist.org/apps/redlist/details/106008545. अभिगमन तिथि: 05 October 2012. 
  2. Rasmussen, P.C. & Anderton, J.C. (2005). The Birds of South Asia. The Ripley Guide. Volume 2. Smithsonian Edition and Lynx Edicions. प॰ 579. 
  3. Salim, Ali (2002). The Book of Indian Birds, Third Edition. Oxford University Press. pp. 64,283. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-19-566523-6. 
  4. Compilers: Stuart Butchart, Jonathan Ekstrom (2008). "Baya Weaver-Fact Sheet". Evaluators: Jeremy Bird, Stuart Butchart. BirdLife International . http://www.birdlife.org/datazone/species/index.html?action=SpcHTMDetails.asp&sid=8545&m=0. अभिगमन तिथि: ०५/१०/२०१२. 
  5. Sengupta,S (1974). "The Common Baya (Ploceus philippinus) - a serious pest of agriculture". Current Science 43 (4): 24–125. http://www.ias.ac.in/j_archive/currsci/43/vol43contents.html. 
  6. Ali, Mir Hamid; Singh, T.G. Manmohan; Banu, Aziz; Rao, M. Anand; Janak, A.T. Sainath (1978). "Observations on the food and feeding habits of Baya Weaver Ploceus philippinus". J. Bombay Nat. Hist. Soc. 75: 1198–1204. 
  7. Ambedkar, V. C. (1972). "The Baya [Ploceus philippinus (Linn.)] feeding nestlings with butterflies". J. Bombay Nat. Hist. Soc. 69 (3): 653–654. 
  8. George, N.J. (1973). "Baya (Ploceus philippinus) feeding on frogs". J. Bombay Nat. Hist. Soc. (2): 381–382. 
  9. Mukherjee, A.K.; Saha, B.C. (1974). "Study on the stomach contents of Common Baya, Ploceus philippinus (Linnaeus)". J. Bombay Nat. Hist. Soc. 71 (2): 308. 
  10. Ali S & S D Ripley (1999). Handbook of the birds of India and Pakistan. 10 (2 ed.). Oxford University Press. pp. 92–97. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-19-562063-1.