दाउद

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दाउद (ईब्रानी: דוד (दविद) “महबूब”, (१०४०-९६० ई.पू.) ) ईब्रानी पवित्र ग्रन्थों के अनुसार, इज़राइल का राजा था। साऊल के उत्तराधिकारी दाऊद इज़राइल के संवौधिक प्रसिद्ध राजा हैं। तत्कालीन प्रचलित बहुविवाह दाऊद की पारिवारिक झंझटों का मुख्य कारण सिद्ध हुआ। वह ईश्वर के सच्चे भक्त थे और उन्होंने दीनतापूर्वक अपने पापों को स्वीकार कर लिया, उनके लिखे भजन आज भी ईसाई पूजा में प्रयुक्त हैं। महान् योद्धा, प्रशासक तथा भवन निर्माता के रूप में यह न्यायत: लब्धप्रतिष्ठ हैं। ईसा मसीह 'दाऊद का पुत्र' कहलाते हैं क्योंकि वह दाऊद के राजवंश में उत्पन्न हुए थे।

हालाँकि दाउद के पास काफ़ी दोष भी थे, पवित्र किताबें उसका ख़ूबसूरत चित्र खींचतीं हैं। वह भी वादक और कवि था। पुराण कहता है कि दाउद ने बहुत पवित्र भजन रचे।

परिचय[संपादित करें]

साल 1010-1003 (मसीहे से पहले) दाउद यहूदा की बादशाहत पर मालिक था, और साल 1003-970 (म.प) वह सब इज़राइल की संयुक्त बादशाहत पर मालिक था। पवित्र किताबें जिन में दाउद का नाम लिखा है, वे: शमूएल की दो किताबें, राजों की पहली किताब और इतिवृतों की पहली किताब।

यहूदियों के लिए, दाउद की ज़िन्दगी बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन ईसाई धर्म के ख़याल से और मुसलमान धर्म के ख़याल से भी दाउद बड़ा राजा था और उसकी कहानी ईसाइयों के पास और मुसलमानों के पास एक प्रतीक होती है।

“दाउद के तारे” का नाम असल में “दाउद की फरी” (ईब्रानी ज़बान में: מגן דוד [मगन-दविद]। वह आज के इज़राइल के राष्ट्रीय चिह्नक का चिह्न होती है।

हिंदी और उर्दू में दाउद का नाम “दाउद” है। “दैविद” जो अंग्रेज़ी नाम है, भारतीय ज़बानों में ग़लत भी है। ईब्रानी ज़बान דוד [दविद] से नाम अरबी में دود [दवद] बदला था, और अरबी ज़बान से नाम फ़ारसी में [दऊद] बन गया। फिर उर्दू और हिंदी में “दाउद” का उच्चारण पड़ा।

मग़रिब में ईब्रानी नाम “दविद” रोमानी (रोम की ज़बान) में David [दावीद] बन गया और जैसा रोम की ज़बान में था ऐसा फ़्रांसीसी, इस्पानी, इताली और पुरतक़ाली ज़बानों में था। बस अंग्रेज़ी उच्चारण ने रोमानी ज़बान से नाम बदला और [डेविड] पड़ा।