सिरमौर

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

सिरमौर राजपूूूत बिहार राज्य के मगध क्षेत्र में एक प्रमुख राजपूत वंश है।सिरमौर का अर्थ सिर का मुकुट अथवा सिर का मौर (सर्वश्रेष्ठ)होता है। इनके बारे में कहा जाता है कि ये मध्यकालीन बिहार के राजनीतिक इतिहास में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।दक्षिण बिहार के गया में इनका गढ़ है। वंश परिचय :- सिरमौर राजपूत का संबंंध राजपूत में प्रसिद्ध बैस वंश से है।इस वंश के सबसे बड़ा राजा हर्षवर्द्धन थे,जिन्होंने 7वी शताब्दी में उतरी भारत के सम्पूर्ण क्षेत्रों पर राज किया था।हर्ष के मृत्यु के बाद इस वंश का शाशन कमजोर होता चला गया। फिर 1230ई. में राजा अभयचंद सिंह ने बैसवारा में भर जाति के राजाओं को हराकर वहां फिर से बैस राजपूतो का राज्य बैसवारा की स्थापना किया। सिरमौर राजपूतों का संबंध बैसवारा के शाही राजपरिवार से था,जो सबसे पहले गया में आकर यहां के कुछ स्थानों पर अधिकार कर लिया। इनकी वीरता को देखकर एक महान राजा ने राजपूतो के सिरमौर की उपाधि दी। यहां आकर इन्होंने अपनी वीरता से गया जिले के एक बड़े क्षेत्रो पर अधिकार कर लिया।आज भी सबसे ज्यादा सिरमौर राजपूत गया जिले में ही निवास करते है। * प्रसििद्ध व्यक्ति :- * राजा हर्षवर्धन:- भारतवर्ष के महान राजा आर्यावर्त्त का अंतिम हिन्दू सम्राट * # राजा सुहेलदेव बैस:-महमूद गजनवी के भांजे सालार मसूद गाज़ी के हराकर हिंदुत्व की रक्षा किया। * #मेजर ध्यानचंद सिंह:- हॉकी के जादूगर। *# रूप सिंह:- हॉकी के महान खिलाड़ी और ध्यांचन्द के छोटे भाई। *# राणा बेनीमाधव सिंह:- बैसवारा में एक रियासत शंकरपुर के जमींदार राजा अंग्रेज़ो को कई युद्धों में हराया और दो वर्षों तक रायबरेली को आज़ाद रखा।। *# राजा रामबक्श सिंह:- बैसवारा के एक और रियासत डौडियाखेड़ा के अंतिम राजा अंग्रेज़ों को युद्ध मे कई बार हराया अंत मे अंग्रेज़ो द्वारा 1858 में फाँसी दे दिया गया।। *# राजा शालिवाहन:- उज्जैन के राजा विक्रमादित्य को युद्ध में हराया।