हर्निया

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उदर हर्निया

मानव शरीर के कुछ अंग शरीर के अंदर खोखले स्थानों में स्थित है। इन खोखले स्थानों को "देहगुहा" (body cavity) कहते हैं। देहगुहा चमड़े की झिल्ली से ढकी रहती है। इन गुहाओं की झिल्लियाँ कभी-कभी फट जाती हैं और अंग का कुछ भाग बाहर निकल आता है। ऐसी विकृति को हर्निया (Hernia) कहते हैं।

प्रकार[संपादित करें]

हर्निया कई प्रकार के होते हैं। साधारणत: हर्निया से हमारा आशय उदर हर्निया से ही होता है। मनुष्य हर्निया से आक्रांत है, ऐसा कहा जाता है। स्थान के अनुसार उनका वर्गीकरण किया गया है। कुछ अन्वेषकों के नाम पर भी हर्निया का नाम दिया गया है, जैसे रिक्टर हर्निया। विभिन्न स्थानों के हर्निया इस प्रकार हैं-

1. कटिप्रदेश हर्निया

2. श्रोणि गवाक्ष (obturator) हर्निया

3. उपजंघिका (perineal) हर्निया

4. नितंब (gluteal) हर्निया

5. उदर हर्निया

6. महाप्राचीरपेशी विवर हर्निया

7. नाभि हर्निया (जन्मजात, शैशव, युवावस्था में हो सकता है)

8. परानाभि हर्निया (para numblical)

9. उर्वी हर्निया, कंकनाभिका (pectineal) हर्निया भी इसी के अन्तर्गत आता है।

10. वंक्षण हर्निया (inguinal hernia) अऋज् या ऋज् हो सकता है। अऋज् हर्निया जन्मजात, शैशव या अर्जित हो सकता है। पूर्ण या अपूर्ण ऋज् हर्निया बाह्य (external) पार्श्व, नाभिस्थ स्नायु के पार्श्व से या अन्तर (internal) पार्श्व नाभिस्थ स्नायु के अंदर से अन्तरालीय और आवर्तक हर्निया भी हो सकता है। इनके अतिरिक्त फुफ्फुस के, मस्तिष्क के तथा उदरावरण के भी हर्निया होते हैं।

हर्निया में निकलने वाले अंगों के अनुसार भी हर्निया का वर्गीकरण किया गया है।

हर्निया के कारण[संपादित करें]

1. गुहा की भित्ति की दुर्बलता या कुवृद्धि।

2. जन्म से अंग की आवरणकला के झोले में उपस्थिति।

3. आघात या शल्यकर्मज।

प्रवर्तक (promotor) कारणों में कास, कोष्ठबद्धता, प्रसव, वर्षित पुरस्थ ग्रन्थि (prostate gland), मूत्रकृच्छता आदि के कारण उदरगुहा में नित्य दबाव बढ़ना अथवा "अन्तरंग" का स्थानभ्रष्ट होना हो सकता है। यह रोग पैतृक भी हो सकता है।

अवस्थाएँ एवं उपद्रव[संपादित करें]

(क) जिस क्रिया में विस्थापित अंग दबाव आदि से पुन: यथास्थान स्थापित किया जा सकता है वह रिड्यूसिबल (reducible) हर्निया कहलाता है।

(ख) शोथ, संकोच आदि के उपद्रवों के कारण जिस हर्निया में विस्थापित अंग पुन: यथास्थान संस्थापित न किया जा सकता हो वह इर्रिड्यूसिबल हर्निया कहलाता है।

(ग) सशोथ हर्निया।

(घ) अवरुद्ध हर्निया।

(च) स्ट्रेंग्यूलेटेड (Strangulated) हर्निया - इसमें विस्थापित अंग द्वारा सूक्ष्म ऊतकों में रुधिर परिवहन रुक जाता है।

क, को छोड़कर हर्निया की सब अवस्थाएँ कष्टसाध्य हैं। ख, घ और च अवस्था में तुरंत शल्यकर्म करना चाहिए।

लक्षण[संपादित करें]

हर्निया के स्थान पर गोल उभार होना, कुछ उतरने जैसा अनुभव होता, उभार का अंदेशा होने पर उसमें आंत्र कुंजन सुनाई देता है तथा थपथपाने पर अनुनाद सुनाई देता है। need more explanation.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

छबियाँ[संपादित करें]