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होरमुज़ जलसन्धि

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हॉर्मुज जलडमरूमध्य
हॉर्मुज जलडमरूमध्य - हॉर्मुज जलडमरूमध्य के निकटवर्ती क्षेत्रों का मानचित्र
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के निकटवर्ती क्षेत्रों का मानचित्र
तटवर्ती क्षेत्र  ईरान  ओमान
 संयुक्त अरब अमीरात
अधिकतम चौड़ाई ३९ - ६० किमी
औसत गहराई ५० - १०० मी[1]

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (फ़ारसी: ur, तंगेह-ए-हॉर्मुज ; अँग्रेजी: Strait of Hormuz, स्ट्रेट् ऑफ़ हॉर्मुज ) पश्चिम एशिया की एक प्रमुख जलसन्धि है जो ईरान के दक्षिण में फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से अलग करता है। इसके दक्षिण में संयुक्त अरब अमीरात और ओमान का मुसन्दम नामक बहिक्षेत्र हैं। तेल के निर्यात की दृष्टि से यह जलडमरु बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इराक़, कतर तथा ईरान जैसे देशों का तेल निर्यात यहीं से होता है। अपने सबसे कम चौड़े स्थान पर इसके दोनों तटों में ३९ किलोमीटर की दूरी है। यह ईरान को ओमान से अलग करती है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी के देशों से तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के वैश्विक आवाजाही के लिये एक महत्त्वपूर्ण गलियारे के रूप में कार्य करता है। इससे होकर विश्व की कुल तेल आपूर्ति का 20% तेल आता-जाता है। सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे प्रमुख निर्यातक इस मार्ग पर निर्भर हैं तथा 80% से अधिक तेल एशियाई बाज़ारों, विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की ओर जाता है।

हॉर्मुज का मतलब केवल एक नाम नहीं, बल्कि शक्ति और नियंत्रण भी है। सामरिक दृष्टि से, जो देश इस रास्ते पर नियंत्रण रखता है, वह वैश्विक अर्थव्यवस्था की चाबी अपने पास रखता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकियाँ दी जाती हैं।

भारत की दृष्टि से हॉर्मुज का महत्व

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भारत का लगभग 40% कच्चा तेल आयात और लगभग 54% LNG आयात इस रणनीतिक मार्ग से होकर गुजरता है। इसकी संकीर्ण चौड़ाई के कारण इसमें आवाजाही के लिये व्यवधान करना बहुत आसान है।

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इस जलडमरूमध्य को बाईपास करने वाली पाइपलाइनों का संचालन करते हैं, जबकि ईरान ओमान की खाड़ी में सीधे तेल भेजने के लिये गोरेह-जस्क पाइपलाइन और जस्क टर्मिनल पर निर्भर है।

हॉर्मुज नाम कैसे पड़ा?

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'हॉर्मुज' नाम को लेकर इतिहासकार और भाषाविद एकमत नहीं हैं। होर्मूज़ केवल जलडमरूमध्य का नाम नहीं है, यह एक पुराना शहर और सामुद्रिक साम्राज्य भी था। आरम्भ में हॉर्मुज का मूल बसावट क्षेत्र ईरान के तट के पास माना जाता है। बाद में समुद्री व्यापार बढ़ने पर शासकों ने अपना केंद्र एक द्वीप पर स्थानांतरित कर दिया। इस द्वीप को भी होर्मूज़ द्वीप कहा जाने लगा। यही द्वीप फारस की खाड़ी के मुहाने पर था। इस कारण से आसपास के समुद्री रास्ते को भी होर्मूज़ के नाम से जोड़ा जाने लगा।

10वीं से 17वीं शताब्दी के बीच हॉर्मुज साम्राज्य ने महासागरीय व्यापार पर गहरी पकड़ बना ली थी। अरब, फारस, भारत, पूर्वी अफ्रीका और दक्षिणपूर्व एशिया के बीच जाने वाले जहाज़ यहां रुकते थे। मसाले, मोती, घोड़े, कीमती पत्थर, कपड़ा और धातुओं का बड़ा व्यापार यहीं से होता था. बोलचाल और आधिकारिक अभिलेखों में यह इलाका होर्मूज़ के नाम से इतना प्रसिद्ध हुआ कि जलडमरूमध्य का नाम भी वहीं से स्थायी हो गया। इस तरह पहले शहर और द्वीप का नाम था होर्मूज़ फिर उसी से समुद्री रास्ते का नाम बना होर्मूज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़)।

फारसी और अवेस्ता परम्परा में ईश्वर के लिए एक प्रमुख नाम है, अहुर मज़्दा। कुछ विद्वान मानते हैं कि समय के साथ अहुर मज़्दा से ओरमज़्द या ओहरमज़्द जैसे रूप बने। स्थानीय उच्चारणों में यह ओरमुज़, होरमुज़ और आगे चलकर होर्मूज़ बन गया। यह बदलाव भाषा-विज्ञान की सामान्य प्रक्रिया जैसा है, जैसे लंबे नाम छोटे रूप लेते हैं। ध्वनियां बदलती हैं, पर मूल से उनका संबंध बना रहता है।

कुछ शोधकर्ताओं का यह भी विचार है कि किसी समय इस क्षेत्र के संरक्षक या प्रतीक के रूप में ओरमज़्द, होर्मूज़ जैसा नाम ईश्वरीय सुरक्षा, शक्ति या शुभता के अर्थ में प्रचलित हुआ हो। बाद में यह नाम भौगोलिक स्थानों के लिए भी अपनाया गया जैसे शहर, द्वीप और फिर जलडमरूमध्य। हालांकि, यह धारणा सबके द्वारा पूरी तरह स्वीकार नहीं की गई है, फिर भी कई इतिहासकार इसे एक मजबूत भाषाई कड़ी मानते हैं।

नाम के रूप में हॉर्मुज कई रूपों में लिखा और बोला गया। अरबी और फारसी लेखों में इसे कभी हुरमूज़, कभी होरमुज़ लिखा मिलता है। यूरोपीय यात्रियों और व्यापारियों ने इसे अपनी भाषा के अनुसार Ormuz, Hormuz, Ormus आदि रूपों में दर्ज किया। मार्को पोलो, पुर्तगाली, डच और अंग्रेज़ी स्रोतों में इन अलग-अलग रूपों का ज़िक्र मिलता है। समय के साथ अंग्रेज़ी में Strait of Hormuz लिखना प्रचलित हो गया। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों और दस्तावेज़ों में भी यही रूप स्थिर हो गया।

केवल धार्मिक या भाषाई कारण ही नहीं, आर्थिक ताकत ने भी इस नाम को विश्व-स्तर पर मशहूर किया। जब हॉर्मुज साम्राज्य चरम पर था, तो इसे 'की ऑफ पर्शियन गल्फ' यानी फारस की खाड़ी की चाबी कहा जाता था। जो जहाज़ इस क्षेत्र से गुजरते, वे होर्मूज़ में कर चुकाते। आसपास के जलक्षेत्र और रास्तों को भी लोग उसी शहर के नाम से बुलाने लगे। यह आम मानवीय आदत है। जैसे, किसी बड़े स्टेशन या शहर के नाम से पूरी पट्टी पहचानी जाने लगती है। इस तरह शहर की समृद्धि और सामुद्रिक सत्ता ने यह सुनिश्चित कर दिया कि होर्मूज़ नाम भूगोल के इस हिस्से पर हमेशा के लिए अंकित हो जाए।

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. Coastal Fishes of Oman, John E. Randall, pp. 1, University of Hawaii Press, 1995, ISBN 978-0-8248-1808-1, ... very shallow compared to other seas of comparable size, the average depth being only 35 m, and huge expanses are only a few metres deep; the greatest depth is only 100 m (this a short distance into the Gulf from the Strait of Hormuz) ...