सूरसारावली
दिखावट
| इस लेख में सन्दर्भ या स्रोत नहीं दिया गया है। कृपया विश्वसनीय सन्दर्भ या स्रोत जोड़कर इस लेख में सुधार करें। स्रोतहीन सामग्री ज्ञानकोश के लिए उपयुक्त नहीं है। इसे हटाया जा सकता है। (अक्टूबर 2022) स्रोत खोजें: "सूरसारावली" – समाचार · अखबार पुरालेख · किताबें · विद्वान · जेस्टोर (JSTOR) |
सूरसारावली भक्त कवि सूरदास की एक रचना है। इसमें ११०७ छन्द हैं। यह सम्पूर्ण ग्रन्थ एक "वृहद् होली" गीत के रूप में रचित है। इसकी टेक है - खेलत यह विधि हरि होरी हो, हरि होरी हो वेद विदित यह बात। इसका रचना-काल संवत् १६०२ वि० निश्चित किया गया है, क्योंकि इसकी रचना सूर के ६७वें वर्ष में हुई थी।
सन्दर्भ
[संपादित करें]| यह लेख एक आधार है। जानकारी जोड़कर इसे बढ़ाने में विकिपीडिया की मदद करें। |
सूरदास द्वारा रचित का सार (Summary) इस प्रकार है:[1]
- सूरसागर का सार: इसे सूरदास के महान ग्रंथ 'सूरसागर' का सारांश या अनुक्रमणिका माना जाता है।
- ब्रह्मांड की उत्पत्ति: इसमें सृष्टि की रचना का सिद्धांत (Theory of Genesis) बताया गया है, जिसमें भगवान कृष्ण को जगत का कर्ता माना गया है।
- होली का रूपक: पूरा ग्रंथ एक 'वृहद होली' (बड़ी होली) गीत के रूप में लिखा गया है। इसमें भगवान को एक 'महान खिलाड़ी' के रूप में दिखाया गया है जो खेल-खेल में सृष्टि की रचना करते हैं।
- छंदों की संख्या: इसमें कुल 1,107 छंद हैं।
- मुख्य विषय: इसमें कृष्ण की बाल-लीलाओं, राधा-कृष्ण के प्रेम और भक्ति का वर्णन है। साथ ही इसमें भगवान के 24 अवतारों और ध्रुव-प्रह्लाद जैसी कथाओं का भी संक्षेप में उल्लेख है।
- रचना काल: माना जाता है कि सूरदास जी ने इसकी रचना 67 वर्ष की आयु में की थी।
- ↑ Sur sarawli.