मापन
किसी भौतिक राशि का परिमाण संख्याओं में व्यक्त करने को मापन कहा जाता है। मापन मूलतः तुलना करने की एक प्रक्रिया है। इसमें किसी भौतिक राशि की मात्रा की तुलना एक पूर्वनिर्धारित मात्रा से की जाती है। इस पूर्वनिर्धारित मात्रा को उस राशि-विशेष के लिये मानक कहा जाता है। उदाहरण के लिये जब हम कहते हैं कि किसी पेड की उँचाई १० मीटर है तो हम उस पेड की उचाई की तुलना एक मीटर से कर रहे होते हैं। यहाँ मीटर एक मानक मात्रक है जो भौतिक राशि लम्बाई या दूरी के लिये प्रयुक्त होता है। इसी प्रकार समय का मात्रक सेकेण्ड, द्रव्यमान का मात्रक किलोग्राम आदि हैं।
[संपादित करें] मापन का महत्व
लॉर्ड केल्विन का निम्नलिखित कथन मापन के महत्व को प्रतिपादित करता है-
- " When you can measure what you are speaking about and express it in numbers you know something about it; but when you cannot express it in numbers, your knowledge is of a meagre and unsatisfactory kind."
-- ( Lord Kelvin 1883 )
- हिन्दी अर्थ -
- " जिस चीज के बारे में आप बात कर रहे हैं, यदि आप उसे माप सकते हैं और उसे संख्याओं में व्यक्त कर सकते हैं, तो आप उसके बारे में कुछ जानते हैं ; लेकिन यदि आप उसे संख्याओं में अभिव्यक्त नहीं कर सकते तो आपका ज्ञान तुच्छ और असंतोषजनक है। "
-- (लॉर्ड केल्विन, १८८३ में)
- जिसे मापा नहीं जा सकता उसे संख्याओं में व्यक्त नहीं किया जा सकता। बिना संख्यात्मक मान के विज्ञान या प्रौद्योगिकी नहीं हो सकती।
- यदि किसी भौतिक राशि का नियन्त्रण करना है तो उसे मापे बिना सम्भव नही है। बिना शुद्धतापूर्वक मापे, किसी राशि का शुद्धतापूर्वक नियन्त्रण भी नहीं हो सकता।
- विभिन्न प्रक्रमों का उपयोग करके चीजों का उत्पादन किया जाता है। इन प्रक्रियाओं से प्राप्त उत्पादों की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि उस प्रक्रिया में निहित भौतिक राशियों को कितनी शुद्धता से नियंत्रित किया गया था।
- प्रकृति के रहस्यों को जानने के लिये भी मापन जरूरी है। मापन करने से ही पता चलता है कि विभिन्न राशियों में क्या सम्बन्ध है। इसी से नये नियम और सिद्धान्त दिये जाते हैं।
- पदार्थों की उपयोगिता उनके गुणधर्मों पर आधारित है। इसके लिये विभिन्न पदार्थों के गुणधर्म का विस्तार से ज्ञान होना जरूरी है। इसके लिये मापन जरूरी है।
- मापन का उपयोग इंजीनियरी, भौतिकी एवं अन्य विज्ञानों के अलावा मनोविज्ञान, स्वास्थ्य आदि में भी होने लगा है।
[संपादित करें] माप और तौल (Measures and Weights)
प्राकृतिक विषयों का अध्ययन करते समय उनके बारे में सही ज्ञान प्राप्त करने के लिये यह आवश्यक है कि हम प्रकृति के कुछ गुणों की माप करें। साधारणतया यह पाया गया है कि माप में मुख्य रूप से तीन राशियाँ, लंबाई, भार तथा समय, उपलब्ध होती हैं। सैद्धांतिक रूप से प्रत्येक माप में उपर्युक्त राशियाँ ही आती हैं। इन राशियों में से किसी को भी मापने के लिये कोई निश्चित तथा सुविधाजनक परिमाण को मानक मान लिया जाता है। इसमें पूरी मात्रा माप ली जाती है। इसको हम उस विशेष राशि की इकाई, या एकक, अथवा मात्रक मानते हैं। उदाहरणस्वरूप, अर्थ को हम रूपए में गिनते हैं तथा तौल को किलोग्राम में। विभिन्न प्रकार की इकाइयाँ उपयोग में लाई जाती हैं।
विज्ञान में लंबाई, भार और समय को मूल इकाई की संज्ञा दी गई है, क्योंकि ये तीनों राशियाँ एक दूसरे पर निर्भर नहीं करती हैं। अन्य सभी प्रकार की इकाइयों का आधार मूल इकाइयाँ ही होती हैं। इन अन्य इकाइयों को व्यत्पन्न इकाइयों की संज्ञा दी गई है। इस प्रकार क्षेत्रफल का इकाई एक ऐसे वर्ग का क्षेत्रफल है जिसकी लंबाई एक हो तथा चौड़ाई भी एक हो। आयतन की इकाई एक ऐसे धन का आयतन माना गया है जिसकी प्रत्येक भुजा की लंबाई एक हो। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि क्षेत्रफल की इकाई तथा आयतन की इकाई लंबाई की इकाई से ही उत्पन्न होती हैं। गति की इकाई परिभाषा के अनुसार, दूरी को समय से भाग देने से प्राप्त होती है, और चूँकि दूरी लंबाई में व्यक्त की जाती है, इसलिये गति की इकाई मूल इकाइयों पर आधृत है व्युत्पन्न इकाइयों का मूल इकाइयों से एक साधारण संबंध भी पाया गया है। प्राय: यह पाया जाता है कि व्युत्पन्न इकाइयाँ या तो बहुत बड़ी होती हैं अथवा बहुत छोटी। इस अवस्था में सुविधा के दृष्टिकोण से इनके कुछ गुणित, या उपगुणित, उपयोग में लाए जाते हैं। इन नई इकाइयों को व्यावहारिक इकाई के नाम से पुकारा जाता है।
[संपादित करें] इकाइयों की पद्धतियाँ
वैज्ञानिक जगत् में माप के कार्यों के लिये आप तौर पर दो प्रकार की इकाइयों की पद्धति उपयोग में लाई जाती है :
1. ब्रिटिश पद्धति तथा
2. फ्रेंच पद्धति (या मीटरी पद्धति)।
[संपादित करें] ब्रिटिश पद्धति
इसे 'फुट पाउंड सेकंड पद्धति' (F. P. S. System) भी कहा जाता है। इस पद्धति में लंबाई को फुट में, भार को पाउंड में तथा समय को सेकंड में व्यक्त किया जाता है। यह प्रणाली खास तौर पर उन देशों में प्रचलित है, जो कभी ब्रिटिश सम्राज्य के अंग रह चुके थे। इसे विशेष रूप से ब्रिटिश इंजीनियर, या ब्रिटेन में प्रशिक्षित इंजीनियर, तथा ऋतु-विज्ञान-विशेषज्ञ उपयोग में लाते हैं; लेकिन इसका स्थान मीटरी प्रणाली लेती जा रही है।
[संपादित करें] फ्रेंच पद्धति
इसे मीटरी पद्धति, अथवा 'सेंटीमीटर ग्राम सेकंड पद्धति' (C. G. S. System) भी कहते हैं। इस पद्धति को संसार भर में वैज्ञानिक कार्यों में उपयोग में लाया जाता है। इसमें लंबाई को सेंटीमीटर में, भार का ग्राम में तथा समय को एक सेकंड में माप जाता है।
मीटरी पद्धति ही परिवर्तित परिवर्धित करके मीटर-किलोग्राम-सेकेण्ड पद्धति बनी जो पुनः परिवर्धित होकर अन्तरराष्ट्रीय इकाई प्रणाली बनी।
[संपादित करें] लंबाई की इकाइयाँ
मीटरी प्रणाली लंबाई की मानक इकाई को मीटर कहते हैं। प्रारंभ में जनतंत्रीय फ्रेंच कानून के अनुसार इसे उत्तरी ध्रुव से विषुवत् रेखा तक पैरिस से गुजरती हुई याम्योत्तर (meridian) की सीध में मापी गई दूरी के 1/107 वें हिस्सें के बराबर माना गया था। लेकिन आजकल जो मानक माना गया है वह पैरिस के निकट सेव्र (Severes) में रखे प्लैटिनम इरीडियम मिश्रधातु के एक डंडे के सिरों पर बने दो चिह्नों के बीच की दूरी है, जब डंडा शून्य डिग्री सेंटीग्रेड पर होता है। इस मानक मीटर कहा जाता है।
- लंबाई की मीटरी मापें
10 मिलीमीटर = 1 सेंटीमीटर (सेंमी0)
10 सेंटीमीटर = 1 डेसिमीटर (डेसिमी0)
10 डेसिमीटर = 1 मीटर (मी0)
10 मीटर = 1 डेकामीटर (डेकामी0)
10 डेकामीटर = 1 हेक्टोमीटर (हेमी0)
10 हेक्टोमीटर = 1 किलोमीटर (किमी0)
- लंबाई की ब्रिटिश मापें
12 लाइन = 1 इंच
12 इंच = 1 फुट
3 फुट = 1 गज
220 गज = 1 फर्लांग
8 फर्लांग या 1,760 गज = 1 मील
6 फुट = 1 फैदम
5 1/2 गज = 1 पोल
4 पोल = 1 चेन
10 चेन = 1 फर्लांग
3 मील = 1 लीग
1.15 मील = 1 समुद्री या भौगोलिक मील।
इस सारणी से विदित होता है कि 1 मिलीमीटर = 0.1 सेंटीमीटर = 0.01 डेसिमीटर = 0.001 मीटर। अतएव मीटरी प्रणाली में इकाइयों को केवल दशमलव के स्थानांतरण करने से ही बदला जा सकता है, जो अत्यंत सुविधाजनक है। इस प्रकार यह स्पष्ट है मीटरी प्रणाली अत्यंत सुविधाजनक पद्धति है।
खगोल विज्ञान (astronomy) में को दूरी मापने के उपयोग में आनेवाली इकाई को प्रकाशवर्ष की संज्ञा दी गई है। प्रकाश एक वर्ष में जितनी दूरी दूरी तय करता है उसी को खगोल विज्ञान में सुविधा के हेतु दूरी की इकाई माना गया है। अत: 1 प्रकाशवर्ष = 9.45 x 10^15 मीटर। ब्रिटिश प्रणाली, अर्थात फुट पाउंड सेकंड पद्धति में, लंबाई की मानक इकाई ब्रिटिश राजकीय गज है। यह लंदन के राजकोष कार्यालय में रखे 62 डिग्री फारेनहाईट ताप पर काँस्य के डंडे पर स्थित स्वर्ण-डाटों पर बनी हुई रेखाओं के बीच की दूरी है।
लंबाई की सब मापों की तुलना से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि सब पद्धतियों में मीटरी प्रणाली सबसे अधिक सुविधाजनक तथा वैज्ञानिक है। भारत सरकार ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए, सारे देश में मीटरी प्रणाली के उपयोग के लिये कानून बना दिया है। दोनो पद्धतियों में लंबाई की इकाइयों में ये संबंध हैं :
- 1 इंच = 254. सेंटीमीटर;
- 1 मीटर = 39.37 इंच;
- 1 किलोमीटर = 0.621 मील।
लंबाई को मापने के लिये लकड़ी या धातु की बनी हुई, पैमानों वाली पटरियाँ, या अन्य वस्तु के बने फीते, काम में लाए जाते हैं। इनके किनारे या तो सेंटीमीटर तथा मिलीमीटर में खुदे रहते हैं, अथवा इंच तथा उसके दसवें, आठवें या सोलहवें अंशों में। लंबी दूरियों को, या वक्र रेखाओं में लंबी दूरियों का, मापने के लिये मापक चेन, विशेषकर जमीन के सर्वेक्षण में, उपयोग में लाई जाती है।
जब पैमानों को लंबाई की सीध में सुविधा से नहीं रखा जा सकता, तब परकार, दंड परकार, या एक साधारण कैलिपर उपयोग में लाया जाता है। साधारण कैलिपर से भीतरी तथा बाहरी व्यास भी मापे जाते हैं। पाइप आदि के कोणों की माप करने के लिये वृत्तीय चल वर्नियर बनाए गए हैं। यदि मिलीमीटर के 1/10 वें हिस्से तक मापने की आवश्यकता हो, तो वहाँ पर चल वर्नियर का उपयोग किया जाता है। बहुत ही छोटी लंबाइयों को, जैसे किसी चद्दर की मोटाई या एक पतले तार का व्यास आदि, मापने के लिये स्क्रूगेज उपयोग में लाया जाता है।
क्षेत्रफल की इकाई मीटर पद्धति में वर्ग सेंटीमीटर तथा ब्रिटिश पद्धति में वर्ग फुट है। आयतन की इकाई मीटरी प्रणाली में एक घन किलोग्राम शुद्ध पानी के आयतन को मीटरी पद्धति में आयतन की इकाई, अर्थात् लिटर, कहते हैैं। साधारणत: एक घन डेसिमीटर को लिटर के समतुल्य माना गया है। आयतन की इकाई ब्रिटिश पद्धति में घनफुट कहलाती है। इस पद्धति में धारिता की मानक माप को गैलन कहा जाता है। 62 डिग्री फा0 ताप पर 10 पाउंड आसुत पानी 1 गैलन के बराबर माना गया है। यह पाया गया है कि 1 गैलन उ 4.54 लिटर होता है। धारिता की मीटरा इकाई को लिटर माना गया है।
घन इंच के संबंध में यह पाया गया है कि 4 डिग्री सें0 पर हवा से रहित एक घन इंच शुद्ध पानी का भार 252.297 ग्रेन होता है।
[संपादित करें] भार की इकाइयाँ
मीटर पद्धति में भार की इकाई को ग्राम (किलाग्राम का हजारवाँ भाग) कहते हैं और एक ग्राम का भार 4 डिग्री सें0 ताप के शुद्ध पानी के एक घन सेंटीमीटर (c.c.) के भार के बराबर होता है।
- भार की मीटरी मापें
10 मिलीग्राम = 1 सेंटीग्राम
10 सेंटीग्राम = 1 डेसिग्राम
10 डेसिग्राम = 1 ग्राम
10 ग्राम = 1 डेकाग्राम
10 डेकाग्राम = 1 हेक्टोग्राम
10 हेक्टोग्राम = 1 किलोग्राम
10 किलोग्राम = 1 मिरियाग्राम
ब्रिटिश प्रणाली में भार की इकाई को पाउंड कहते हैं। यह एक प्लैटिनम के बेलन का भार है, जो लंदन के राजकीय कार्यालय में रखा है।
- भार की ब्रिटिश ऐवॉर्डु पॉयज (Avoirdupois) मापें
27.32 ग्रेन = 1 ड्राम
16 ड्राम = 1 आउंस उ 437 1/2 ग्रेन
16 आउंस = 1 पाउंड उ 7,000 ग्रेन
20 हंड्रेडवेट = 1 टन
4 क्वार्टर या 28 पाउंड = 1 क्वार्टर
112 पाउंड = 1 लॉङ्ग टन
20 लॉइग हंड्रेडवेट = 1 लाङग टन
भार की इकाइयों का दोनों पद्धतियों में एक संबंध पाया गया है जो इस प्रकार है:
- 1 ग्रेन = 0.0648 ग्राम;
- 1 ग्राम = 15.432 ग्रेन;
- 1 किलोग्राम = 2.2 पाउंड;
- 1 पाउंड = 453.59243 ग्राम या 0.4536 किलोग्राम।
[संपादित करें] समय की इकाई
हमें सूर्य आकाश के आर पार जाता मालूम पड़ता है। सूर्य क सर्वोच्च स्थान शिरोबिंदु (meridian) कहलाता है। शिरोबिंदु से सूर्य के दो बार जाने के अंतराल को दृष्ट सूर्य दिन (Apparent solar day) कहते हैं। अनेकानेक कारणों से दृष्ट-सूर्य-दिन की अवधि दिन प्रति दिन बदलती रहती है, लेकिन एक वर्ष के पश्चात् यह उसी परिवर्तन चक्र का दुहराती है। वर्ष की अवधि 365 1/4 दिनों की होती है। यदि हम वर्ष के सभी दिनों के काल के जोड़ दें और इसे वर्ष के पूरे दिनों से भाग दें, तो हम एक समयांतराल प्राप्त करते हैं, जिसे वेज्ञानिकों ने "माध्य सूर्य दिन" की संज्ञा दी है। इस समय को चौबीस घंटों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक घंटे को साठ मिनट में तथा प्रत्येक मिनट को साठ सेकंड में बाँटा गया है। समय की इकाई को मीटरी तथा ब्रिटिश दोनों पद्धतियों में सेकंड माना गया है, जो माध्य सूर्य दिन का 1/86,400 वाँ हिस्सा है।
किसी स्थान के शिरोबिंदु के पार किसी स्थिर तारे के क्रमिक गमनों (transits) में जो समयांतराल व्यतीत होता है, वह तारे के क्रमिक याम्योत्तरगमन के बीच का काल, या नाक्षत्र दिन (sidereal day) कहलाता है। इसका मान स्थिर पाया गया है। नाक्षत्र दिवस माध्य सूर्य दिन से लगभग चार मिनट कम होता है।
यह मालूम करने के लिये कि दो समयांतराल बराबर हैं या नहीं, अथवा मानक समय को बराबर समय के उपांतराल (subinterval) में विभाजित करने के लिये, दोलक काम में लाया जाता है। दो समयांतराल तभी बराबर कहे जाते हैं जब प्रत्येक में दोलक की दोलन संख्या एक ही होती हे। यदि दोलक के दोलनों की संख्या एक "माध्य सौर दिन" में 60x60x24 होती है, तो प्रत्येक दालन का समयांतराल एक सेकंड कहा जाता है। हमारी घड़ियों में माध्य सौर काल उपयोग में लाया जाता है।
[संपादित करें] विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग की जानेवाली अन्य तौलों तथा मापों की तालिकाएँ
- ओषधिविक्रेताओं के ब्रिटिश तौल (Apothecary's weights)
20 ग्रेन = 1 स्क्रूपल
3 स्क्रूपल = 1 ड्राम
8 ड्राम = 1 आउंस
12 आउंस = 1 पाउंड
20 द्रव आउंस = 1 पाइंट
- ओषधिविक्रेताओं की ब्रिटिश मापें (Apothecary's fluid measures)
60 द्रव मिनिम = 1 ड्राम
8 ड्राम = 1 आउंस
20 आउंस = 1 पाइंट
8 पाइंट = 1 गैलन
1 द्रव मिनिम = 0.0045 क्यूबिक इंच
1 चाय चम्मच = 1 द्रव ड्राम
1 डेसर्ट चम्मच = 2 द्रव ड्राम
1 टेबुल चम्मच = 1/2 आउंस
1 मदिरागिलास = 2 आउंस
1 चाय प्याला = 3 आउंस
- कुछ अन्य ब्रिटिश एवर्डु पॉयज तौल
(खुदरा व्यापारियों द्वारा आम तौर पर प्रयोग में लाई जाने वाली)
27.32 ग्रेन = 1 ड्राम
16 ड्राम = 1 आउंस
16 आउंस = 1 पाउंड
14 पाउंड (lbs) = 1 स्टोन (stone)
एवर्डुपॉयज़ा का पाउंड सोने चाँदी की तौल के काम में लाए जानेवाले ट्रॉय पाउंउ (troy pound) से 17 : 14 के अनुपात में भारी होता है। जबकि ट्रॉय का आउंस एवर्डुपॉयज आउंस से भारी होता है। इनके बीच 79 : 72 का अनुपात पाया जाता है।
जवाहरातों, सोने तथा चाँदी को तौलने के लिये जो बटखरे प्रयोग में लाए जाते हैं, उन्हें ट्रॉय बटखरे कहते हैं।
- ब्रिटिश ट्रॉय तौल
4 ग्रेन = 1 कैरेट (Carat)
24 ग्रेन = 1 पेनीवेट (pennyweight)
20 पेनीवेट = 1 आउंस
12 आउंस = 1 पाउंड (ib)
5,760 ग्रेन = 1 पाउंड
25 पांउड = 1 क्वार्टर
100 पाउंड = 1 हंड्रेडवेट (cwt.)
20 हंड्रेडवेट = 1 टन
1 ट्रॉयआउंस = 150 डायमंड कैरेट
- शहतीर तथा लकड़ी की माप
40 घनफुट नातराश लकड़ी (unhewn timber) = 1 टन
50 घनफुट तराशी लकड़ी (squared timber) = 1 टन
42 घनफुट लकड़ी = 1 शिपिंग टन (shipping ton)
108 घनफुट लकड़ी = 1 स्टैक (stack)
128 घनफुट लकड़ी = 1 कार्ड (cord)
- ऊन संबंधी मापें
7 पाउंड = 1 क्लोव (clove)
2 क्लोव = 1 स्टोन (stone)
2 स्टोन = 1 टॉड (tod)
61/2 टॉड = 1 वे (wey)
2 वे = 1 सैक (sack)
12 सैक = 1 लास्ट (last)
240 पाउंड = 1 पैक (pack)
- तौल की मापों का सबंध
1 ग्रेन = 0.000064799 किलोग्राम
1 आउंस = 0.0283495 किलोग्राम
1 पाउंड = 0.4535924 किलोग्राम
1 हंड्रेडवेट = 50.802 किलाग्राम
1 टन = 1016.05 किलोग्राम
- खगोलीय मापें (Astronomical measures)
खगोलीय इकाई = 9,28,97,400 मील
प्रकाश वर्ष = 59,00,00,00,00,000 मील
पारसेक (parsec) = 3.259 प्रकाश वर्ष
- ठीकेदारों की मापें (Builder's measurements)
भट्ठे की ईंट 8 3/4 इंच x 4 1/4 इंच x 2 3/4 इंच
वेल्स (welch) अग्निसह ईंट 9 इंच x 4 1/2 इंच x 2 3/4 इंच
फर्शी ईंट 9 इंच x 4 1/2 इंच x 1 3/4 इंच
स्क्वायर टाइल 9 3/4 इंच x 9 3/4 इंच x 1 इंच
स्क्वायर टाइल 6 इंच x 6 इंच x 1 इंच
डच क्लिंकर ईंट 9 1/4 इंच x 3 इंच x 1 1/2 इंच
एकरॉड (rod) ईंट की चिनाई (1 rod of brickwork) = 306 घन फुट या 11 1/3 घन गज
- धारिता की माप
(जो द्रवों तथा ठोस सामानों के लिये प्रयोग में लाई जाती हैं।)
4 गिल = 1 पाइंट
2 पाइंट = 1 क्वार्ट (quart)
4 क्वार्ट = 1 गैलन (gallon)
2 गैलन = 1 पेक (peck)
4 पेक = 1 बुशल (bushel)
3 बुशल = 1 बैग (bag)
5 बुशल = 1 सैक (sack)
8 बुशल = 1 क्वार्टर (quarter)
5 क्वार्टर = 1 लोड (load)
2 लोड = 1 लास्ट (last)
36 बुशल = 1 चालड्रोन (chaldron)
गेहूँ का एक बुशल तौल में औसतन 60 पाउंउ, जौ का लगभग 47 पाउंड तथा जई का 40 पाउंउ होता है।
- यवसुरा (Ale & beer) की माप
2 पाइंट = 1 क्वार्ट
4 कार्ट = 1 गैलन
9 गैलन = 1 फरकिन (firkin)
2 फरकिन = 1 किल्डरकिन (kilderkin)
2 किल्डरकिन = 1 बैरल (barrel)
1 1/2 बैरल = 1 हॉग्सहेड (hogshead)
2 बैरल = 1 पंचीयान (puncheon)
2 हॉग्सहेड = 1 बट (butt)
2 बट = 1 टुन (tun)
- सुरा (Wine) की माप
10 गैलन = 1 अंकर (anker)
18 गैलन = 1 रनलेट (runlet)
42 गैलन = 1 टियर्स (tierce)
84 गैलन = 1 पंचीयान
63 गैलन = 1 हॉग्सहेड
126 गैलन, या 2 हॉग्सहेड = 1 पाइप
252 गैलन, या 2 पाइप = 1 टुन (tun)
- वृत्तीय तथा कोणीय मापें
60 थर्ड्स = 1 सेकंड (²)
60 सेकंड = 1 मिनट (¢)
60 मिनट = 1 डिग्री (°)
30 डिग्री = 1 साइन (sign)
45 डिग्री = 1 ओक्टैंट (octant)
60 डिग्री = 1 सेक्सटैंट (sextant)
90 डिग्री = 1 क्वाड्रैंट या समकोण
किसी भी वृत्त की परिधि उसके व्यास का 3.1416 गुना होती है।
- सूती धागे की मापें
120 गज = 1 लच्छी (skein)
7 लच्छियाँ = 1 गुंडी (hank)
18 गुंडियाँ = 1 स्पिंडल (spindle)
[संपादित करें] विद्युत् माप (Electric measure)
वोल्ट (volt) = किसी 1 ओम (ohm) प्रतिरोध (resistance) से होकर 1 ऐंपियर (ampere) करेंट को गुजारने के लिये जितनी शक्ति की आवश्यकता होती है उसे 1 वोल्ट कहते हैं
ओम (ohm) = उस परिपथ का प्रतिरोध है, जिसमें एक वोल्ट का विद्युद्वल एक ऐंपीयर धारा उत्पन्न करता है।
मेगओम (megohm) = 10^6 ओम
ऐंपीयर (ampere) = जो करेंट किसी एक ओम प्रतिरोध के आर पार 1 वोल्ट विभवांतर पैदा करे।
कूलंब (coulomb) = विद्युत् की वह मात्रा जो एक ऐंपियर करेंट के एक सेकंड तक बहने से प्राप्त हो।
1 वाट (watt) = 1 जूल (Joule)
746 वाट = एक अश्व शक्ति प्रति सेकंड
1 किलोवाट = 1,000 वाट = 1.5 अश्वशक्ति
[संपादित करें] रैखिक माप (Lineal Measures)
8 जौ दाना = 1 इंच
2 1/2 इंच = 1 नेल (nail)
3 इंच = 1 पाम (palm)
7.02 इंच = 1 लिंक (link)
9 इंच = 1 स्पैन (span or quarter)
18 इंच = 1 हाथ (cubit)
30 इंच = 1 पद (pace)
37.2 इंच = 1 स्काटिश एल (scottish ell)
45.0 इंच = 1 इंगलिश एल (English ell)
5 फुट = 1 रेखीय पाद (geometrical pace)
6 फुट = 1 फैदम
608 फुट = 1 केबल (cable)
10 केबल = 1 नाविक मील (nautical mile)
6,080 फुट = 1 नाविक मील
6,087 फुट = 1 भूगोलीय मील
22 गज या 5 बल्ली = 1 चेन (chain)
100 लिंक = 1 चेन
10 चेन = 1 फर्लांग
80 चेन = 1 मील
1 नॉट = नाविक मी0 प्र0 धं0 की चाल।
लिनेन के धागे (linen Yarn) की माप
300 गज = 1 कट
2 कट = 1 हीर (heer)
6 हीर = 1 हास्प (hasp)
4 हास्प = 1 स्पिंडल
[संपादित करें] संख्याओं की नाप (Numbers)
12 इकाइयाँ = 1 दर्जन
12 दर्जन = 1 गुरुस
20 इकाइयाँ = 1 विशंक या कोड़ी (score)
5 गड्डी,कोड़ी, या 100 इकाईयाँ = 1 सैकड़ा
[संपादित करें] समुद्री माप
6 फुट = 1 फैदम
100 फैदम = 1 केबल की लंबाई
1,000 फैदम = 1 समुद्री मील
3 समुद्री मील = 1 समुद्री लीग
60 समुद्री मील = 1 डिग्री देशांतर भूमध्य रेखा पर
360 डिग्री = 1 वृत्त
[संपादित करें] कागजों की माप
24 ताव (sheets) = 1 दस्ता (quire)
20 दस्ता = 1 रीम (ream)
516 ताव = 1 पिं्रटर रीम (printer's ream)
2 रीम = 1 बंडल
5 बंडल = 1 बेल (bale)
[संपादित करें] सर्वेक्षक की माप (Surveyor's Measure)
7.92 इंच = 1 लिंक
100 लिंक = 22गज = एक चेन
80 चेन = 1760 गज, या = मील
[संपादित करें] ताप की माप
(1) सेंटीग्रेड-- इस नाप में पानी के हिमांक बिंदु को शून्य माना जाता है तथा जल का क्वथनांक 100 डिग्री सें0 माना गया है शरीर में रुधिर का तप 36.8 डिग्री सें0 होता है।
(2) रयूमर—इस नाप में पानी का हिमांक शुन्य माना जाता है तथा जल का क्वथनांक 80 डिग्री माना जाता है। इसका प्रयोग आप तौर पर जर्मनी में होता है।
(3) फारेनहाइट—इसमें हिमांक 32 डिग्री होता है और जल का क्वथनांक (boiling point) 212 डिग्री माना जाता है। यह माप खास करके ग्रेट ब्रिटेन तथा उत्तरी अमरीका में प्रयोग में लाई जाती है।
[संपादित करें] समय की मापें
60 सेंकंड = 1 मिनट
60 मिनट = 1 घंटा
24 घंटा = 1 दिन
7 दिन = 1 सप्ताह
4 सप्ताह = 1 महीना
13 चांद्र मास = 1 साल
12 कैलेंडर मास = 1 साल
365 दिन = 1 साधारण वर्ष
366 दिन = 1 अधिवर्ष (leap year)
3651/4 दिन = 1 जूलियन वर्ष
365 दिन 5 घं0 48 मि0 51 से0 = 1 सौर वर्ष
100 साल = 1 शत वर्ष या शताब्दी
[संपादित करें] दशमिक मान-प्रणाली के संबंध
- लंबाई तथा धारिता की इकाइयाँ
1 इंच = 0.0254 मीटर
1 फुट = 0.3048 मीटर
1 गज = 0.9144 मीटर
1 मील = 1609.344 मीटर
1 इंपीरियल गैलन = 4.54596 लिटर (litres)
- धारिता की दशमिक माप
पाइंट गैलन घन फुट लिटर
1 = 0.125 = 0.02 = 0.567
8 = 1.000 = 0.160 = 4.541
16 = 2.000 = 0.3208 = 9.082
- धारिता की माप
10 मिलीलिटर = 1 सेंटीलिटर
10 सेंटीलिटर = 1 डेसिलिटर
10 डेसिलिटर = 1 लिटर
10 लिटर = 1 डेकालिटर
10 डेकालिटर = 1 हेक्टोलिटर
10 हेक्टोलिटर = 1 किलोलिटर
1 लिटर = 1 3/4 पाइंट
[संपादित करें] क्षेत्रफल की माप
1 सेंटीएयर या 1 वर्ग मीटर = 1.196033 वर्ग गज
10 सेंटीएयर = 1 डेसिएयर
10 डेसीएयर = 1 एयर
10 एयर = 1 डेकाएयर
10 डेकाएयर = 1 हेक्टाएयर
100 हेक्टाएयर = 1 वर्ग किलोमीटर
1 हेक्टाएयर = 2 एकड़
[संपादित करें] ठोस या घन की माप
1 सेंटीस्टियर (centistere) = 610.240515 घन मी0
1 डेसिस्टियर = 3.531658 घन फुट
1 स्टियर = 1.307954 धनगज
10 सेंटिस्टियर = 1 डेसीस्टियर
10 डेसिस्टियर = 1 स्टियर या घन मील
10 स्टियर = 1 डेकास्टियर
भारत में अंग्रेजी काल में फुट-पाउंड सेकंड पद्धति का उपयोग प्रचलित था, किंतु 1 अप्रैल, 1958 ई0 से मीटरी पद्धति का प्रयोग हो रहा है। इन पद्धतियों के अतिरिक्त अन्य निम्नलिखित मापें भी भारत में प्रचलित हैं।