सदस्य वार्ता:NEHAL KUMAR SINGH NIRMAL

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NEHAL KUMAR SINGH NIRMAL

कविता(हिन्दी)[संपादित करें]

★हिन्दी गीत

वन्दन करते उस हिन्दी का ,जो है सबका मान सखे। जय हिन्दी जय हिन्दी हिन्दी,जय जय हिन्दुस्तान सखे।


खुसरो वाणी मे प्रकट हुई,दुनिया गाॅधी ने दिखलाया, कर कोमलता से पकड़ इसे,चलना हरिचन्द ने सिखलाया। है हिन्द तभी जब तक हिन्दी,कर हिन्दी पर अभिमान सखे। जय हिन्दी जय हिन्दी हिन्दी------


कह कर इसे पुरानी हिन्दी ,हो गय अमर गुलेरी जी, देशिलबैना कह कर गाए, कवि कोकिल विद्दापति जी। लिख कर के इतिहास शुक्ल जी ,कर गय कार्य महान सखे जय हिन्दी जय हिन्दी हिन्दी----


हिन्दी तभी निराला दिनकर, तुलसी सूर कबीर दास गुप्त महादेवी नेपाली,अटल या कि गोपाल दास हिन्दी से है वसुधा कुटुम्ब,है जानकी बल्लभ जान सखे जय हिन्दी जय हिन्दी हिन्दी----


हिन्दी जम्मु से कन्याकुमारी, मिजोरम गुजरात तलक हिन्दी गंगा की पावनता ,गुंजीत है जिससे ये फलक पर्वत राज हिमालय गाता ,हिन्दी का जय गान सखे जय हिन्दी जय हिन्दी हिन्दी-----


हिन्दी भारत मा की श्रृगार ,हिन्दी से है अपना बिहार हिन्दी सिखलाती संस्कार, हिन्दी है जन जन का विचार हिन्दी की गाथा गाते हम, सुन होते लोग नेहाल सखे जय हिन्दी जय हिन्दी हिन्दी-----


वन्दन करते उस हिन्दी की ,जो है सबका मान सखे। जय हिन्दी जय हिन्दी हिन्दी,जय जय हिन्दुस्तान सखे।

नेहाल कुमार सिंह निर्मल मो-7488529732

जीवनवृत[संपादित करें]

NEHAL KUMAR SINGH NIRMAL नेेेहाल कुमार सिंह निर्मल के पिता का नाम रणधीर कुमार सिंह ,माता-नीतु कुमारी, दादा मेजर राजेन्द्र प्रसाद सिंह,दादी गायत्री देवी है। इनका जन्म 12 जुलाई,1996 को बिहार प्रान्त के समस्तीपुर जिला के राजवाड़ा गाव मे एक किसान परिवार मे हुआ। इनके पिता दो भाई है रणधीर कुमार सिंह एव रनवीर कुमार सिंह तथाएक बहन जिनका नाम रंजना सिंह है।इनके चाची का नाम गुड़िया सिंह है । नेहाल सिंह जी अपनेे चार भाईयो (नेहाल कुमार सिंह निर्मल, निखिल कुुुमार सिंह, समर प्रताप सिह सुर्य प्रताप सिंह) मे सबसे बडे है ।नेेहाल सिह ने अपने चाचा रनवीर कुमार सिंह से संगीत की अनौपचारिक शिक्षा ली ।ये विशेष तौर से कविता,गीत ,नाटक और उपन्यास लिखा करते है।2019मे इन्हे गोवा सरकार से राजभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया।ये एक सांस्कृतिक संस्था डा राजेन्द्र प्रसाद कला एवं युवा विकास समिति के अध्यक्ष है तथा "कौस्तुभ" नामक पत्रिका का संपादन करते है नेहाल सिंह जी का बचपन अपने नानी घर गुजरा ।इनके नाना का नाम राम नरेश सिंह तथा नानी सुनैना देवी है। इन्हे अपने तीनो मामा रणधीर सिंह ,रणवीर सिंह, एवं मनोज सिह से अधिक लगाव रहा है। नेहाल सिंह जी की प्रारम्भिक शिक्षा अपने गाव के प्राथमिक विद्यालय मे हुआ ।इन्हें अपने सभी बाल सखाओं मे सचिन कुमार से अधिक प्रेम रहा है।इसका एक कारण यह भी है की दोनो का स्वभाव परस्पर मिलते थे। सचिन कुमार उच्च विचार रखते है, और नेहाल सिंह को सभी कामों मे प्रोत्साहित करते रहे है सचिन कुमार नेहाल सिहं के मित्र ही नही बल्कि उनके जीवन का प्रमुख भाग हैं।बाद के दिनों मे निशांत कुमार झा ,अतुल प्रकाश, मुन्ना कुमार दास आदि कई मित्र हुए। नेहाल सिंह जी हिन्दी, बज्जिका, तथा अन्य आंचलिक भाषाओं के अलावा उर्दू की भी जानकार है ।ये उर्दू की शिक्षा उर्दू अकादमी पटना से औपचारिक रूप से ग्रहण किया।

प्रकाशित पुस्तक[संपादित करें]

काव्य संग्रह

गीत[संपादित करें]

★बाली उमर मोरी चैन अब नाहीं पिया गए मोसे दूर

सूनी सेज जब निरिखे नयन मोरी उठत जियरा मे पीर

टूट गई मोरि आस सखी री छूटे पिया के प्यार छूट रही मेहंदी की लाली लौट सजन एक बार

बाली उमर मेरी दिल में लगी थी पिया मिलन की आस पाऊ सजन है रात मिलन की पीहू नहीं मेरे पास सूनी पड़ी है सेज पिया की सुनी घर संसार लौट सजन एक बार

प्यासी अखियां आस लगाए देखत राह तुम्हारे नीर बहे यू रात सावन की पुकारे प्रीत हमारे आजा मेरे पास प्रीतम रे टूटे न दिल के तार लौट सजन एक बार

यौवन उमरा रोम फरक रहे होय अखियां भारी नजर पड़ी जब से पिया कि टूटे प्रीत हमारी आयत पीहू नेहाल होऊ री अरज करू सौ वार लौट सजन एक बार

छूट रही मेहंदी की लाली लौट सजन एक बार


●हर युगों में रहे आबाद-ए-दोस्ती आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

श्री कृष्ण सुदामा की दोस्ती है एक मिशाल दोस्ती में रंक राजा एक ही समान नंगे पांव दौड़ आती है सरकार-ए-दोस्ती आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

दोस्ती की लाज बचाते है अंग राज भाई धर्म जान के भी करते रहे वार जान दे के भी बचाए है जावाज-ए-दोस्ती आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

गीता ग्रंथ हो या हो बाईवल कुरान दोस्ती का मतलव सभी मे एक समान मिट के भी निभाते है इमान-ए- दोस्ती आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

आज की ये दोस्ती क्या खुब है यारों माल हाथ हो तो दोस्त मिलते हजारों बाजार मे है बिक रही ये प्यार-ए- दोस्ती आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

अब आपसी का बैर मिटाए हम सभी दोस्तो को दोस्ती सिखादे ऐ नवी हो नेहाल हर इन्सा ऐ है पैगाम-ए- दोस्ती पैगाम-ए- दोस्ती आवाज-ए- दोस्ती आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

       --  नेहाल कुमार सिंह निर्मल

नाटक[संपादित करें]

कविता(बज्जिका)[संपादित करें]

★★बसंत गीत(बज्जिका)

नाची नाची गोरिया उरावे पतंग हो आएल बसंत देख छाएल बसंत हो

खेतवा गमक उठल सरसो फूला गेल अमवा के डलिया मोजर देख आ गेल अमवा पर कोइली गावे राग बसंत हो आएल बसंत देख छाएल बसंत हो

गोरीया के हाथ दमके मेहंदी के लाली जियारा लुभाबे उनकर कान के बाली ओठवा से चूए जइसे मद मकरंद हो आएल बसंत देख छाएल बसंत हो

तीसी के फूल से लपट हंसे भंवरा गेंदा के गंध से गमक रहल दुअरा गोरीया नेहाल भेल हियरा उमंग हो आएल बसंत देख छाएल बसंत हो

नाची नाची गोरीया उड़ावे पतंग हो आएल बसंत देख छाएल बसंत हो

हास्य कणिकाएं[संपादित करें]

साहित्यिक यात्रा[संपादित करें]

★सम्मान व पुरस्कार

  • बिहार कलाश्री सम्मान-2014
  • राष्ट्रीय सद्भावना सम्मान-2015
  • बिहार कला रत्न सम्मान-2015
  • हिन्दी सेवा सम्मान-2017
 (बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा)
  • हिन्दी सेवा सम्मान-2019
  (गोवा सरकार द्वारा)