सदानंद बकरे

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सदानंद बकरे (10 नवम्बर 1920 – 18 दिसम्बर 2007) एक भारतीय चित्रकार और मूर्तिकार थे। बड़ौदा में पैदा हुए बकरे बंबई प्रगतिशील कलाकार समूह के संस्थापकों में से एक थे जो भारत में पहला आधुनिक कला संगठन था।[1] 1951 में वह ब्रिटेन गए, जहाँ वह जल्द ही मूर्तिकला त्याग कर पेंटिंग पर ध्यान केंद्रित करने लगे। उनकी एकमात्र प्रदर्शनी राष्ट्रमंडल संस्थान (1951), गैलरी वन (1959) और निकोलस ट्रेद्वेल गैलरी (1969-1975) में संपन हुईं। बकरे 1975 में भारत लौट आए, उसके बाद के वर्षों में वह एक वैरागी बन गये थे, लेकिन उनको बॉम्बे आर्ट सोसायटी द्वारा जीवनकालिक उपलब्धि श्रम पुरस्कार 2004 में प्राप्त हुआ।[2] दिल के दौरे के कारण रत्नागिरि में सदानंद बकरे की 2007 में मृत्यु हो गई।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Sadanand Bakre", superhumanism.eu. Retrieved 2010-08-16.
  2. "What use awards? I just need someone to talk to", Times of India, फरवरी 21, 2004.
  3. Indian Express