दशमलव पद्धति

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दशमलव पद्धति या दाशमिक संख्या पद्धति या दशाधारी संख्या पद्धति (decimal system, "base ten" or "denary") वह संख्या पद्धति है जिसमें गिनती/गणना के लिये कुल दस संख्याओं का सहारा लिया जाता है। यह मानव द्वारा सर्वाधिक प्रयुक्त संख्यापद्धति है।

अनुक्रम

[संपादित करें] परिचय

अंकों को दस चिन्हों के माध्यम से व्यक्त करने की प्रथा का प्रादुर्भाव सर्वप्रथम भारत में ही हुआ था। संस्कृत साहित्य में अंकगणित को श्रेष्ठतम विज्ञान माना गया है। लगभग पाँचवीं शताब्दी में भारत में आर्यभट्ट द्वारा अंक संज्ञाओं का आविष्कार हुआ था। दशमिक प्रणाली द्वारा विभिन्न इकाइयों के मानों को निर्धारित करने में दस का प्रयोग किया जाता है, अर्थात् इसके अंतर्गत प्रत्येक इकाई अपने से छोटी इकाई की दस गुनी बड़ी होती है और अपने से ठीक बड़ी इकाई की दशमांश छोटी होती है। इस प्रकार एक (इकाई), दस (दहाई), शत (सैकड़ा), सहस्त्र (हजार) इत्यादि संख्याओं को मापने के उपयोग में लाया जाने लगा। गणित विषयक विभिन्न प्रश्न हल करने के लिए भारतीय विद्वानों ने वर्गमूल, धनमूल और अज्ञात संख्याओं को मालूम करने के ढंग निकाले। संख्याओं के छोटे भागों को व्यक्त करने के लिए दशमलव प्रणाली प्रयोग में आई।

वस्तुओं के मूल्यांकन में इस प्रणाली का प्रयोग सर्वप्रथम फ्रांस की क्रांति के प्रारंभिक दिनों में हुआ था और क्रांति के कुछ ही वर्षों बाद देश की समस्त माप तौल दशमिक प्रणाली द्वारा होने लगी थी। इस प्रणाली की सुगमता से प्रभावित होकर कई अन्य देशों ने भी इसे अपना लिया। बेलजियम ने सन् 1833 और स्विट्ज़रलैंड ने सन् 1891 में इस प्रणाली को अपनाया। जर्मनी, हॉलैंड, रूस और अमरीका पर भी इस प्रणाली का बहुत प्रभाव पड़ा और इन देशों ने भी शीघ्र ही इस प्रकार की प्रणाली अपना ली। इस प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदान करने के लिए 1870 ई. में फ्रांसीसी सरकार द्वारा एक सम्मेलन बुलाया गया, जिसमें 30 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और इस प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने का सुझाव स्वीकार किया। धीरे धीरे संसार के लगभग भाग में यह प्रणाली प्रयुक्त होने लगी। इस प्रणाली का सबसे बड़ा गुण इसी सुगमता है। इसका मूल अंक 10 है। प्रत्येक माप या तौल में 10 या इसके दसवें भाग का प्रयोग होता है।

भारत में माप और तौल के जगह जगह कई प्रकार के ढंग थे। प्रत्येक प्रांत और मंडी में अलग अलग ढंगों से चीजें मापी और तौली जाती थीं। अनुमान है कि देश में लगभग 150 से भी अधिक प्रकार के बाट और माप के विभिन्न ढंग प्रचलित थे। इन कठिनाइयों से वस्तुओं का आदानप्रदान तथा उनका सही भाव मालूम करना बड़ा कठिन हो जाता था। माप तौल की भिन्नता से वस्तुओं के घटते बढ़ते भावों का ठीक अनुमान भी नहीं हो पाता। इससे व्यापार की बहुत क्षति हाती है और क्रेता एवं विक्रेता दोनों को शंका रहती है। माप तौल की विधियों में एरूपता लाने का ढंग भारत में कई बार सोचा गया, परंतु सितंबर, 1956 ई में ही बाट और माप प्रतिमान अधिनियम पास हो सका। 28 दिसंबर, 1956 ई. को उसपर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त होने पर केंद्रीय सरकार को दशमिक प्रणाली के बाट और माप चलाने का अधिकार प्राप्त हुआ।

इस प्रणाली को अपनाने से सारे देश में एक ही प्रकार की माप और तौल के ढंग लागू करने का अधिकार सरकार को प्राप्त हो गया। इससे व्यापार और वस्तुओं के यातायात में बड़ी सहायता मिली। दशमिक प्रणाली की सुगमता से माप और तौल के लेन देन का हिसाब भी आसान हो गया। इस प्रणाली को देश में पूर्ण रूप से प्रचलित करने के लिए 10 वर्षों की अवधि निर्धारित की गई है। इस अवधि तक नई और पुरानी दोनों पद्धतियों से काम होता रहेगा और शनै: शनै: पुरानी पद्धति के स्थान पर नई पद्धति का प्रयोग बढ़ता जाएगा। नई प्रणाली के ढंग पर लेने देन का अभ्यास भी धीरे धीरे ही होगा और सुदूर गाँवों तक इसका प्रचार करने में भी समय लगेगा।

इस प्रणाली के अनुसार लंबाई मापने की इकाई मीटर है, जो एक गज से लगभग तीन इंच बड़ा होता है। इसी प्रकार पिंडभार की इकाई किलोग्राम है और द्रव पदार्थ के पैमाने की इकाई लिटर है। (अवधिबिहारी मिश्र)

[संपादित करें] दाशमिक संख्या गिनती

SI उपसर्ग
1000n 10n उपसर्ग चिन्ह [1] से लागू लघु पैमाना दीर्घ पैमाना दशमलव रूप SI writing style में
10008 1024 योट्टा- Y 1991 सैप्टिलियन Quadrillion 1 000 000 000 000 000 000 000 000
10007 1021 जीटा Z 1991 सैक्स्टिलियन ट्रिलियार्ड (हजार ट्रिलियन) 1 000 000 000 000 000 000 000
10006 1018 एक्जा- E 1975 क्विंटिलियन ट्रिलियन 1 000 000 000 000 000 000
10005 1015 पेटा- P 1975 क्वांड्रिलियन Billiard (हजार बिलियन) 1 000 000 000 000 000
10004 1012 टेरा- T 1960 ट्रिलियन बिलियन 1 000 000 000 000
10003 109 गीगा- G 1960 बिलियन मिलियार्ड (हजार मिलियन) 1 000 000 000
10002 106 मैगा- M 1960 मिलियन 1 000 000
10001 103 किलो- k 1795 हजार 1 000
10002/3 102 हैक्टो- h 1795 सौ 100
10001/3 101 डैका- da 1795 दस 10
10000 100 (none) (none) NA एक 1
1000−1/3 10−1 डेसी- d 1795 Tenth 0.1
1000−2/3 10−2 सैंटी- c 1795 Hundredth 0.01
1000−1 10−3 मिलि- m 1795 Thousandth 0.001
1000−2 10−6 माइक्रो- µ 1960[2] Millionth 0.000 001
1000−3 10−9 नैनो- n 1960 Billionth Milliardth 0.000 000 001
1000−4 10−12 पीको- p 1960 Trillionth Billionth 0.000 000 000 001
1000−5 10−15 फैम्टो- f 1964 Quadrillionth Billiardth 0.000 000 000 000 001
1000−6 10−18 एट्टो- a 1964 Quintillionth Trillionth 0.000 000 000 000 000 001
1000−7 10−21 जैप्टो- z 1991 Sextillionth Trilliardth 0.000 000 000 000 000 000 001
1000−8 10−24 योक्टो- y 1991 Septillionth Quadrillionth 0.000 000 000 000 000 000 000 001
Notes:
1. 1795 की तिथियों से उपरोक्त उपसर्ग प्रयोग में लाए जारहे हैं, जबसे मीट्रिक प्रणाली प्रयोग में आई थी । अन्य तिथियाँ आवश्यक रूप से प्रथम प्रयोग की नहीं रहीं हैं, बलकि CGPM के समझौते द्वारा मान्यता की तिथि हैं जो कि 1889 में हुआ था ।
2. 2. "मैक्रॉन" शब्द को CGPM नें १९४८ में अनुमोदित किया, पर १९६७-६८ में उसे रद्द कर दिया।

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[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ

वैयक्तिक औज़ार
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