करौली
| करौली | |
| — शहर — | |
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |
| देश | |
| राज्य | राजस्थान |
| ज़िला | करौली |
| जनसंख्या | 66,179 (2001 के अनुसार [update]) |
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 275 मीटर (902 फी॰) |
निर्देशांक: करौली राजस्थान का ऐतिहासिक नगर है। यह करौली जिला का मुख्यालय है। इसकी स्थापना 955 ई. के आसपास राजा बिजय पाल ने की थी जिनके बारे में कहा जाता है कि वे भगवान कृष्ण के वंशज थे। 1818 में करौली राजपूताना एजेंसी का हिस्सा बना। 1947 में भारत की आजादी के बाद यहां के शासक महाराज गणेश पाल देव ने भारत का हिस्सा बनने का निश्चय किया। 7 अप्रैल 1949 में करौली भारत में शामिल हुआ और राजस्थान राज्य का हिस्सा बना। यहां का सिटी पेलेस राजस्थान के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। मदन मोहन जी का मंदिर देश-विदेश में बसे श्रृद्धालुओं के बीच बहुत लोकप्रिय है। अपने ऐतिहासिक किलों और मंदिरों के लिए मशहूर करौली दर्शनीय स्थल है।
अनुक्रम |
रजवाड़ा [संपादित करें]
| रजवाड़ा: करौली | |
| क्षेत्र | धूंधार |
| ध्वज | |
| स्वतंत्र: | जयपुर रजवाड़ा |
| राज्य अस्तित्व: | 10 c./19 c.-1949 |
| राजवंश | जादों |
| राजधानी | करौली |
मुख्य आकर्षण [संपादित करें]
सिटी पेलेस [संपादित करें]
यह महल करौली का मुख्य आकर्षण है। इसका निर्माण अर्जुन पाल ने 14वीं शताब्दी में कराया था। लेकिन इसका वर्तमान स्वरूप का श्रेय राजा गोपाल सिंह को जाता है जिन्होंने 18वीं शताब्दी में इसका पुन: निर्माण करवाया था। लाल बलुआ पत्थर से बने इस महल में सफेद पत्थरों का भी खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है। महल की छत से शहर का पूरा दृश्य देखा जा सकता है। दीवान-ए-आम की जालियां और रंग पहल के रंगीन कांच से बने झरोखे भी देखने लायक हैं। 1950 में यह महल मदन मोहन ट्रस्ट को सौंप दिया गया।
करौली पशु मेला [संपादित करें]
फरवरी में होने वाले पशु मेले में भाग लेने के लिए हजारों की संख्या में मवेशी यहां लाए जाते हैं। इस मेले में पशु दौड़ का आयोजन किया जाता है। इस दौड़ का उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ अच्छे जानवरों की बिक्री भी होता है। इस मेले में अनेक ऐसी चीजें भी मिलती हैं जो आमतौर पर करौली में नहीं होती जैसे नागौरी माला, जोधपुरी पीतल का सामान आदि। स्थान: शहर के बाहर मेला द्वार के पास, भंवर विलास पेलेस होटल से एक किमी. दूर समय: सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक
मदन मोहन मंदिर [संपादित करें]
मदन मोहन मंदिर सिटी पेलेस से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में और जयपुर के गोविंदजी और गोपीनाथ मंदिर में एक ही दिन दर्शन करना शुभ होता है। समय: गर्मियों में सुबह 4 बजे से 11.30 बजे तक, शाम 6.30 बजे से रात 9 बजे तक सर्दियों में सुबह 5 बजे से 12.30 बजे तक, शाम 5.30 बजे से रात 8 बजे तक
निकटवर्ती स्थल [संपादित करें]
कैला देवी अभ्यारण्य [संपादित करें]
(23 किमी.) यह अभ्यारण्य करौली से 23 किमी. दक्षिण पश्चिम में स्थित है। इस अभ्यारण्य की सीमा कैलादेवी मंदिर के पास से शुरु होकर करन पुर तक जाती हैं और रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान से भी मिलती हैं। कैला देवी अभ्यारण्य में नीलगाय, तेंदुए और सियार के अलावा किंगफिशर में मिलते हैं।
तिमनगढ़ किला [संपादित करें]
(40 किमी.) तीमानगढ़ करौली से 40 किमी. दूर है। इस किले का निर्माण 12वीं शताब्दी के मध्य में हुआ था। अपने समय में तिमानगढ़ स्थानीय सत्ता का केंद्र था। 1196 में यहां के राजा कुंवर पाल का हराकर मोहम्मद गौरी और उनके सेनापति कुतुबुद्दीन ने इस पर अपना कब्जा कर लिया था। इसके बाद राजा कुंवर पाल को रेवा के एक गांव में शरण लेनी पड़ी। किले के मुख्य द्वार पर मुगल स्थापत्य कला का प्रभाव दिखाई पड़ता है। लेकिन किले के आंतरिक हिस्सों पर यह प्रभाव नहीं है। इसकी दीवारें, मंदिर और बाजार अपने सही रूप में देखे जा सकते हैं। किले से सागर झील का विहंगम दृश्य भी देखा जा सकता है।
श्री कैला देवी मंदिर [संपादित करें]
श्री कैला देवी जी मंदिर करौली से 23 किमी. दूर स्थित है। यह माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना 1100 ई. में हुई थी। श्री कैला देवी पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों की आराध्य देवी हैं। प्रतिवर्ष करीब 60 लाख श्रद्धालु यहां दर्शनों के लिए आते हैं। यह मंदिर देवी दुर्गा के 9 शक्तिपीठों में से एक है। चैत्र नवात्रों में यहां मेले का आयोजन किया जाता है।
आवागमन [संपादित करें]
- हवाई मार्ग
नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर विमानक्षेत्र यहां से 160 किमी. दूर है।
- रेल मार्ग
नजदीकी रेलहेड गंगपुर दिल्ली और मुंबई से गोल्डन टैंपल मेल और पश्चिम एक्सप्रैस से जुड़ा हुआ है।
- सड़क मार्ग
करौली महुवा से केवल 64 किमी. दूर है और आगरा और जयपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 11 के बीच में स्थित है।
खरीदारी [संपादित करें]
करौली में चमड़े की जूतियां, चांदी के गहने और स्टील का सामान बहुत मशहूर है। इन्हें खरीदने के लिए सिटी पेलेस के पास के बाजार में जा सकते हैं। इसके अलावा मिट्टी से बनी भगवान की मूर्तियां और दूध की मिठाइयां भी लोगों का खूब पसंद आती हैं। इस बाजार में कोई बड़ा सामान मिलना मुश्किल है लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा बनाए जाने वाली लाख और कांच की चूडि़यां खरीदी जा सकती हैं। लकड़ी के खिलौने सैलानियों को लुभाते हैं।
संदर्भ [संपादित करें]
बाहरी सूत्र [संपादित करें]
इस लेख की सामग्री सम्मिलित हुई है ब्रिटैनिका विश्वकोष एकादशवें संस्करण से, एक प्रकाशन, जो कि जन सामान्य हेतु प्रदर्शित है।.
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