फ़सल

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भारत के पंजाब राज्य के एक ग्रामीण घर में सूखती फ़सल

फ़सल या फ़स्ल किसी समय-चक्र के अनुसार वनस्पतियों या वृक्षों पर मानवों व पालतू पशुओं के उपभोग के लिए उगाकर काटी ता तोड़ी जाने वाली पैदावार को कहते हैं।[1] मसलन गेंहू की फ़सल तब तैयार होती है जब उसके कण पककर पीले से हो जाएँ और उस समय किसी खेत में उग रहे समस्त गेंहू के पौधों को काट लिया जाता है और उनके कणों को अलग कर दिया जाता है। आम की फ़सल में किसी बाग़ के पेड़ों पर आम पकने लगते हैं और, बिना पेड़ों को नुक्सान पहुँचाए, फलों को तोड़कर एकत्रित किया जाता है।

जब से कृषि का आविष्कार हुआ है बहुत से मानवों के जीवनक्रम में फ़सलों का बड़ा महत्व रहा है। उदाहरण के लिए उत्तर भारत, पाकिस्ताननेपाल में रबी की फ़सल और ख़रीफ़ की फ़सल दो बड़ी घटनाएँ हैं जो बड़ी हद तक इन क्षेत्रों के ग्रामीण जीवन को निर्धारित करती हैं। इसी तरह अन्य जगहों के स्थानीय मौसम, धरती, वनस्पति व जल पर आधारित फ़सलें वहाँ के जीवन-क्रमों पर गहरा प्रभाव रखती हैं।[2]

इन्हें भी देखें [संपादित करें]

सन्दर्भ [संपादित करें]

  1. Cases in the Supreme Court of Pennsylvania, pp. 373, Lawyers' Co-operative Publishing Company, 1904, ... In the latest dictionary, published in 1880, a 'crop' is defined as 'the top end or highest part of anything, especially of a plant; also that which is cropped, cut, or gathered from a single field, or of a single kind of grain or fruit, or in a single season; especally the valuable product of what is planted in the earth; fruit; harvest' ...
  2. Bread, Beer and the Seeds of Change: Agriculture's Impact on World History, Thomas R. Sinclair, Carol Janas Sinclair, pp. 2, CABI, 2010, ISBN 978-1-84593-705-8, ... From the early days of society, the seasonal cycles of crop growth determined the rhythm of life with rituals and ceremonies at sowing, harvest, and during the dark times of midwinter when food became scarce ...