सदस्य:पद्मसंभव श्रीवास्तव

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परिचय[संपादित करें]

नाम : पद्मसंभव श्रीवास्तव

जन्म : ३ अक्टूबर , १९६० , पटना, बिहार

शिक्षा : सन १९८० ई. में स्नातकोतर (मनोविज्ञान), पटना विश्वविद्यालयपत्रकारिता और छायांकन में रूचि।[1]

नैदानिक मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर और इस विषय में कई मनोविकारों के सन्दर्भ में प्रयोगात्मक शोध अध्ययन। मादकद्रव्य व्यसन के क्षेत्र में मनोपचार और पुनर्वास में प्रवीणता और प्रशिक्षणप्राप्त। रचनात्मक लेखन और छायांकन में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ। सन १९७४ ई. से निरंतर रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में सक्रिय । आकाशवाणी, पटना केंद्र द्वारा सन् १९७५ ई. से १९९८ ई. तक छायांकन विषयक वार्ता , कथा साहित्य , प्रसारणयोग्य नाट्यलेखन प्रसारित। 'स्वतंत्र भारत' हिंदी दैनिक समाचार में सन् १९९० ई. में वरीय फीचर संपादक के रूप में कार्य अनुभव। सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं 'धर्मयुग' , सन्डे मेल' , जनसत्ता' , नवभारत टाइम्स' और 'स्वतंत्र भारत',' हिंदुस्तान ' और ' कादम्बनी ' साहित्यिक पत्रिका में आवरणकथाओं का प्रकाशन। प्रसिद्ध उपन्यासकार स्व. हिमांशु श्रीवास्तव के उपन्यास ' लोहे के पँख ' पर आधारित दूरदर्शन केंद्र , पटना (प्रसार भारती निगम) द्वारा सन १९९९ ई. में कमीशन्ड श्रेणी के अंतर्गत स्वीकृत टेली धारावाहिक का निर्माण और प्रस्तुति। दूरदर्शन केंद्र , गोरखपुर के लिये सन् २००१ ई. में ' चाँद गवाह है ' शीर्षक धारावाहिक का निर्माण और प्रस्तुति।चर्चित निर्देशक संजय उपाध्याय के साथ ' नदी फिर बह चली' उपन्यास पर आधारित टेली धारावाहिक ' परबतिया' का पटकथा लेखन। सम्प्रति,स्वतंत्र रूप में विभिन्न कार्यक्रम निर्माताओं के साथ टीवी पटकथा लेखन और विभिन्न साहित्यिक वेब पत्रिकाओं के लिये फीचर लेखन।

सन्दर्भ[संपादित करें]

~~पद्मसंभव~~