पेंटेड फ़्रैंकोलिन

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पेंटेड फ़्रैंकोलिन
Painted Francolin CME1.jpg
संरक्षण स्थिति
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: जंतु
संघ: रज्जुकी
वर्ग: पक्षी
गण: गॉलिफ़ॉर्मिस
कुल: फ़ॅसिअनिडी
उपकुल: पर्डिसिनी
प्रजाति: फ़्रैंकोलिनस
जाति: ऍफ़. पिक्टस
द्विपद नाम
फ़्रैंकोलिनस पिक्टस
(जार्डाइन तथा सॅल्बी, १८२८)
आवास का क्षेत्र
आवास का क्षेत्र
पर्याय

पर्डिक्स पिक्टा
पर्डिक्स हॅपबर्नी

पेंटेड फ़्रैंकोलिन (मराठी:काला तीतर[2]) (Painted Francolin) (Francolinus pictus) फ़्रैंकोलिन जाति का एक पक्षी है जो मध्य और दक्षिणी भारत के घास के इलाकों में और दक्षिण-पूर्व श्रीलंका के निचले इलाकों में पाया जाता है।[3] क्योंकि यह पक्षी हिन्दी भाषी प्रदेशों में नहीं पाया जाता है इसलिए इसका हिन्दी नाम भी नहीं है। लेकिन पश्चिमी तथा दक्षिणी भारतीय भाषाओं और सिंहला भाषा में इस पक्षी का नाम है। प्रजनन काल में यह पक्षी अपनी तेज़ आवाज़ के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है। यह काले तीतर की मादा से थोड़ा भिन्न दिखता है क्योंकि इसके गर्दन के किनारों में लाल रंग नहीं होता है। यह एक मध्यम आकार का पक्षी है जिसकी लंबाई तक़रीबन ३० से.मी. होती है और वज़न लगभग ३१० से ३७० ग्राम होता है।[3] कई क्षेत्रों में यह अपना इलाका काले तीतर के साथ सांझा करता है और ऐसा मानना है कि कहीं-कहीं यह आपस में प्रजनन भी करते हैं।[4]

पेंटेड फ़्रैंकोलिन का कलरव


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. BirdLife International (2012). "Francolinus pictus". IUCN Red List of Threatened Species. Version 2012.2. International Union for Conservation of Nature. http://www.iucnredlist.org/apps/redlist/details/100600147. अभिगमन तिथि: १४ मई २०१३. 
  2. Hume, A.O.; Marshall, C.H.T. (1880). Game Birds of India, Burmah and Ceylon. II. Calcutta: A.O. Hume and C.H.T. Marshall. प॰ १९. 
  3. Jerdon, T.C. (1864). The Birds of India. III. Calcutta: George Wyman and Co.. pp. ५६१-५६३. The Painted Partridge may be said to take the place of the Black in Central and part of Southern India. It is found throughout Bundelkund and the Saugor and Nerbudda territories, and thence south through Nagpore and the Deccan, to about N. L. 15°, gradually becoming more scarce southwards. I have heard of its occasional occurrence near Bangalore still further south, but where the land is higher and the climate cooler. West, it extends into Candeish, and perhaps Guzerat, but is not known on the Malabar Coast; and eastwards, it is found throughout Chota Nagpore and adjacent lands to the more open parts of the Northern Circars, as far as Cuttack, but far more rare there than in the west of the Peninsula. I have found it most abundant in the Deccan near Jalna, and at Mhow ; less so in Saugor, Nagpore and Hyderabad.
  4. Hume, A.O.; Marshall, C.H.T. (1880). Game Birds of India, Burmah and Ceylon. II. Calcutta: A.O. Hume and C.H.T. Marshall. प॰ २५.