सदस्य:Kdugar/प्रयोगपृष्ठ

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भूमिका[संपादित करें]

मेरा नाम कृति दुगड़ है। ३० अक्टूबर १९९९ , चेन्नई में मेरा जन्म हुआ था। मेरी आयु १७ वर्ष है। जबकि मेरा जन्म चेन्नई में हुआ था, मेरा पालन पोषण कोलकाता में हुआ है। मैंने अपनी ज़िन्दगी के १७ वर्ष वही पर बिताए है। 

मेरा परिवार[संपादित करें]

मेरा परिवार बहुत बड़ा है। मेरी दादी के ७ बच्चे है जिनमें से सबसे छोटे मेरे पिताजी है। इतना बड़ा परिवार होने के कारण साथ रहना असंभव होता। इसी कारण हम एकल परिवार की तरह रहते है, पर सारे त्योहार साथ में मनाते है।  मेरे १५ भाई बहन है। जब हम सब साथ मिल जाए तो हमे और किसी की ज़रूरत ही नही होती। हम साथ मिलकर खूब मस्ती करते है। कभी पुरानी यादों को ताजा कर लेते है तो कभी गाने गाकर, खेल खेलकर नई यादें बना लेेते है। 

 मेरे घर में मेरी माँ, पिताजी और छोटा भाई रहते है। मेरे पिताजी का नाम मनोज कुमार दुगड़ है। मेरे पिताजी और उनके भाइ साथ में व्यापार करते है। मेरी माँ का नाम शैली दुगड़ है। वह एक गृहणी है। उन्हें पढ़ने और पढाने का खूब शौक है, इसलिए बचपन से ही उन्होंने मुझे और मेरे भाई को पढ़ाया था, जिसके कारण हमें ट्यूशन की कभी ज़रूरत ही नही पड़ी। मेरे माता पिता बहुत ही सरल हैं, परन्तु वे कड़ी मेहनत में विश्वास रखते है।  मेरे छोटे भाई का नाम वेदांंत दुगड़। वह उम्र में तो मुझसे तीन साल छोटा है परंतु कद में मुझसे बहुत लंबा है। उसे खेल कूद में अत्यंत रुची है। वह पढ़ाई में भी बहुत अच्छा है। मैं अपने परिवार जन से बहुत प्यार करती हूँ। आज मैं जो कुछ भी हूँ, उनके प्यार, बढ़ावे एवं मार्ग दर्शन के वजह से ही हूँ। 

मेरी शिक्षा[संपादित करें]

मैंने अपनी पढ़ाई सुशीला बिरला गर्ल्स स्कूल, कोलकाता से की थी। मेरा विद्यालय बहुत अच्छा है। मैंने अपनी जिंदगी के १३ साल वहाँ बिताए है और वह मुझे मेरे दूसरे घर जैसा प्रतीत होने लगा था। ११वी कक्षा में मैने मानविकी लेने का निर्णय किया। मानविकी लेने का मुख्य कारण था कि मुझे मनोविज्ञान में बहुत रुचि थी। १२वीं कक्षा के बाद मैं क्राइस्ट विश्वविद्यालय में चुनी गयी। अब मैं मनोविज्ञानअर्थशास्त्र तथा नागरिक शास्त्र में बी.ए का अध्ययन कर रही हूँ।

मेरी रुचियाँ[संपादित करें]

अगर देखा जाए तो मैं बहुत चंचल हूँ। मुझे कभी कुछ पसंद आता है तो कभी कुछ। पर जीवन में कुछ ऐसी चीज़ें भी है जो हर बार खुशी देती है। मुझे पढ़ना बहुत पसंद है। रात-रात जाग कर मैं किताबें पढ़ा करती हूँ । पढ़ने के साथ साथ मुझे लिखने का भी बहुत शौक है। कविता, कहानियाँ लिखकर जो सुकून मिलता है, वो कभी और नही मिलता। साहसिक खेलों से मुझे बहुत लगाव है। मैनें कई ऐसे खेलो में भाग लिया है और उनसे मिलने वाला रोमांच अतुल्य है। साधारण मनुष्य की तरह मुझे नए लोगों से मिलना, उनसे बातें करना, नई जगहें घूमना बहत पसंंद है। 

मेरा लक्ष्य[संपादित करें]

 ज़िन्दगी में लक्ष्य का होना बहुत जरूरी होता है।अगर व्यवसाय की नज़रों से देखा जाए तो मुझे मनोवैज्ञानिक या अध्यापिका बनना है। मनोविज्ञान में मेरी रुचि ही इन व्यवसायो को चुनने के पीछे सबसे बड़ा कारण है। मनोवैज्ञानिक बनकर मुझे लोगो की मदद करनी है, समाज में अपना योगदान देना है। मनोविज्ञान पढ़ाने की चाह तथा अपने अध्यापक-अध्यापिकाओं से प्रेरणा के कारण मैंने शिक्षा का क्षेत्र चुना है। व्यकक्तिगत रूप से देखा जाए तो मुझे अपने माता-पिता के लिए घर खरीदना है, एक या उस समय मेरी जितनी क्षमता हो, उतने बच्चों की शिक्षा में आर्थिक रूप से समर्थन देना है।