सुशासन

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सुशासन (Good governance) से तात्पर्य किसी सामाजिक-राजनैतिक ईकाई (जैसे नगर निगम, राज्य सरकार आदि) को इस प्रकार चलाना कि वह वांछित परिणाम दे। सुशासन के अन्तर्गत बहुत सी चीजें आतीं हैं जिनमें अच्छा बजट, सही प्रबन्धन, कानून का शासन, सदाचार आदि। इसके विपरीत पारदर्शिता की कमी या सम्पूर्ण अभाव, जंगल राज, लोगों की कम भागीदारी, भ्रष्टाचार का बोलबाला आदि दुःशासन के लक्षण हैं।

'शासन' शब्द में 'सु' उपसर्ग लग जाने से 'सुशासन' शब्द का जन्म होता है। ’सु’ उपसर्ग का अर्थ शुभ, अच्छा, मंगलकारी आदि भावों को व्यक्त करने वाला होता है। राजनीतिक और सामाजिक जीवन की भाषा में सुशासन की तरह लगने वाले कुछ और बहुप्रचलित-घिसेपिटे शब्द हैं जैसे - प्रशासन, स्वशासन, अनुशासन आदि। इन सभी शब्दों का संबंध शासन से है। ’शासन’ आदिमयुग की कबीलाई संस्कृति से लेकर आज तक की आधुनिक मानव सभ्यता के विकासक्रम में अलग-अलग विशिष्ट रूपों में प्रणाली के तौर पर विकसित और स्थापित होती आई है। इस विकासक्रम में परंपराओं से अर्जित ज्ञान और लोककल्याण की भावनाओं की अवधारणा प्रबल प्रेरक की भूमिका में रही है। इस अर्थ में शासन की सभी प्रणालियाँ कृत्रिम हैं। इस प्रकार हम कह सकते है कि सुशासन व्यक्ति को भ्रस्टाचार एवं लालफीताशाही से मुक्त कर प्रशासन को स्मार्ट S(simple)साधारण,M(moral)नैतिक,A(accountable)उत्तरदायी,R(responsible)जिम्मेदारियोग्य,T(transparent)पारदर्शी बनाता है ।

सुशासन के प्रमुख तत्त्व[संपादित करें]

संयुक्त राष्ट्रसंघ के अनुसार सुशासन के निम्नलिखित आठ विशेषताएँ होतीं हैं-

  1. विधि का शासन (rule of law)
  2. समानता एवं समावेशन (equity and inclusiveness)
  3. भागीदारी (participation)
  4. अनुक्रियता (responsiveness)
  5. बहुमत/मतैक्य (consensus oriented)
  6. प्रभावशीलता दक्षता (effectiveness and efficiency)
  7. पारदर्शिता (transparency)
  8. उत्तरदायित्व (accountability)
  9. निष्पक्ष आकलन

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