निमोनिया

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निमोनिया
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वर्गीकरण एवं बाह्य साधन
आईसीडी-१० J12., J13., J14., J15., J16., J17., J18., P23.
आईसीडी- 480-486, 770.0
डिज़ीज़-डीबी 10166
ईमेडिसिन topic list
एम.ईएसएच D011014

निमोनिया फेफड़ों में असाधारण तौर पर सूजन आने के कारण होता है। इसमें फेफड़ों में पानी भी भर जाता है। आमतौर पर निमोनिया कई कारणों से होता है जिनमें प्रमुख हैं बैक्टीरिया, वायरस, फंगी या अन्य कुछ परजीवी। इनके अलावा कुछ रसायनों और फेफड़ों पर लगी चोट के कारण भी निमोनिया होता है। आमतौर पर निमोनिया के दौरान इससे ग्रसित व्यक्ति को खांसी, सीने में दर्द, बुखार और सांस लेने में दिक्कत होती है। इसलिए इसका उपचार निमोनिया के लक्षणों के अनुसार होता है। बैक्टीरिया से होने वाले निमोनिया के उपचार के लिए एंटीबायटिक्स का इस्तेमाल होता है। वैसे तो निमोनिया एक साधारण बीमारी है जो सभी आयु वर्ग के लोगों को हो सकती है। गंभीर रूप से बीमार और वृद्धों में भी निमोनिया के कारण दुनिया भर में अनेक मौतें होती हैं। साथ ही, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की भी इससे दुनिया भर में कईमौतें होती हैं। कुछ खास किस्म से बचाव के इंजेक्शन भी मौजूद हैं। शेष, निमोनिया के प्रकार, इसका उचित उपचार, इसकी जटिलताएं और बीमार व्यक्ति की हालत के हिसाब से इसका अनुमान लगाया जाता है। निमोनिया के उपरोक्त प्रकारों के अतिरिक्त भी कई अन्य प्रकार होते हैं। निमोनिया में अक्सर रोगी खून भी थूकते हैं। इसके अलावा चमड़ी का नीला पड़ना, मतली, उल्टी, व्यवहार परिवर्तन, थकान, भूख न लगना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द भी होता है। बैक्टीरिया जनित निमोनिया दो से चार सप्ताह में ठीक हो सकता है। इसके विपरीत वायरल जनित निमोनिया ठीक होने में अधिक समय लेता है। मूलत: निमोनिया का पता इस बात से अधिक लगाया जाता है कि पहली बार बीमारी का पता चलने के समय रोगी कितना बीमार था।

अनुक्रम

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[संपादित करें] संदर्भ

[संपादित करें] बाह्य लिंक

  1. REDIRECT Template:Common cold

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