समस्या-पूर्ति

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समस्या-पूर्ति भारतीय साहित्य में प्रचलित विशेष विधा है जिसमें किसी छन्द में कोई कविता का अंश दिया होता है और उस छन्द को पूरा करना होता है। यह कला प्राचीन काल से चली आ रही है। यह कला चौंसठ कलाओं के अन्तर्गत आती है। समस्यापूर्ति विशेषत: संस्कृत साहित्य में बहुत प्रसिद्ध है।

ऐसे भी उदाहरण हैं जिसमें कुछ विद्वानों ने कालिदास द्वारा रचित मेघदूतम की प्रत्येक कविता की प्रथम पंक्ति ज्यों का त्यों 'समस्या' के रूप में लेकर स्वयं उसकी पूर्ति की है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]