ईसाई धर्म
ईसाई धर्म या मसीही धर्म अनुयाइयों की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक सांप्रदाय है । ये ईसा मसीह के उपदेशों पर आधारित है । इसका धर्मग्रन्थ बाइबिल है ।
अनुक्रम |
[संपादित करें] ईश्वर
ईसाई एकेश्वरवादी हैं, लेकिन वे ईश्वर को त्रीएक के रूप में समझते हैं -- परमपिता परमेश्वर, उनके पुत्र ईसा मसीह (यीशु मसीह) और पवित्र आत्मा ।
[संपादित करें] परमपिता
परमपिता इस सृष्टि के रचयिता हैं, और इसके शासक भी ।
[संपादित करें] ईसा मसीह
ईसा मसीह (यीशु) एक यहूदी थे जो इस्राइल इजराइल के गाँव बेत्लहम में जन्मे थे (४ ईसापूर्व)। ईसाई मानते हैं की उनकी माता मारिया (मरियम) कुवांरी(वर्जिन) थीं । ईसा उनके गर्भ में परमपिता परमेश्वर की कृपा से चमत्कारिक रूप से आये थे । ईसा के बारे में यहूदी नबियों ने भविष्यवाणी की थी कि एक मसीहा (अर्थात "राजा" या तारणहार) जन्म लेगा । कुछ लोग ये मानते हैं कि ईसा भारत भी आये थे । बाद में ईसा ने इजराइल में यहूदियों के बीच प्रेम का संदेश सुनाया और कहा कि वो ही ईश्वर के पुत्र हैं । इन बातों पर पुराणपंथी यहूदी धर्मगुरु भड़क उठे और उनके कहने पर इजराइल के रोमन राज्यपाल ने ईसा को क्रूस पर चढ़ कर मरने का प्राणदण्ड दे दिया । ईसाई मानते हैं कि इसके तीन दिन बाद ईसा का पुनरुत्थान हुआ या ईसा पुनर्जीवित हो गये । ईसा के उपदेश बाइबिल के नये नियम में उनके शिष्यों द्वारा रेखांकित किये गये हैं ।
[संपादित करें] पवित्र आत्मा
पवित्र आत्मा त्रिएक परमेश्वर के तीसरे व्यक्तित्व हैं जिनके प्रभाव में व्यक्ति अपने अन्दर ईश्वर का अहसास करता है। ये ईसा के चर्च एवं अनुयाईयों को निर्देशित करते हैं ।
[संपादित करें] बाइबिल
ईसाई धर्मग्रन्थ बाइबिल में दो भाग हैं । पहला भाग (पुराना नियम) और यहूदियों का धर्मग्रन्थ एक ही हैं । दूसरा भाग (नया नियम) ईसा के उपदेश, चमत्कार और उनके शिष्यों के काम से रिश्ता रखता है ।
[संपादित करें] सम्प्रदाय
ईसाइयों के मुख्य सम्प्रदाय हैं :
[संपादित करें] रोमन कैथोलिक
रोमन कैथोलिक रोम के पोप को सर्वोच्च धर्मगुरु मानते हैं ।
[संपादित करें] प्रोटेस्टेंट
प्रोटेस्टेंट किसी पोप को नहीं मानते है और इसके बजाय बाइबिल में पूरी श्रद्धा रखते हैं । मध्य युग मे जनता के बाइबिल पढने के लिए नकल करना मना था। जिससे लोगो को ख्रिस्ती धर्म का उचित ज्ञान नही था। कुछ बिशप और पाद्रियोने इसे सच्चे ख्रिस्ती धर्म के अनुसार नही समझा और बाइबिल का अपनी अपनी भाषाओ मे भाषान्तर करने लगे, जिसे पोप का विरोध था । उन बिशप और पाद्रियोने पोप से अलग होके एक नया सम्प्रदाय स्थापीत किया जिसे प्रोटेस्टेंट केह्ते है (जिन्होने पोप् का विरोध प्रोटेस्ट किया)।
[संपादित करें] कोपिमिईस्म
कोपिमिईस्म विद्या नकल कर्ने का अधिकार या लाइसेंस को विश्वास नहि कर्ता। इस्का शुरुआत हुआ है बाइबल का एक वाक्यांश से:
नकल करो मुझे, मै जैसे क्राइस्ट को नकल करता हु—1 Corinthians 11:1
[संपादित करें] ऑर्थोडॉक्स
ऑर्थोडॉक्स रोम के पोप को नहीं मानते, पर अपने-अपने राष्ट्रीय धर्मसंघ के पैट्रिआर्क को मानते हैं और परम्परावादी होते हैं ।
[संपादित करें] संदर्भ