चारीकार

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चारीकार
Charikar / چاریکار‎
चारीकार is located in Afghanistan
चारीकार
अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति
सूचना
प्रांतदेश: परवान प्रान्त, अफ़ग़ानिस्तान
जनसंख्या (-): १,५७,०००
मुख्य भाषा(एँ): दरी फ़ारसी
निर्देशांक: 35°0′47″N 69°10′8″E / 35.01306°N 69.16889°E / 35.01306; 69.16889


चारीकार में जानवरों की एक डाक्टर

चारीकार (दरी फ़ारसी: چاریکار‎, अंग्रेज़ी: Charikar) उत्तर-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के परवान प्रान्त की राजधानी है। यह कोहदामन (अर्थ:पहाड़ का दामन) नामक वादी का मुख्य शहर है और ग़ोरबंद नदी के किनारे स्थित है।[1]

विवरण[संपादित करें]

चारीकार के अधिकतर लोग ताजिक समुदाय के हैं, हालांकि यहाँ कुछ उज़बेक लोग, क़िज़िलबाश​ लोग और हज़ारा लोग भी रहते हैं। यह शहर अपने उत्तम अंगूरों और मिट्टी की वस्तुओं के लिए जाना जाता है।[2] इस शहर को पंजशीर वादी का प्रवेश द्वार भी माना जाता है।

इतिहास[संपादित करें]

मध्यकाल में चारीकार ख़्वारेज़्मी साम्राज्य का हिस्सा था। सन् १२२० में चंगेज़ ख़ान की मंगोल फौजों ने इसपर हमला कर दिया लेकिन परवान के युद्ध में ख़्वारेज़्मी शासक जलालुद्दीन मिंगबुरनु (Jalal ad-Din Mingburnu) ने उन्हें किसी तरह टोक दिया जिस से वह और उसकी कुछ फ़ौजें ख़्वारेज़्मी साम्राज्य के नष्ट होने के बावजूद स्वयं बच पाई।[3] १९वीं सदी की शुरुआत पर यह चंद हज़ार लोगों की जनसँख्या वाला एक व्यापारिक शहर बन चुका था। सन् १८४१ में प्रथम आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध के काल में यहाँ एक ब्रिटिश राज की छावनी तैनात थी जिसमें लगभग २०० गोरखा तथा अँगरेज़ सैनिक थे। कुछ-एक को छोड़कर लगभग सभी स्थानीय क़बीलाई लोगों द्वारा मारे गए।[4] उस हादसे का वर्णन लिखते हुए एक ब्रिटिश अफ़सर ने कहा कि तब चारीकार के आसपास बहुत से मिट्टी के क़िले बने हुए थे।[5] १९७९-८९ काल में अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत युद्ध के दौरान भी यहाँ बहुत ज़बरदस्त लड़ाई हुई।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Historical Dictionary of Afghanistan, Ludwig W. Adamec, pp. 96, Scarecrow Press, 2011, ISBN 978-0-8108-7957-7, ... Charikar is a town and district with about 157,000 inhabitants located at the mouth of the Ghorband River ...
  2. Afgantsy : The Russians in Afghanistan, Rodric Braithwaite, pp. 206, Oxford University Press, 2011, ISBN 978-0-19-991151-6, ... Charikar, known for its grapes and its pottery, where Captain Codrington and his Gurkhas were massacred during the First Anglo-Afghan War ...
  3. The Cambridge History of Iran, pp. 318, Cambridge University Press, 1968, ISBN 978-0-521-06936-6, ... Learning that a Mongol army under the two generals Tekechuk and Molghor was laying seige to a castle in the Walian Kotal (to the north-west of Charikar) he led an attack against them and had killed a thousand men of the Mongol vanguard before they withdrew across the river (apparently the Ghorband) ...
  4. Dictionary of Battles and Sieges: A Guide to 8,500 Battles from Antiquity Through the Twenty-first Century, Tony Jaques, pp. 227, Greenwood Publishing Group, 2007, ISBN 978-0-313-33537-2, ... Charikar, 1841, 1st British-Afghan War: Besieged by rebel tribesmen at Charikar, 35 miles north of Kabul, the Gurkha garrison under Lieutenant John Haughton decided to evacuate ... Massacre of Charikar ...
  5. Bazaar Politics: Power and Pottery in an Afghan Market Town, Noah Coburn, pp. 8, Stanford University Press, 2011, ISBN 978-0-8047-7672-1, ... Colonel Haughton noted in his account leading up to the siege of Charikar in 1841 that the areas around Charikar and Istalif were dominated by large, mud qala (fort) architecture ...