सदस्य:Lokeshpincha.h

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खनाहत तथा कान के परदे फाडनेवाले पुकारसे अकाश गूँज उठा । बरेलीका बलवा इतनी बारीकीसे रचा गया था,जिसमें यह भी मुकर्रर था कौन किस गोरेको चलता करे ।११बजे ६८वी कपनी छावनी के अंग्रेजोंपर टूट पडी । ब्रिगेडियर सित्राल्ड पहलीही ढगलेम हना गया। कँ.किर्त्री,लेफ्रेज़र, साजेंट वॉल्टन, कर्नल ट्रुप, कँ. रॉबट्र्सन तथा इनके साथ ऋतिकारियोंक हाथ लगे गोरे मार डाले गये। हॉ,३२ गोरे इस हत्याकांड बचकर नैनीताल पहुँच पाये। इस तरह केवल छः घंटोंमें बरेली से अंग्रेजों का राज उठा गया।

यूनियन जँकको नीचे खींचकर स्वातत्र्यका झण्डा जब त्ररेलीमें चढाया गया तब तोपखानेके स्वेदार बरख्तखॉने सेनाका आघिपत्य स्वीकार किया। दिल्ली के घेरेके समय इस बरख्तखॉका बारबार जिऋ करना पडेगाही। उसने सिपाहियोके जमघटके सामने इस विषयपर अत्यंत उत्सहवर्धक भाषण किया,कि स्वाधीनता प्रास होनेके बाद सिपाहियों को कैसे बरताव रखना चाहिये तथा स्वराज्य प्रस्थापित करने के बाद उसे बनाय रखनेके लिए किन दायत्वपूर्ण कर्तव्योका भार उठाना पडता है। डसके बाद यह स्वदेशी ब्रिगेडियर गोरे ब्रिगेडियरकी गाडीमे सवार हो कर शहरभरमे घूमा। उसके पीछे उसके मातहत नये नियुक्त हिदीं अदिकारी,उन उन क्षेणिके अग्रेज अफसरों की गाड़ियों में बैठे जा रहे थे।सम्राट के प्रतिनिधि के रूप मे सारे रूहेलखंड के अधिपति के नाते खानबहादुर खॉ गौरव जनता ने जयव्वनिसे किया। बरेलीकें गोरोके घरबार पहलेही जलाया जा चुके थे। खानबहादुर ने उन अग्रेजों को अपने सामने पेश करने की आज्ञा दी, जो बंदी बनाये गये थे। खान पहले अग्रेजी शासनकाल मे न्यायाध्यक्ष का काम कर चुका था,जिससे अग्रेजो के दण्डविधान से वह अच्छी तरह परिचित था। इसीसे इन अग्रेज अमियुक्तो के मुकदमे मे पंचायत बुलायी गयी।अमियुक्तोमे उत्तर-पच्छिम सीमाप्रांत के लेफ्टनेंट गवर्नर का दामाद एक डॉक्टर, बरेली के सरकारी महाविद्यालय का प्राचार्य तथा बरेली का सबसे बढ़ा न्यायाधीश था।क