साँचा:आज का आलेख १४ अप्रैल २०१०

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महाभारत में कृष्ण-अर्जुन
महाभारत तीन नामो से प्रसिद्ध है "जय" , "भारत" और "महभारत"। वास्तव में वेद व्यास जी ने सबसे पहले १,००,००० श्लोको के परिमाण के ग्रंथ "भारत" की रचना की थी, इसमे उन्होने भारतवंशियो के चरित्रो के साथ साथ अन्य कई महान ऋषियो,चन्द्रवंशि-सूर्यवंशि राजाओ के उपाख्यान और कई अन्य धार्मिक उपाख्यान डाले। इसके बाद व्यास जी ने २४,००० श्लोको का बिना किसी उपाख्यानो का केवल भारतवंशियो को केन्द्रित करके "भारत" काव्य बनाया। इन दोनो रचनाओ मे धर्म की अधर्म पर विजय होने के कारण इन्हे "जय" भी कहा जाने लगा। महाभारत मे एक कथा आती है कि जब देवताओ ने तराजू के एक पासे में चारो "वेदो" को रखा और दूसरे पर "भारत ग्रंथ" को रखा, तो "भारत" वेदो की तुलना मे अधिक भारी सिद्ध हुआ, "भारत" ग्रन्थ की इस महता (महानता) को देखकर देवताओ ने इसे "महाभारत" नाम दिया और इस कथा के कारण मनुष्यो मे भी यह "महाभारत" के नाम से सबसे अधिक प्रसिद्ध हुई।  विस्तार में...