सामाजिक अधिगम

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सामाजिक अधिगम (Social learning), अधिगम (सीखने) से सम्बन्धित एक सिद्धान्त है। दूसरे लोगों के व्यवहार को देखकर, उससे सीखना, सामाजिक अधिगम कहलाता है। सामाजिक अधिगम, व्यक्तिगत अधिगम या समूह अधिगम की अपेक्षा अधिक बड़े पैमाने पर होता है। इसके द्वारा अभिवृत्ति या व्यवहार में परिवर्तन हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है।

दूसरों को देखकर उनके अनुरूप व्यवहार करने के कारण, अथवा दूसरों के व्यवहारों को अपने जीवन में उतारने तथा समाज द्वारा स्वीकृत व्यवहारों को धारण करने तथा अमान्य व्यवहारों को त्यागने के कारण ही यह सिद्धान्त सामाजिक अधिगम सिद्धान्त कहलाता है। इसी को बाण्डुरा का ‘अनुकरण द्वारा व्यवहार में रूपान्तरण का सिद्धान्त’ (Bandura’s theory of behaviour modification through modelling) भी कहते हैं।

मुख्य बिन्दु[संपादित करें]

1. अधिगम में अधिगमकर्ता किसी प्रतिमान (मॉडल) को देखता और सुनता है।

2. प्रतिमान द्वारा किये गये व्यवहार को अधिगमकर्ता ज्ञानात्मक प्रक्रियाओं द्वारा मस्तिष्क में संग्रहित करता है।

3. बालक प्रतिमान द्वारा किये गये व्यवहार के परिणामों का निरीक्षण करता है।

4. इसके बाद अधिगमकर्ता स्वयं प्रतिमान के व्यवहार का अनुकरण करके संवलीकरण की आशा करता है।

5. संवलीकरण, धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है। लोगों से धनात्मक पुष्टिकरण मिलने पर बालक उस व्यवहार को सीख लेता है और किसी व्यवहार के प्रति लोगों का नकारात्मक रुख होने पर उस व्यवहार को त्याग देता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]